दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन देश की दूसरी प्रमुख बुलेट ट्रेन परियोजना है. दिल्ली से वाराणसी तक उत्तर प्रदेश के 10 बड़े शहरों को ये हाईस्पीड नेटवर्क से जोड़ेगी.865 किमी लंबी हाईस्पीड रेल परियोजना में 12 से 13 स्टेशन बनाए जा सकते हैं. इसके अलावा लखनऊ से अयोध्या के लिए 135 किमी का एक अलग लिंक रूट भी प्रस्तावित है.यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के 22 से अधिक जिलों से गुजरेगा. इससे दिल्ली से वाराणसी के बीच दूरी सिर्फ 3 घंटे 55 मिनट में तय होगी. इस हाईस्पीड रेल नेटवर्क परियोजना पर 1.21 लाख करोड़ से 1.71 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) इस परियोजना की जिम्मेदारी संभाल रही है.
- 350 किमी प्रति घंटा डिजाइन स्पीड
- 320 किमी प्रति घंटा ऑपरेटिंग स्पीड
- 4 घंटे से कम वक्त में दिल्ली से वाराणसी
- 1.71 लाख करोड़ रुपये अनुमानित लागत
संभावित स्टेशन (12 से 13 स्टेशन)
1. सराय काले खां, हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली)
2. जेवर एयरपोर्ट (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट)
3. मथुरा
4. आगरा
5. इटावा
6. कन्नौज
7. लखनऊ
8. अयोध्या (लिंक रूट)
9. रायबरेली
10. प्रयागराज
11. भदोही
12. वाराणसी (मंडुवाडीह)
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी
NCR के यात्रियों के लिए दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट गेमचेंजर साबित होगा. जेवर एयरपोर्ट न केवल दिल्ली, बल्कि यूपी के ज्यादातर बड़े शहरों को बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जोड़ देगा. दिल्ली या पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग कुछ मिनटों में सीधे एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे. जबकि देश-विदेश से नोएडा एयरपोर्ट उतरने वाले यात्री कुछ ही घंटों के भीतर लखनऊ, मथुरा, अयोध्या जैसे यूपी के बड़े शहरों में अपने आखिरी गंतव्य तक भी पहुंच सकेंगे.
देसी-विदेशी पर्यटकों को फायदा
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट दिल्ली को उत्तर प्रदेश के सभी बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्रों मथुरा, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी से जोड़ देगी. आगरा के ताजमहल, वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर, अयोध्या में राम मंदिर या प्रयागराज संगम जैसे बड़े धार्मिक स्थलों का एक साथ दौरा किया जा सकेगा. विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी इस हाईस्पीड कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा.
डीपीआर पर काम तेज
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के बाद केंद्र सरकार ने जो प्राथमिकता सूची में जो सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर रखे हैं. उनमें से ये एक है. इसका विस्तृत सर्वे और डीपीआर का काम रेलवे बोर्ड के पास अंतिम तकनीकी एवं वित्तीय मंजूरी के पास है. NHSRCL इस परियोजना की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी DPR और हवाई LiDAR सर्वे पर काम चल रहा है.पहले इस लाइन को नेशनल हाईवे(NH-2) के समानांतर ले जाने की की प्लानिंग थी.मगर बुलेट ट्रेन की 320 किमी प्रति घंटा की रफ्तार के लिए रूट का ज्यादातर सीधा होना जरूरी है. लिहाजा अधिक मोड़ से बचने के लिए इसके एलाइनमेंट में तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं.
कानपुर में भी बुलेट ट्रेन स्टेशन की मांग
बुलेट ट्रेन के मौजूदा प्रस्ताव में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक शहर कानपुर को सीधे कॉरिडोर में जगह नहीं मिली है. कानपुर सांसद अवस्थी द्वारा संसद में डीपीआर की समीक्षा और कानपुर को प्रमुख स्टेशन बनाने की मांग की गई है. कानपुर अभी दिल्ली-हावड़ा के बिजी रूट का अहम पड़ाव है.
वाराणसी-सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट को आगे वाराणसी-सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल तक एक्सटेंशन देने का प्लान है. यह लाइव 760 से 800 किमी लंबी हो सकती है. उतर प्रदेश (वाराणसी) से बिहार की राजधानी पटना होते हुए ये न्यू जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी को जोड़ेगी. वाराणसी से सिलीगुड़ी का सफर 12 घंटे की जगह 2.5 से 3 घंटे रह जाएगा. दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी का सफर 6 से 6.30 घंटे में पूरा हो सकेगा. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन ने नेशनल रेल प्लान (NRP 2030) के तहत इस कॉरिडोर की पहचान की है.
संभावित स्टेशन
1. वाराणसी
2. बक्सर (बिहार)
3. पटना
4. मुजफ्फरपुर या दरभंगा
5. पूर्णिया या कटिहार
6. किशनगंज
7. सिलीगुड़ी, न्यू जलपाईगुड़ी (बंगाल)
ये भी पढ़ें - बुलेट ट्रेन का किराया कितना होगा? राजधानी-दुरंतो ट्रेनों से कितना सस्ता, जानें फ्लाइट के मुकाबले कितना
ये भी पढ़ें - दिल्ली से चलेगी देश की सबसे लंबी बुलेट ट्रेन, वाराणसी से सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक 1700KM का रूट-स्टेशन, अहमदाबाद-अमृतसर, जम्मू भी प्लान में
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं