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चूरू तक 3 बड़ी पाइपलाइन, सीकर-झुंझुनूं को फायदा, हरियाणा-राजस्थान को पीने का पानी, हथिनीकुंड बैराज से शेखावाटी आएगा यमुना का पानी

यमुना जल समझौते को लेकर 32 साल का इंतजार खत्म हो गया. हरियाणा और राजस्थान के बीच सोमवार को दिल्ली में यमुना जल को लेकर MoA पर साइन हो गया है.

चूरू तक 3 बड़ी पाइपलाइन, सीकर-झुंझुनूं को फायदा, हरियाणा-राजस्थान को पीने का पानी, हथिनीकुंड बैराज से शेखावाटी आएगा यमुना का पानी
हरियाणा-राजस्थान को पीने का पानी, हथिनीकुंड बैराज से शेखावाटी आएगा यमुना का पानी
IANS

हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना के पानी को लेकर दिल्ली में MoA साइन हो गया. आज का दिन राजस्थान के लिए ऐतिहासिक रहा है. इस परियोजना के जरिए हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से यमुना का पानी राजस्थान के शेखावाटी तक पहुंचाने का टारगेट है. इसके लिए तीन बड़ी पाइपलाइन बिछाई जाएगी. अब जब यमुना जल परियोजना पर हरियाणा और राजस्थान के बीच एमओए साइन हो गया तो वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को उनके पुराने बयान की याद दिलाई. राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत ने कहा था कि जिस दिन यमुना का पानी राजस्थान आएगा, वे मुख्यमंत्री का सम्मान करेंगे. अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा MOA के बाद कल जयपुर लौट रहे हैं, इसलिए गहलोत को अपने बयान के मुताबिक जयपुर एयरपोर्ट पहुंचकर उनका अभिनंदन करना चाहिए. 

शेखावाटी को सबसे बड़ा फायदा

राजेंद्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को “आधुनिक राजस्थान का भगीरथ” बताते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों से लंबित यमुना जल परियोजना को साकार करने काम किया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलाने के लिए भी लगातार प्रयास कर रहे हैं. भाजपा नेता ने कहा कि इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा शेखावाटी क्षेत्र को मिलेगा. योजना में हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के हिस्से का 577 मिलियन क्यूबिक मीटर यानी एमसीएम यमुना जल लाया जाएगा. 

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इसके लिए करीब 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी. यह पाइपलाइन चूरू जिले के हंसियावास जलाशय तक पहुंचेगी. पूरी परियोजना पर लगभग 34 हजार 102 करोड़ रुपये खर्च होंगे. 

बिछाई जाएगी 3 विशाल पाइपलाइन 

इसके तहत 3.6 मीटर व्यास की तीन विशाल भूमिगत पाइपलाइनें (Underground Pipeline) बनाई जाएंगी. पाइपलाइन के साथ निरीक्षण सड़क, कृत्रिम जलाशय और आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली भी विकसित की जाएगी. परियोजना में हरियाणा के लिए भी दस स्थानों पर पेयजल उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा गया है. इसके अलावा राजस्थान के कई इलाकों में पीने के पानी की आपूर्ति होगी. यानी यह परियोजना दोनों राज्यों के लिए लाभकारी साबित होगी. भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि सीकर, चूरू और झुंझुनूं जैसे जिले वर्षों से भूजल पर निर्भर हैं. इन इलाकों में लगातार गिरता भूजल स्तर और पेयजल संकट बड़ी चुनौती रहा है. यमुना का पानी मिलने से न सिर्फ लोगों को स्थायी पेयजल मिलेगा बल्कि सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्ध होगा. 

बता दें कि यमुना के पानी को लेकर हरियाणा और राजस्थान के बीच 1994 में समझौता हुआ था. इस समझौते के तहत राजस्थान को यमुना के पानी का हिस्सा आवंटित तो किया गया था. हालांकि, कुछ अड़चन की वजह से यमुना का पानी अब तक राजस्थान को नहीं मिल सका. जिसके कारण राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र (चूरू, झुंझुनूं और सीकर) लंबे समय से गंभीर पेयजल और सिंचाई संकट से जूझ रहा था. अब जब यमुना जल परियोजना को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच MoA साइन हो गया तो राजस्थान, खासकर शेखावाटी के लोगों में बड़ी उम्मीद जगी है. इससे लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा. वहीं, किसानों, उद्योगों और आमजन को सीधा लाभ मिलेगा.  

कांग्रेस पर भाजपा का जल समझौते के बाद हमला

कांग्रेस पर हमला बोलते हुए राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को एमओए (MoA) और एमओयू (MoU) का अंतर तक पता नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बिना तथ्य जाने लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है. दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यमुना जल समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वे कागजी समझौतों और बैठकों से ज्यादा धरातल पर परिणाम को महत्व देते हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

अशोक गहलोत ने यमुना जल समझौते को लेकर क्या कहा था?

गहलोत ने कहा था कि जिस दिन यमुना का पानी शेखावाटी तक पहुंच जाएगा, वे स्वयं मुख्यमंत्री आवास जाकर भजनलाल शर्मा को माला पहनाकर उनका स्वागत करेंगे. गहलोत ने समझौते की प्रक्रिया का स्वागत भी किया था, लेकिन साथ ही कहा था कि सरकार का असली मूल्यांकन तब होगा. जब परियोजना पूरी होकर शेखावाटी के लोगों तक पानी पहुंचेगा. उन्होंने भाजपा के इस आरोप को भी खारिज किया था कि कांग्रेस सरकारों ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया. गहलोत का कहना था कि उन्होंने वर्ष 2003 और 2012 में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर राजस्थान के हिस्से के यमुना जल के लिए पहल की थी.

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