HRA Rules for Husband Wife: अगर पति-पत्नी दोनों केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और एक ही शहर में नौकरी करते हैं, तो सरकारी मकान मिलने के बाद हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को लेकर अक्सर सवाल उठता है. क्या एक पति या पत्नी को सरकारी क्वार्टर मिलने के बाद दूसरे कर्मचारी को HRA मिल सकता है? अब केंद्र सरकार ने राज्यसभा में इस सवाल का साफ जवाब दिया है.
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, अगर पति या पत्नी में से किसी एक को उसी शहर में सरकारी आवास मिल गया है, तो परिवार को सरकारी आवास उपलब्ध माना जाएगा. ऐसे में दूसरे पति या पत्नी को HRA नहीं मिलेगा, क्योंकि सरकार के अनुसार परिवार को पहले ही सरकारी आवास मिल चुका है और किराए के मकान पर खर्च नहीं हो रहा है.
एक को सरकारी क्वार्टर मिला तो दूसरे को HRA नहीं
राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय ने कहा कि हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA का मकसद उन केंद्रीय कर्मचारियों को किराए का खर्च पूरा करने में मदद देना है, जिन्हें सरकारी आवास नहीं मिला है और जो घर किराए पर लेकर रह रहे हैं.
सरकार के अनुसार, जब पति-पत्नी दोनों केंद्रीय कर्मचारी हों, एक ही जगह पर पोस्टेड हों और उनमें से किसी एक को सरकारी आवास मिल जाए, तो पूरे परिवार को सरकारी आवास मिला हुआ माना जाता है. इसलिए दूसरे कर्मचारी को अलग से HRA देने का प्रावधान नहीं है.
HRA क्यों नहीं मिलेगा? सरकार ने समझाया नियम
वित्त मंत्रालय ने साफ किया कि HRA तभी दिया जाता है, जब कर्मचारी को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं कराया गया हो और वह रहने के लिए प्राइवेट रूम किराए पर ले रहा हो.जब पति या पत्नी में से किसी एक को सरकारी क्वार्टर मिल जाता है और परिवार उसी सरकारी आवास में रहता है, तो दूसरे पति या पत्नी के लिए अलग से किराए का खर्च नहीं बनता. इसी वजह से दूसरे कर्मचारी को HRA नहीं दिया जाता.
वित्त मंत्रालय ने अपने जवाब में इसी आधार पर कहा कि अगर दोनों पति-पत्नी एक ही जगह पर सरकारी कर्मचारी हैं और उनमें से किसी एक को सरकारी आवास मिला है, तो परिवार को सरकारी आवास उपलब्ध माना जाएगा. ऐसे में दूसरे कर्मचारी को HRA की पात्रता नहीं होगी.
क्या सरकार HRA का यह नियम बदलेगी?
यह सवाल लंबे समय से उठता रहा है कि जब पति और पत्नी दोनों अलग-अलग सरकारी कर्मचारी हैं, तो दोनों को अपने-अपने अलाउंस क्यों नहीं मिलने चाहिए. कर्मचारी संगठनों की ओर से भी इस तरह के मुद्दे उठाए जाते रहे हैं.हालांकि, वित्त मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया कि इस पॉलिसी पर दोबारा विचार करने को लेकर सरकार सरकारी कर्मचारियों या उनके सेवा संगठनों की ओर से कोई प्रतिनिधि नहीं आया है.
जब सरकार से पूछा गया कि क्या दोनों पति-पत्नी के सरकारी कर्मचारी होने की पर HRA नियम को ज्यादा समान बनाने के लिए इसमें बदलाव या समीक्षा की जाएगी, तो जवाब साफ था नहीं. यानी फिलहाल सरकार का इस नियम को बदलने या दोबारा विचार करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.
दोनों सरकारी कर्मचारी हैं और दोनों किराए पर रहते हैं तो?
अगर पति-पत्नी दोनों केंद्रीय सरकारी कर्मचारी हैं और दोनों में से किसी को भी सरकारी आवास नहीं मिला है, तो किराए के घर में रहने पर HRA मिल सकता है. हालांकि, इसके लिए लागू सरकारी नियमों और पात्रता की शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा.
वहीं, अगर पति-पत्नी की पोस्टिंग अलग-अलग शहरों में है, तो HRA की पात्रता लागू सरकारी नियमों के आधार पर तय होगी. ऐसे मामलों में दोनों कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों और निर्धारित नियमों को ध्यान में रखा जाएगा.
शहर की कैटेगरी के हिसाब से कितना HRA?
पति-पत्नी के HRA नियम में सरकार ने फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन HRA की दरों में बदलाव शहरों की नई कैटेगरी के आधार पर हुआ है.
सरकार ने हाल की जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर HRA के लिए शहरों की कैटेगरी की सूची अपडेट की है. इसके बाद कुछ शहरों की कैटेगरी बदली है. इससे उन शहरों में तैनात केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले HRA पर भी असर पड़ा है.
फिलहाल HRA की दरें इस तरह हैं:
- X कैटेगरी के शहरों में: बेसिक पे का 30 फीसदी HRA.
- Y कैटेगरी के शहरों में: बेसिक पे का 20 फीसदी HRA.
- Z कैटेगरी के शहरों में: बेसिक पे का 10 फीसदी HRA.
जिन शहरों को नई कैटेगरी में अपग्रेड किया गया है, वहां के कर्मचारियों को ज्यादा HRA का फायदा मिला है. वहीं जिन शहरों की कैटेगरी नीचे गई है, वहां कर्मचारियों को नई कैटेगरी के हिसाब से HRA मिलेगा.
HRA और DA का भी है कनेक्शन
केंद्रीय कर्मचारियों के HRA की दरें Dearness Allowance यानी DA से भी जुड़ी हुई हैं. 7 वें वेकन आयोग (7th Central Pay Commission)की सिफारिशों के तहत DA एक तय स्तर पर पहुंचने के बाद HRA की दरों में भी बदलाव किया जाता है.
- शुरुआत में X, Y और Z कैटेगरी के शहरों के लिए HRA की दरें क्रमशः 24%, 16% और 8% थीं.
- जब DA 25 फीसदी के पार पहुंचा, तो HRA की दरें बढ़कर 27%, 18% और 9% हो गईं.
- अब DA 50 फीसदी के पार पहुंचने के बाद HRA की दरें बढ़कर 30%, 20% और 10% हो चुकी हैं. यही दरें फिलहाल लागू हैं.
इसका मकसद यह है कि समय के साथ महंगाई और मकान के बढ़ते खर्च को देखते हुए कर्मचारियों के HRA में भी बदलाव होता रहे.
आसान भाषा में समझें HRA का पूरा नियम
HRA कर्मचारी के किराए के खर्च की भरपाई के लिए दिया जाता है. अगर पति-पत्नी दोनों केंद्रीय सरकारी कर्मचारी हैं, एक ही शहर में पोस्टेड हैं और उनमें से किसी एक को सरकारी क्वार्टर मिल गया है, तो सरकार पूरे परिवार को सरकारी आवास मिला हुआ मानती है.इसलिए दूसरे पति या पत्नी को अलग से HRA नहीं मिलेगा. वित्त मंत्रालय ने फिलहाल इस नियम में बदलाव का कोई प्रस्ताव भी नहीं दिया है.वहीं, अगर दोनों को सरकारी आवास नहीं मिला है और वे किराए के घर में रह रहे हैं, तो लागू नियमों और पात्रता के आधार पर HRA मिल सकता है.
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