गुरुवार, 8 अक्टूबर को होने वाली 57वीं GST काउंसिल की बैठक में UPI के मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR पर लगने वाले 18% GST में कटौती पर चर्चा नहीं होगी. वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार की बैठक के एजेंडे में किसी भी GST रेट में बदलाव को शामिल नहीं किया गया है.
यानी इस बैठक में UPI MDR पर GST को लेकर कारोबारियों और इंडस्ट्री की उम्मीदों पर कोई फैसला होने की संभावना नहीं है. सरकार ने आगे के लिए GST रेट में बदलाव को लेकर भी एक व्यवस्था तय की है. इसके तहत GST रेट में बदलाव पर साल में सिर्फ एक बार विचार किया जाएगा और ऐसे बदलाव 1 अप्रैल से लागू किए जाएंगे.
GST प्रोसेस रिफॉर्म्स पर पूरा फोकस
57वीं GST काउंसिल की बैठक में मुख्य फोकस GST प्रोसेस रिफॉर्म्स के अगले चरण पर रहेगा. इसमें GST रजिस्ट्रेशन, रिटर्न दाखिल करने, रिफंड और GST विवादों के निपटारे की प्रक्रिया को आसान और ज्यादा ऑटोमेटेड बनाने पर चर्चा होगी.
सरकार GST सिस्टम को ज्यादा फेसलेस बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ने की तैयारी में है. यानी जहां अधिकारी के विवेक या आमने-सामने की बातचीत की जरूरत नहीं है, वहां प्रक्रिया डेटा और टेक्नोलॉजी के जरिए पूरी करने पर जोर रहेगा.
अधिकारियों के अनुसार, अभी 61% टैक्सपेयर्स का GST रजिस्ट्रेशन तीन कामकाजी दिनों में बिना अधिकारी के हस्तक्षेप के हो रहा है.
इनवॉइस मैचिंग से कम होंगे मिसमैच नोटिस
रिटर्न प्रक्रिया में इनवॉइस मैचिंग को मजबूत करने का प्रस्ताव भी है. इसका मकसद इनपुट टैक्स क्रेडिट की वैलिडेशन पहले ही करने और अनावश्यक मिसमैच नोटिस को कम करना है.
इससे कारोबारियों के लिए GST कंप्लायंस की प्रक्रिया ज्यादा आसान और डेटा आधारित बनाने की कोशिश होगी.
17 दिन में GST रिफंड देने की तैयारी
GST रिफंड की प्रक्रिया में भी तेजी लाने का प्रस्ताव है. सूत्रों के मुताबिक, रिफंड का भुगतान अधिकतम 17 दिनों के भीतर करने की व्यवस्था पर GST काउंसिल फैसला कर सकती है.
रिफंड आवेदन को 10 दिन में स्वीकार करने और रिस्क चेक के आधार पर 90% रकम जारी करने का प्रस्ताव भी रखा गया है.
GST कानून के आपराधिक प्रावधान बदलने पर चर्चा
बैठक में GST कानून के तहत आने वाले कई अपराधों को आपराधिक प्रावधानों के दायरे से बाहर करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी.
इसके साथ टैक्स प्रशासन में गिरफ्तारी और टैक्स वसूली की भूमिका को अलग करने पर भी विचार किया जाएगा. इसका मकसद टैक्स अधिकारियों को मुख्य रूप से टैक्स आकलन और वसूली पर फोकस करने की दिशा में ले जाना है.
GST 2.0 के बाद टैक्सेबल सप्लाई 25.8% बढ़ी
मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच टैक्सेबल सप्लाई में 25.8% की बढ़ोतरी हुई. इसी अवधि में B2C सप्लाई 26.7% और ग्रॉस टैक्स लायबिलिटी 13.6% बढ़ी.
इस दौरान प्रभावी टैक्स रेट 14.55% से घटकर 13.13% हो गया.
सरकार का लक्ष्य है कि किसी बिजनेस को बंद करना उतना ही आसान हो, जितना उसे शुरू करना. प्रस्तावित बदलावों को 2027 के दौरान चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है.
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