दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर से पहाड़ों का दीदार करने हिमाचल प्रदेश और लद्दाख जाने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है. हिमाचल में दो बेहद अहम सुरंगों को कल यानी 11 सितंबर से आम लोगों के लिए खोला जा रहा है. ये सुरंग नेशनल हाइवे-3 (NH-03) के पंडोह-टकोली सेक्शन में बनी हैं. इन टनल के खुलने के बाद हिमाचल प्रदेश के मंडी और कुल्लू समेत लेह-लद्दाख तक का सफर आसान हो जाएगा. इसका ऐलान खुद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने किया है.
आधा रह जाएगा मंडी और कुल्लू का सफर
फिलहाल हिमाचल प्रदेश के मंडी से कुल्लू पहुंचने में करीब दो घंटे का समय लगता था, लेकिन नई सुरंगों के शुरू होने के बाद यह सफर घटकर लगभग एक घंटे का रह जाएगा. इससे यात्रियों को जाम, संकरे मोड़ों और लैंड स्लाइड प्रभावित इलाकों से काफी राहत मिलेगी.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसका ऐलान करते हुए एक्स पर लिखा, 'हिमाचल प्रदेश में कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा. NH-03 के पंडोह-टकोली सेक्शन पर कनेक्टिविटी में एक बड़ा बदलाव लाते हुए 11 सितंबर 2026 को देओड और हनोगी में बड़ी सुरंगें ट्रैफिक के लिए खोली जा रही हैं.'
6 KM का मुश्किल रास्ता घटकर 3.5 KM का हुआ
इस प्रोजेक्ट के तहत दो सुरंगें तैयार की गई हैं. इन सुरंगों के शुरू होने से पहले का लगभग 6 किलोमीटर लंबा घुमावदार और संवेदनशील पहाड़ी मार्ग घटकर सिर्फ 3.5 किलोमीटर रह जाएगा.
- देओद सुरंग (T4-01) : 2.8 किलोमीटर लंबी
- हनोगी सुरंग (T4-02) : 650 मीटर लंबी

जाम से मिलेगी बड़ी राहत
जोगनी माता मंदिर, देओद और हनोगी क्षेत्र लंबे समय से ट्रैफिक जाम की समस्या के लिए जाने जाते रहे हैं. पर्यटन सीजन में यहां 1 से 2 घंटे तक वाहन फंसे रहते थे. नई सुरंगों के चालू होने के बाद इन क्षेत्रों में लगने वाले जाम से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है.
मनाली और लद्दाख जाने वालों के लिए बड़ी सुविधा
यह रास्ता सिर्फ हिमाचल के पर्यटन स्थलों के लिए ही नहीं, बल्कि लेह-लद्दाख तक जाने वाले लोगों के लिए भी अहम है. इन टनल के खुलने के बाद मनाली जाने वाले टूरिस्ट का समय बचेगा. रोहतांग और लाहौल-स्पीति की यात्रा आसान होगी. इसके अलावा लेह-लद्दाख की ओर जाने वाले सैन्य काफिलों को तेज और सुरक्षित मार्ग मिलेगा. इस रास्ते पर हर मौसम में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी. अभी तक सर्दियों में यह रास्ता अक्सर बंद हो जाता है.
लैंडस्लाइड वाले हिस्सों को किया जाएगा बाईपास
पंडोह और हनोगी इलाके में अक्सर लैंडस्लाइड की घटनाएं होती रहती हैं. यहां हर साल चट्टानें गिरने की घटनाएं सामने आती हैं. नई सुरंगों के जरिए इन संवेदनशील हिस्सों को बाईपास किया जा सकेगा, जिससे यात्रा पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होगी.
₹4466 करोड़ का है ये प्रोजेक्ट
ये दोनों सुरंगें पंडोह बाईपास-टकोली 4-लेन प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं. करीब 18.908 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट का निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मोड (HAM) के तहत किया गया है. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹4,465.94 करोड़ है.
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