- बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर
- नहीं बढ़ेगी बिजली की दर, मिलेगी राहत
- उपभोक्ताओं को मिल सकती हैं कई तरह की सहूलियतें
उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है. प्रदेश के बिजली दर निर्धारण के लिए जुलाई के पहले हफ्ते से नए टैरिफ की घोषणा हो सकती है. इसमें उपभोक्ताओं को कई तरह की सहूलियतें मिल सकती हैं. इसके तहत स्मार्ट मीटर का खर्चा उपभोक्ताओं के बजाय बिजली कंपनियों पर डाला जा सकता है. स्मार्ट मीटर के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए पारदर्शिता को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन पर भी विचार चल रहा है. साथ ही 1912 पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण में हीलाहवाली पर सख्त नियम लागू होंगे.
नहीं बढ़ेगी बिजली की दर, मिलेगी राहत
नियामक आयोग के सूत्रों के अनुसार प्रदेश में बिजली दरें नहीं बढ़ेंगी. साथ ही उपभोक्ताओं को कई तरह की रियायतों की भी घोषणा हो सकती है. घरों में दुकान खोलने के लिए वाणिज्यिक कनेक्शन लेना पड़ता है, इसमें भी रियायत मिलने की उम्मीद है. इसी तरह स्मार्ट मीटर के साथ अभी तक 5 फीसदी चेक मीटर लगाए जा रहे हैं ताकि पता चल सके कि स्मार्ट मीटर तेज तो नहीं चल रहा है.
पावर कार्पोरेशन की ओर से इसके आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाते हैं. ऐसे में नियामक आयोग इस मामले में भी नई गाइडलाइन की घोषणा कर सकता है. पावर कार्पोरेशन की दलील है कि कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर का खर्चा लिया जाए. इसके लिए वह 3838 करोड़ रुपये टैरिफ में डालने की मांग कर रहा है. यह मांग खारिज हो सकती है. इसी तरह बहुमंजिला इमारतों में कनेक्शन के लिए नियमों में बदलाव पर भी विचार चल रहा है.
फ्यूल सरचार्ज की गलत जानकारी से उपभोक्ताओं पर पड़ा था भार
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि परिषद के लोक महत्व प्रस्ताव पर सुनवाई करते हुए आयोग ने ईंधन अधिभार की गणना के तरीके को गलत करार दिया है. वर्मा ने कहा, 14 माह से गलत तरीके से गणना होने से उपभोक्ताओं से करीब 2000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली की गई है. अब परिषद ने इस राशि को वापस दिलाने के लिए भी आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल किया है.
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