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200 साल से हिंदू परिवार बना रहा ताजिया, कालीन नगरी में आगे बढ़ रही परदादा की विरासत, अर्जुन ने कही दिल की बात

भदोही के कोटिया गांव में रहने वाला हिंदू परिवार 200 साल से ताजिया बना रहा है. परिवार के सदस्य अर्जुन सिंह कहते हैं कि हम भले ही हिंदू हैं, लेकिन हमारे लिए धर्म से ऊपर आपसी सम्मान और प्रेम है.

200 साल से हिंदू परिवार बना रहा ताजिया, कालीन नगरी में आगे बढ़ रही परदादा की विरासत, अर्जुन ने कही दिल की बात
कालीन नगरी भदोही के कोटिया गांव में रहने वाला हिंदू परिवार आज भी संभाल रहा परदादा की विरासत.

भदोही: दुनिया भर में अपनी खूबसूरत कालीनों के लिए मशहूर भदोही जिले में अनोखी परंपरा और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल सामने आई है. जहां एक हिंदू परिवार पिछले 200 साल से मुस्लिम समुदाय के पर्व मुहर्रम के लिए ताजिया बना रहा है. दादा-परदादा के जमाने से चली आ रही यह परंपरा आज भी जारी है. जिले के कोइरौना थाना क्षेत्र के कोटिया गांव में रहने वाले अर्जुन सिंह और उनका परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी मिली इस विरासत को पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहा है. परिवार के लोग न केवल ताजिया तैयार करते हैं, बल्कि इसे हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक मानते हैं. अर्जुन कहते हैं कि हम हिंदू हैं, लेकिन हमारे लिए धर्म से पहले भाईचारा है. 

हर साल लेते हैं ताजिए का ऑर्डर 

कोटिया गांव में रहने वाले अर्जुन सिंह और उनके परिवार के सदस्य पिछले 200 साल से यह काम करते आ रहे हैं. परिवार के सदस्य संजय सिंह, जो पेशे से मोबाइल शॉप संचालक हैं, हर साल ताजिया बनाने के ऑर्डर लेते हैं, इसके बाद जोर-शोर से काम को अंजाम देते हैं. संजय कहते हैं कि उनके परिवार के लिए यह सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि उनके पुरखों की दी हुई विरासत है जो वे आगे बढ़ाना चाहते हैं.  

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हम हिंदू हैं, हमारे लिए धर्म से पहले इंसानियत

अर्जुन सिंह ने बताया कि 'उनके परदादा, दादा और पिता भी मुहर्रम के अवसर पर ताजिया बनाने का कार्य करते थे. पीढ़ी दर पीढ़ी यह काम चला आ रहे हैं, जो हमारे लिए किसी परंपरा से कम नहीं है. उन्होंने कहा कि हम भले ही हिंदू हैं, लेकिन हमारे बुजुर्गों ने हमेशा इंसानियत और भाईचारे का संदेश दिया है. हमारे लिए धर्म से ऊपर आपसी सम्मान और प्रेम है. जब भी ताज़िया बनाने का ऑर्डर मिलता है, पूरी ईमानदारी और शिद्दत के साथ इसे तैयार करते हैं. आगे भी हम अपने पूर्वजों की इस परंपरा को जारी रखेंगे'.  

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परदादा, दादा से मिली विरासत आगे बढ़ा रहा परिवार.

परदादा, दादा से मिली विरासत आगे बढ़ा रहा परिवार.

परंपराएं तब आगे बढ़ती हैं जब नई पीढ़ियां उन्हें अपनाए  

अपने इस काम से भदोही का यह परिवार प्रेम, विश्वास और भाईचारे की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी. उनके इस काम से साफ पता चलता है कि  रिश्ते धर्म से नहीं, दिलों से बनते हैं और परंपराएं तभी जीवित रहती हैं, जब उन्हें नई पीढ़ियां सम्मान के साथ आगे बढ़ाती हैं. 

(भदोही से गिरीश पांडे की रिपोर्ट)

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उदित दीक्षित
चीफ सब एडिटर
उदित दीक्षित डिजिटल पत्रकारिता का विश्वसनीय चेहरा हैं, वे  खबरों को बारीकियों और सच्चाई के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्... और पढ़ें
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