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आजम खान की मुश्किलें बढ़ीं, जौहर यूनिवर्सिटी मामले में नई FIR दर्ज; 416 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब नहीं: ED

ED की रिपोर्ट के आधार पर रामपुर में आजम खान और जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामले में नई FIR दर्ज की गई है. रिपोर्ट में जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण खर्च, सरकारी धन के कथित उपयोग और चंदे के स्रोतों को लेकर सवाल उठाए गए हैं.

आजम खान की मुश्किलें बढ़ीं, जौहर यूनिवर्सिटी मामले में नई FIR दर्ज; 416 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब नहीं: ED
जौहर यूनिवर्सिटी मामले में आजम खान के खिलाफ नई FIR
अल्टर्ड बाय NDTV
  • जौहर यूनिवर्सिटी में 416 करोड़ के खर्च पर सवाल, ED रिपोर्ट के आधार पर नई FIR
  • रामपुर में आजम खान के खिलाफ नया मुकदमा, सरकारी धन के इस्तेमाल पर सवाल
  • जौहर ट्रस्ट को मिले चंदे और निर्माण खर्च की जांच
लखनऊ / रामपुर:

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच रिपोर्ट के आधार पर रामपुर के अजीमनगर थाने में नई FIR दर्ज की गई है. रिपोर्ट में जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण पर हुए खर्च, सरकारी धन के कथित उपयोग, सरकारी ठेकों में प्रभाव के इस्तेमाल और ट्रस्ट को मिले कुछ चंदों की वास्तविकता को लेकर सवाल उठाए गए हैं. जांच एजेंसी का दावा है कि यूनिवर्सिटी निर्माण की अनुमानित लागत और ट्रस्ट द्वारा घोषित खर्च के बीच 416 करोड़ रुपये से अधिक का अंतर सामने आया है.

ईडी की रिपोर्ट पर दर्ज हुई FIR

13 अक्टूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज FIR के अनुसार, ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने 10 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया था. FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 316(5) और 318(4) के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1)(d) और 13(2) शामिल की गई हैं. मामले के शिकायतकर्ता ईडी के उप निदेशक पीयूष एस. थॉर्स्ट बताए गए हैं. जांच की जिम्मेदारी पुलिस उप निरीक्षक पंकज पंत को सौंपी गई है.

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आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी
Pic : अल्टर्ड बाय NDTV

416 करोड़ रुपये के अंतर पर सबसे बड़ा सवाल

ईडी की रिपोर्ट में सबसे बड़ा सवाल जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण खर्च को लेकर उठाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, आयकर विभाग से प्राप्त जिला मूल्यांकन अधिकारी की 10 नवंबर 2023 की रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी परिसर की विभिन्न इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी. वहीं, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 तक अपने आयकर रिटर्न में कुल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दिखाया. ईडी के अनुसार दोनों आंकड़ों के बीच करीब 416.14 करोड़ रुपये का अंतर है, जिसका स्पष्ट विवरण ट्रस्ट की घोषित आय और खर्च में नहीं मिला.

सरकारी ठेकों से जुड़ी राशि पर भी सवाल

जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कुछ ठेकेदारों को आजम खान के मंत्री रहने के दौरान सरकारी ठेके मिले और उन ठेकों के लिए खरीदी गई निर्माण सामग्री का एक हिस्सा कथित रूप से जौहर यूनिवर्सिटी निर्माण में इस्तेमाल हुआ. ईडी की रिपोर्ट में सीके एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पवन कुमार जैन के बयान का उल्लेख किया गया है. बयान के अनुसार, कंपनी को 2013-14 से 2016-17 के बीच लगभग 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके मिले थे. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ठेका राशि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा यूनिवर्सिटी के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में लगाया गया. इसी आधार पर ईडी ने कम से कम 55.8 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि के कथित उपयोग का अनुमान लगाया है. हालांकि यह जांच एजेंसी का आकलन है, जिसे अदालत में साबित किया जाना बाकी है.

यूनिवर्सिटी परिसर में सरकारी निर्माण कार्यों का भी जिक्र

ईडी की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश जल निगम की CDS यूनिट-18 से जुड़े एक अधिकारी के बयान का भी हवाला दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी परिसर में एक बड़ा पंडाल, ओबीसी छात्रावास और अस्पताल सहित तीन निर्माण कार्य कराए गए, जिनके लिए राज्य सरकार ने 23.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे. ईडी ने दावा किया है कि सरकारी धन से बने कुछ ढांचों का मालिकाना हक बाद में यूनिवर्सिटी को दिए जाने से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है. इसके अलावा विधायक और विधान परिषद सदस्य निधि से यूनिवर्सिटी परिसर में 6.60 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य कराए जाने का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है.

85.81 करोड़ रुपये से जुड़े कार्य जांच के दायरे में

ईडी ने अपनी रिपोर्ट में 55.8 करोड़ रुपये, 23.41 करोड़ रुपये और 6.60 करोड़ रुपये की रकम का उल्लेख करते हुए कुल 85.81 करोड़ रुपये मूल्य के ऐसे कार्यों और संसाधनों का जिक्र किया है, जिनके बारे में एजेंसी को संदेह है कि उनका संबंध सरकारी धन या सरकारी परियोजनाओं से रहा. जांच एजेंसी इन सभी पहलुओं की अलग-अलग जांच कर रही है.

ट्रस्ट को मिले चंदे की भी जांच

यूनिवर्सिटी निर्माण खर्च के अलावा ट्रस्ट को मिले कुछ चंदे भी जांच के दायरे में हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ ठेकेदारों द्वारा सरकारी ठेके मिलने के बाद ट्रस्ट को चंदा दिया गया. उदाहरण के तौर पर एएस एंटरप्राइजेज का उल्लेख किया गया है, जिसे लगभग 25 करोड़ रुपये के ठेके मिलने के बाद सितंबर 2015 में ट्रस्ट को 40 लाख रुपये का चंदा देने की बात कही गई है. इसके अलावा मेरठ स्थित केएसडी चैरिटेबल ट्रस्ट और सिटी एजुकेशनल सोशल वेलफेयर सोसाइटी से मिले कुल 6.235 करोड़ रुपये के चंदे का भी जिक्र रिपोर्ट में किया गया है. ईडी इन चंदों की वास्तविकता, स्रोत और कथित संबंधों की जांच कर रही है.

ट्रस्ट के संचालन को लेकर भी सवाल

रिपोर्ट में ट्रस्ट के कुछ सदस्यों के बयानों का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि उन्हें कार्यकारी समिति की बैठकों की जानकारी नहीं होती थी और वे निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थे. इन बयानों के आधार पर ईडी ने ट्रस्ट के वित्तीय और प्रशासनिक मामलों पर आजम खान के कथित नियंत्रण का मुद्दा उठाया है.

पुराने 27 मामलों का भी जिक्र

ईडी ने अपनी रिपोर्ट में अजीमनगर और रामपुर कोतवाली में दर्ज 27 पुराने मामलों का भी उल्लेख किया है. इन मामलों में किसानों की जमीन और केंद्र सरकार की शत्रु संपत्ति को कथित तौर पर जौहर यूनिवर्सिटी के लिए कब्जाने के आरोप लगाए गए थे. इन्हीं मामलों के आधार पर ईडी ने पहले मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी. अब PMLA की धारा 66(2) के तहत जुटाई गई जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंपे जाने के बाद नया मुकदमा दर्ज किया गया है.

अदालत में साबित होना बाकी

फिलहाल FIR में दर्ज सभी बिंदु जांच एजेंसी की रिपोर्ट और आरोपों पर आधारित हैं. इन आरोपों की सत्यता और कानूनी वैधता का अंतिम निर्धारण अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा. वहीं, पुलिस और जांच एजेंसियां अब मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, निर्माण खर्च और ट्रस्ट संचालन से संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच में जुटी हैं.

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