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Success Story: 10वीं में स्कूल छोड़ना पड़ा, MPPSC में 6 बार मिली असफलता, अब पहली रैंक लाकर बने FSO अधिकारी

सागर के रहने वाले विजय विजय अहिरवार ने MPPSC परीक्षा में सफलता हासिल की है. उन्होंने SC कैटेगरी में प्रदेशभर में पहली रैंक हासिल कर खाद्य सुरक्षा अधिकारी बने. लगातार 6 बार असफलता मिलने के बाद भी हौसला नहीं टूटा.

Success Story: 10वीं में स्कूल छोड़ना पड़ा, MPPSC में 6 बार मिली असफलता, अब पहली रैंक लाकर बने FSO अधिकारी
7वें अटेम्प्ट में विजय अहिरवार बने खाद्य सुरक्षा अधिकारी.

Success Story: कहते हैं कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता देर से ही सही लेकिन जरूर मिलती है. इस बात को सच कर दिखाया है सागर के 27 वर्षीय विजय अहिरवार (Vijay Ahirwar Success Story) ने... लगातार 6 असफलताओं का सामना करने के बाद विजय ने हार नहीं मानी और आखिरकार मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा आयोजित परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारी (Food Safety Officer) के पद पर चयनित हुए. खास बात यह रही कि विजय ने एससी कैटेगरी में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. विजय की यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, धैर्य और अटूट आत्मविश्वास की मिसाल है. उन्होंने साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां और बार-बार मिलने वाली असफलताएं भी उस इंसान को नहीं रोक सकतीं, जो अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित हो.

सागर के रहने वाले विजय अहिरवार एक साधारण परिवार से आते हैं. परिवार में कुल 7 भाई-बहन हैं. इनमें विजय सहित 5 सदस्य शासकीय सेवाओं में कार्यरत हैं. विजय के पिता शिक्षक हैं, जिन्होंने हमेशा बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी. वहीं उनकी मां केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ी हैं, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को आगे बढ़ाने में हर संभव सहयोग दिया.

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कम अंक आने पर भी नहीं टूटा हौसला

विजय की शुरुआती शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय से हुई, लेकिन जीवन में एक कठिन मोड़ तब आया जब 10वीं कक्षा में अपेक्षा से कम अंक आने के कारण उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा. यह उनके लिए बड़ा झटका था. हालांकि विजय ने इस असफलता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. इसके बाद उन्होंने सागर के एक निजी स्कूल से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की और अपने सपनों को नया आकार देना शुरू किया.

MPPSC परीक्षा में 6 बार हुए असफल 

विजय बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत से ही अपने जीवन का सिर्फ एक लक्ष्य तय किया था- MPPSC में चयन. यही कारण रहा कि उन्होंने कभी किसी अन्य प्रतियोगी परीक्षा का फॉर्म तक नहीं भरा. उनका पूरा फोकस केवल एक ही लक्ष्य पर रहा, लेकिन सफलता का यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था. विजय ने कुल 6 बार MPPSC परीक्षा दी. इस दौरान दो बार वे इंटरव्यू राउंड तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका. बार-बार असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने हर असफलता से सीख ली और अपनी तैयारी को और मजबूत किया.

फिर रोजाना 12 घंटे की पढ़ाई

विजय बताते हैं कि सफलता के लिए उन्होंने रोजाना करीब 12 घंटे पढ़ाई की. उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन और धैर्य सबसे जरूरी हैं. वे कहते हैं, 'जो मेहनत करते हैं, कामयाबी एक दिन जरूर उनके कदम चूमती है. बस जरूरत है लगातार प्रयास करते रहने की और खुद पर भरोसा बनाए रखने की.

परिवार में खुशी का माहौल

विजय अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को देते हैं. खासकर अपनी मां और बहन को, जिन्होंने हर मुश्किल समय में उनका मनोबल बढ़ाया. जब भी असफलता मिली, परिवार ने उन्हें टूटने नहीं दिया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद पर चयनित होने के बाद विजय के घर में खुशी का माहौल है. परिवार, रिश्तेदार और शुभचिंतक लगातार उन्हें बधाई दे रहे हैं. विजय की सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और असफलताओं से निराश हो जाते हैं. विजय अहिरवार की कहानी यह सिखाती है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की ओर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती है. अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत में ईमानदारी हो, तो मंजिल एक दिन जरूर मिलती है.

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