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6 साल बाद क्यों खत्म हुई पूरी तरह फ्री यूपीआई व्यवस्था? जानिए क्या खर्चे का गणित

देश में डिजिटल क्रांति का प्रतीक बन चुका यूपीआई (UPI) भुगतान अब एक नए वित्तीय मोड़ पर पहुंच गया है. दरअसल, पिछले छह वर्षों से पूरी तरह मुफ़्त चल रही इस व्यवस्था पर 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत की दर से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जा रहा है. जानिए आखिर 6 साल बाद सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा.

6 साल बाद क्यों खत्म हुई पूरी तरह फ्री यूपीआई व्यवस्था? जानिए क्या खर्चे का गणित
6 साल बाद क्यों बदला यूपीआई का 'ज़ीरो एमडीआर' मॉडल?
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जनवरी 2020 में सरकार ने देश भर में डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए ज़ीरो एमडीआर (Zero MDR) नीति लागू की थी. उस वक्त यूपीआई का विस्तार हो रहा था और बैंकों व पेमेंट ऐप्स को सरकारी बजट से प्रोत्साहन राशि देकर इस नेटवर्क को मुफ्त चलाया जा रहा था. इसके बाद अगस्त 2026 में यूपीआई के जरिए कुल 2,451 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य रिकॉर्ड 29.9 लाख करोड़ रुपये रहा. 

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने यूपीआई प्रोत्साहन के लिए 2,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया था. हालांकि, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और उद्योग जगत के अनुमान के मुताबिक, 24 घंटे चलने वाले इस विशाल नेटवर्क की साइबर सुरक्षा, सर्वर कैपेसिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर का सालाना खर्च 20,000 करोड़ तक पहुंच गया.लिहाजा, सिर्फ सरकारी सब्सिडी के सहारे 20,000 करोड़ रुपये के नेटवर्क को चलाना लंबे समय के लिए व्यावहारिक नहीं रह गया था.

कितना लगेगा शुल्क और किस पर पड़ेगा असर?

  • 2,000 रुपये तक का पेमेंट पूरी तरह मुफ़्त रहेगा.
  • व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) यानी दोस्तों या परिवार को भेजे जाने वाले पैसे पर 100% मुफ़्त व्यवस्था लागू रहेगी.
  • 2,000 रुपये से ज्यादा के व्यापारी भुगतान (P2M) पर 0.4% की दर से एमडीआर (MDR) लगेगा.
  • 5,000 रुपये के पेमेंट पर 20 का एमडीआर शुल्क लगेगा. 
  • 50,000 के पेमेंट पर 200 रुपये का एमडीआर शुल्क लगेगा. 
  • अधिकतम कैप 75,000 से ऊपर के भुगतान पर ज्यादा-से ज्यादा 300 रुपये का कैप लगाया गया है.

 आवश्यक सेवाओं और पूंजी बाजार के लिए विशेष राहत

सार्वजनिक महत्व की सेवाओं के लिए सरकार ने एमडीआर दरों को बेहद कम और सीमित रखा है. रेलवे, ईंधन, दूरसंचार और बीमा संबंधी 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर सिर्फ 5 रुपये का एक समान शुल्क लगेगा. वहीं, कैपिटल मार्केट जैसे शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड के लिए होने वाले पेमेंट्स पर सिर्फ 0.02% का सांकेतिक शुल्क तय किया गया है.

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यह नीतिगत बदलाव यूपीआई नेटवर्क के सुरक्षित और लंबे समय तक बिना रुकावट संचालन के लिए लागत जुटाने का एक जरिया है, ताकि आम नागरिकों का दैनिक छोटा-मोटा भुगतान पूरी तरह सुरक्षित और मुफ़्त बना रहेगा.

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