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किस्सा यूपी का: सायनाइड लेकर दंगे में उतरी, 20 साल बड़े शख्स से की शादी, कहानी सुचेता कृपलानी की

'किस्सा यूपी का' की चौथी किस्त में आज बात यूपी की चौथी मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी के बारे में. जिन्होंने अलग-अलग समय में महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, विनोवा भावे, इंदिरा गांधी तक से नाराजगी ली. लेकिन अपने विचारों पर अडिग रहीं.

किस्सा यूपी का: सायनाइड लेकर दंगे में उतरी, 20 साल बड़े शख्स से की शादी, कहानी सुचेता कृपलानी की
किस्सा यूपी का

जन्म अंबाला में, पिता बंगाली, राजनीति दिल्ली में... लेकिन राजनीति की बिसात कुछ ऐसी बिछी कि कमान संभालनी पड़ी उत्तर प्रदेश की. बात सुचेता कृपलानी की, जो थी भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री. वो भी देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में. उत्तर प्रदेश विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद लिस्ट के अनुसार सुचेता कृपलानी 2 अक्टूबर 1963 को उत्तर प्रदेश की कमान अपने हाथों में ली. वो 13 मार्च 1967 तक यूपी की मुख्यमंत्री रहीं. इस दौरान उन्होंने कई ऐसे काम किए, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रही. पंडित नेहरू और इंदिरा की नाराजगी के बाद भी सुचेता यूपी की सीएम बनी. इसके पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है.

'किस्सा यूपी का' की चौथी किस्त में आज बात यूपी की चौथी मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी के बारे में. जिन्होंने अलग-अलग समय में महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, विनोवा भावे, इंदिरा गांधी तक से नाराजगी ली. लेकिन अपने विचारों पर अडिग रहीं.

यूं तो सुचेता कृपलानी के बारे में लिखने और बताने को बहुत सी बातें हैं. लेकिन उनके तीन सबसे रोचक किस्से हैं-

1. महात्मा गांधी की न के बाद भी 20 साल बड़े आचार्य कृपलानी से शादी

साल था 1936, पढ़ाई-लिखाई के बाद सुचेता कृपलानी कांग्रेस की एक तेज-तर्रार नेता के रूप में स्थापित हो चुकी थी. लेकिन इसी साल उन्होंने अपने परिवार और महात्मा गांधी की नाराजगी के बाद भी आचार्य जेबी कृपलानी से शादी की. आचार्य कृपलानी सुचेता से 20 साल बड़े थे. महात्‍मा गांधी इस विवाह के पक्ष में नहीं थे. गांधी को डर था कि इस विवाह से कृपलानी का मन अपने काम से भटक सकता है. तब आचार्य कृपलानी महात्मा गांधी का दाहिना हाथ हुआ करते थे.

लेकिन गांधी के मना करने के बाद भी सुचेता ने जेबी कृपलानी से शादी की. इसी रिश्ते के बाद उनका नाम सुचेता मजूमदार से सुचेता कृपलानी हुआ. सुचेता कृपलानी ने 1940 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला शाखा ‘अखिल भारतीय महिला कांग्रेस' की स्थापना की. 1942 में गांधी के साथ भारत छोड़ो आंदोलन में लगी रहीं और जेल भी गईं. 1946 में उन्‍हें संविधान सभा का सदस्य चुना गया. 1949 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का प्रतिनिधित्‍व किया.

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2. नोआखाली दंगे में सायनाइड की गोली के साथ उतरी

भारत की आजादी से एक साल पहले 1946 में नोआखाली के भयानक सांप्रदायिक दंगे भड़के. इस दौरान सुचेता महात्मा गांधी के साथ पीड़ितों की मदद करने पहुंचीं. लेकिन इस दौरान वो हमेशा अपने साथ सायनाइड की गोली रखा करती थी. ताकि संकट के समय वे दुश्मनों के आगे झुकने की बजाय अपनी जान दे सकें.

3. पति हॉस्पिटल में थे भर्ती, तभी मुख्यमंत्री बनाने का आया प्रस्ताव

सुचेता कृपलानी के मख्यमंत्री बनने का किस्सा भी बेहद रोचक है. 1963 में कांग्रेस के भीतर बगावत के सुर तेज थे. कांग्रेस के लोग ही कांग्रेस को चुनौती दे रहे थे. यूपी में नेहरू के खिलाफ बगावत कर रहे लोगों में सबसे बड़ा नाम था चंद्रभानु गुप्‍ता का था. जो तब यूपी के सीएम थे. राजनीतिक स्थितियां तब कुछ ऐसी बनीं कि नेहरू ने कामराज प्लान के तहत चंद्रभानु गुप्‍ता का इस्‍तीफा ले लिया.

इस इस्‍तीफे के बाद कांग्रेस में दो धड़े बन गए. एक धड़ा नेहरू के साथ था, जिसका नेतृत्‍व कमलापति त्रिपाठी कर रहे थे और दूसरा नेहरू के खिलाफ, जिसकी कमान चंद्रभानु गुप्‍ता के हाथों में थी. नेहरू की खिलाफत के बाद भी कांग्रेस के कुबेर कहे जाने वाले सीबी गुप्‍ता का यूपी की राजनीति में गहरा दखल था. 

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चंद्रभानु गुप्‍ता के इस्‍तीफे के बाद तलाश थी प्रदेश के नए मुख्‍यमंत्री की, जो किसी भी हाल में कमलापति त्रिपाठी यानी नेहरू के गुट से नहीं हो सकता था. इसी दौरान वो अस्पताल में भर्ती जेबी कृपलानी मिलने अस्‍पताल पहुंचे और अपनी परेशानी उनसे साझा की. कृपलानी ने अपने बगल में बैठी पत्‍नी सुचेता की ओर इशारा करके कहा कि इसे बनाइए प्रदेश का नया मुख्‍यमंत्री.

चंद्रभानु गुप्‍ता को अपनी समस्या का हल मिल चुका था. उन्होंने सुचेता को आगे बढ़ाया. इस तरह 1963 में सुचेता कृपलानी उत्‍तर प्रदेश की पहली महिला मुख्‍यमंत्री और आजाद भारत की पहली महिला मुख्‍यमंत्री बनीं. 

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सुचेता कृपलानी की जीवनी

  • सुचेता कृपलानी का जन्म 25 जून, 1908 में हरियाणा के अंबाला में एक बंगाली परिवार में हुआ था. सुचेता के पिता का नाम एस.एन. मजुमदार था, जो ब्रिटिश सरकार के अधीन एक डॉक्टर थे. हालांकि इसके बावजूद वह एक राष्ट्रवादी व्यक्ति थे.
  • सुचेता कृपलानी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के इन्द्रप्रस्थ और सेंट स्टीफन कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद सुचेता ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में व्याख्याता के पद पर कार्य करना शुरू किया.
  • साल 1936 में सुचेता की शादी आचार्य जीवतराम भगवानदास कृपलानी के साथ हुई. इसके बाद सुचेता स्वतंत्रता की लड़ाई की ओर पूरी तरह से सक्रिय हो गईं.
  • संविधान सभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए सुचेता कृपलानी को शामिल किया गया था. उन्होंने भारत के संविधान में महिला अधिकारों के लिए आवाज उठाई थी.
  • देश की आजादी के बाद सुचेता कृपलानी ने सक्रिय राजनीति में एंट्री की और साल 1952 में सुचेता कृपलानी लोकसभा की सदस्य निर्वाचित हुईं. वहीं साल 1957 में उन्होंने नई दिल्ली विधानसभा का सदस्य बनाकर लघु उद्योग मंत्रालय दिया गया. 
  • इसके बाद 1962 में वह कानपुर से उत्तर प्रदेश विधानसभा सदस्य चुनी गईं.  एक साल बाद साल 1963 में सुचेता कृपलानी उत्तर-प्रदेश की मुख्यमंत्री बन गईं. 
  • इसके बाद साल 1967 में सुचेता ने गोंडा विधानसभा क्षेत्र से चौदहवीं लोकसभा का चुनाव जीता और साल 1971 में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया. 1 दिसंबर 1974 को दिल का दौरा पड़ने से दिल्ली में सुचेता कृपलानी का निधन हुआ. 

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