बारिश के दौरान अचानक बिजली कटने पर लोग अक्सर परेशान हो जाते हैं, लेकिन यह कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है. इसके पीछे बिजली के केबल, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगाए गए ऑटोमैटिक इलेक्ट्रिकल प्रोटेक्शन सिस्टम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. ये सिस्टम किसी भी संभावित खतरे या खराबी का पता चलते ही बिजली की सप्लाई रोक देते हैं, ताकि बड़े हादसों से बचा जा सके. यहां हम जानेंगे कि बारिश शुरू होते ही कई जगहों पर बिजली क्यों गुल हो जाती है और इसके पीछे क्या वैज्ञानिक और तकनीकी कारण है?
बारिश का पानी बिजली के बहाव में डालता है रुकावट
बरसात का पानी आमतौर पर पूरी तरह से साफ नहीं होता है. इसमें धूल-मिट्टी और ऐसे कण होते हैं, जो बिजली को प्रवाहित करने में मदद कर सकते हैं. जब पानी असुरक्षित जगहों जैसे कि बिजली के केबल जॉइंट, घर के पैनल या बाहरी नेटवर्क में घुसता है, तो कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं. इन दिक्कतों में लीकेज करंट, शॉर्ट सर्किट और अपने-आप बिजली कट जाना शामिल है. ऐसा अक्सर कम वोल्टेज वाले केबल और घरों की वायरिंग में होता है, जहां इंस्टॉलेशन ठीक से सुरक्षित नहीं होता है.
बिजली के केबल नेटवर्क में रुकावटें
बिजली का पूरा सिस्टम कई हिस्सों से मिलकर बना होता है, जिनमें लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने वाली ट्रांसमिशन लाइनें, अलग-अलग इलाकों में सप्लाई देने वाले डिस्ट्रीब्यूशन केबल, इमारतों में इस्तेमाल होने वाले कंस्ट्रक्शन केबल और घरों तक बिजली पहुंचाने वाले हाउस केबल शामिल हैं. तेज बारिश और खराब मौसम के दौरान इन नेटवर्क पर कई तरह का दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से बिजली जा सकती है.
बिजली जाना एक ऑटोमैटिक प्रोटेक्शन सिस्टम का है हिस्सा
बारिश के दौरान बिजली जाने की परेशानी को अक्सर लोग तकनीकी खराबी समझ लेते हैं, जबकि कई मामलों में यह बिजली व्यवस्था में लगे ऑटोमैटिक प्रोटेक्शन सिस्टम की वजह से होता है. बिजली नेटवर्क में कहीं भी गड़बड़ी, शॉर्ट सर्किट या करंट लीकेज का खतरा पैदा होते ही यह सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है और एहतियात के तौर पर बिजली सप्लाई बंद कर देता है.
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इसका उद्देश्य किसी बड़ी दुर्घटना को रोकना होता है. अगर बारिश के कारण किसी तार में फॉल्ट आ जाए, पेड़ की टहनी बिजली लाइन से टकरा जाए या ट्रांसफॉर्मर पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगे, तो सुरक्षा प्रणाली तुरंत प्रभावित लाइन को डिस्कनेक्ट कर देती है.
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