राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के सियासी हमले का जवाब दिया है.उन्होंने अखिलेश यादव पर जाट समाज के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा, सियासत की जंग में कुछ सस्ते लफ्ज ही तो बोलने थे तो मेरा नाम लेकर वो बोल देते, कोई बात नहीं होती. जाट समाज पर निशाना साधना और यह कहना कि हमने एबीसीडी सिखाई. यह अहंकार मैं करीब से देख चुका हूं. ऐसा रवैया आचरण सिर्फ पतन की ओर ले जाता है. अखिलेश यादव ने कुछ दिन पहले जयंत चौधरी का नाम लेते हुए बिना कहा था कि हमने उनको चवन्नी से रुपया बनाया. राजनीति की एबीसीडी हमने सिखाई.
सियासत की लड़ाई में कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो मेरा नाम लेकर बोल देते,
— Jayant Singh (@jayantrld) August 21, 2026
कोई बात नहीं थी…
जाट समाज को टारगेट करना और कहना ABCD हमने सिखाई?
मैं इस अहंकार को देख चुका हूँ करीब से और मानता हूँ ऐसा आचरण सिर्फ़ पतन लाता है!
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक रैली में कहा था कि गठबंधन में कैसे-कैसे साथी हमारे साथ आए. हमने जिन लोगों को चवन्नी से रुपया बनाया, वो भी साथ छोड़कर चले गए. जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए उन पर जाट समाज को अपमानित करने का आरोप लगाया है. अगर राजनीतिक जंग लड़नी है तो सीधा नाम लेकर बात करें. ऐसे अहंकार से सियासी पतन होता है. गौरतलब है कि सपा के मुस्लिम यादव समीकरण में वेस्ट यूपी की पार्टी रालोद का जाट वोट बैंक बेहद निर्णायक रहा. जाट, मुस्लिम यादव वोट सपा को 2012 में सत्ता दिलाने में अभी अहम भूमिका निभाई थी.
महागठबंधन के बाद अलग राह पकड़ी
रालोद, सपा और बसपा ने महागठबंधन बनाकर 2019 का विधानसभा चुनाव साथ लड़ा था. हालांकि मोदी-योगी लहर में ये गठबंधन कोई कमाल नहीं दिखा पाया. पूर्व सीएम अखिलेश यादव और जयंत चौधरी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में भी हाथ मिलाया. आरएलडी ने 9 सीटें जीती थीं. पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन का राजनीतिक लाभ उठाकर ग्रामीण क्षेत्र के वोटरों को गठबंधन लाने में जुटा रहा.
जयंत चौधरी ने छोड़ा सपा का साथ
जयंत चौधरी ने फरवरी 2024 में समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन का साथ छोड़ दिया था. एनडीए में शामिल होने के बाद उन्हें केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया. दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान सपा और रालोद के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद उभरे. खासकर मुजफ्फरनगर और हाथरस जैसी सीटों पर मामला बिगड़ा.
केंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा की. जयंत चौधरी ने खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार जताया. 12 फरवरी 2024 को उन्होंने भाजपा की अगुवाई वाला एनडीए गठबंधन ज्वाइन किया और सपा से अपना नाता तोड़ लिया. रालोद ने एनडीए के साथी के तौर पर 2024 का लोकसभा चुनाव साथ लड़ा.
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