- विधानसभा में छुट्टियों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा शेख अब्दुल्ला की छुट्टी रद्द किए जाने पर हंगामा हुआ
- केंद्र ने महाराजा हरि सिंह की जयंती पर अवकाश घोषित किया, शहीदी दिवस और शेख अब्दुल्ला की छुट्टियां रद्द की गईं
- नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने शेख अब्दुल्ला के राजनीतिक संघर्ष और लोकतंत्र में उनके योगदान को बताया
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में छुट्टियों को लेकर जमकर हंगामा हुआ है. अब यह केंद्र शासित प्रदेश है और केंद्र सरकार की ओर से शेख अब्दुल्ला के नाम पर पहले से चली आ रही छुट्टी को रद्द कर दिया गया है. इसके अलावा आखिरी राजा महाराजा हरि सिंह की जयंती पर छुट्टी की घोषणा की गई है. मंगलवार को इस मसले पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जमकर बवाल हुआ. भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता आमने-सामने आ गए. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता अब्दुल माजिद लारमी ने कहा कि महाराजा हरि सिंह की जयंती पर छुट्टी रद्द की जाए. यदि यह छुट्टी बनाए रखनी है तो फिर शेख अब्दुल्ला के नाम पर फिर से अवकाश घोषित किया जाए.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता का इतना कहना था कि भाजपा के विधायक भड़क गए. वे महाराजा अमर रहे के नारे लगाने लगे. उन्होंने महाराजा हरि सिंह के अपमान का आरोप सरकार पर लगाया. इसके जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक शेर-ए-कश्मीर जिंदाबाद के नारे लगाने लगे. शेख अब्दुल्ला को शेर-ए-कश्मीर के नाम से जाना जाता है. एनसी के नेताओं ने कहा कि शेख अब्दुल्ला लोकतंत्र का प्रतीक हैं और उन्होंने तानाशाही से लड़ने के लिए संघर्ष किया और उससे आजादी दिलाई थी. उनके चलते ही जम्मू-कश्मीर के लोगों को राजनीतिक अधिकार मिले थे.
इस दौरान पीडीपी के विधायकों ने भी 13 जुलाई को अवकाश की मांग की. इससे पहले सरकार ने 5 दिसंबर का अवकाश रद्द किया था, जो शेख अब्दुल्ला की जयंती पर होता रहा है. इसके अलावा 13 जुलाई को शहीदी दिवस की छुट्टी भी रद्द हुई थी. हालांकि सरकार की ओर से 23 सितंबर को महाराजा की जयंती पर अवकाश की घोषणा की थी. कल ही 23 सितंबर है और इस मौके पर अवकाश रहेगा. इसी के चलते सदन में जमकर हंगामा हुआ. इस दौरान विधानसभा स्पीकर अब्दुल रहीम राथेर ने सभी को समझाने का प्रयास किया, लेकिन हंगामा जारी रहा.
किस घटना की याद में मनाया जाता है शहीदी दिवस
बता दें कि महाराजा हरि सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी. 13 जुलाई, 1931 को हुए इस वाकये में 22 लोग मारे गए थे. इसी दिन की याद में जम्मू-कश्मीर में शहीदी दिवस मनाया जाता रहा है. लेकिन अब यह छुट्टी रद्द हो गई है. इसे लेकर भी एक वर्ग में गुस्सा है. बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 1934 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए थे. तब से ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सरकारें चुनी जा रही हैं. हालांकि बीच में महाराजा हरि सिंह फिर से ताकतवर हुए और उनके पास काफी अधिकार भी थे. महाराजा हरि सिंह वह शख्सियत हैं, जिनका जम्मू में बहुत सम्मान है, लेकिन कश्मीर के लोग अलग राय रखते रहे हैं.
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