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मुंबई छोड़कर उत्तराखंड के पहाड़ों में परिवार के साथ बस गया पायलट, बताया हर महीने का खर्चा

मुंबई के राघव ने 9 साल पहले शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी और अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़ दी. इसके बाद वह अपने पार्टनर के साथ उत्तराखंड के पहाड़ों में शिफ्ट हो गए.

मुंबई छोड़कर उत्तराखंड के पहाड़ों में परिवार के साथ बस गया पायलट, बताया हर महीने का खर्चा
मुंबई के पायलट ने बताया पहाड़ों में रहने का खर्चा
Instagram/rg_in_the_hills

Viral Video: अच्छी सैलरी वाली पायलट की जॉब और मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी छोड़कर गौरव उत्तराखंड के पहाड़ों में बस गए. वह अपनी पत्नी के साथ नैनीताल (Nainital) जिले के कोटाबाग (Kotabagh) में रहते हैं. गौरव की पत्नी का नाम गरिमा है. दोनों इंस्टाग्राम पर अपनी माउंटेन लाइफ को शेयर करते रहते हैं. मुंबई के कपल गौरव और गरिमा ने Mouving To The Mountains के अलग-अलग एपिसोड के वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए हैं. जिनमें फार्म टूर, शहर को छोड़ने का कारण और पहाड़ों पर रहने के लिए मासिक खर्चा तक हर जरूरी बात बताई है. 

9 साल पहले मुंबई से हुए शिफ्ट

इंस्टाग्राम पर शेयर किए एक वीडियो में गौरव ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन का ज्यादातर समय मुंबई में बिताया. स्कूल, पायलट ट्रेनिंग और फिर फ्लाइंग... मैं जो कुछ भी जानता था. वह सब वहीं था. 9 साल पहले एक फैसले ने चुपचाप सबकुछ बदल दिया. गौरव वीडियो में कहते हैं, आज मैं पहाड़ों के बीच उठता हूं और यहां होमस्टे चलाता हूं. मेरे दिन किसी तय स्क्रिप्ट के अनुसार नहीं चलते.

वह आगे कहते हैं कि मैं ऐसी सड़कों पर चलता हूं, जहां घोड़े आराम से चर रहे हों. बाजार में छोटे-मोटे काम निपटा सकता हूं. मेहमानों को किसी शांत नदी के किनारे ले जा सकता हूं. यहां ऐसी सड़कें भी हैं, जो आपको बस सब कुछ निहारने के लिए रुकने पर मजबूर कर देती हैं.

मुंबई छोड़कर पहाड़ों पर क्यों बसे गौरव

राघव का कहना है कि वह मुंबई से पहाड़ों पर इसलिए नहीं गए कि जिंदगी एकदम परफेक्ट हो जाएगी, बल्कि वह अलग तरह की जिंदगी के लिए वहां गए. गौरव के अनुसार, उनको ऐसी जिंदगी चाहिए, जहां वह अपने पड़ोसियों को जानें. प्रकृति उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हो. न कि उनसे दूर भागने का जरिया. एक अन्य वीडियो गौरव पहाड़ों पर रहने के लिए हर महीने आने वाले खर्चे के बारे में बताते हैं. गौरव कहते हैं, "मैंने मुंबई में अपना फ्लाइंग करियर छोड़ दिया और पहाड़ों में रहने आ गया. मैंने ऑर्गेनिक खेती से शुरुआत की थी और आज मैं यहां तीन होमस्टे चलाता हूं. 

पहाड़ों में रहने का हर महीने कितना खर्चा

वह बताते हैं कि वह अपनी पार्टनर गरिमा और छोटी सी 'अप्रैल' के साथ रहते हैं. गौरव के अनुसार, April उनकी बेटी तो नहीं है, लेकिन बिल्कुल वैसी ही है. गौरव ने कहा कि काफी सारे लोग पहाड़ों पर रहने के खर्च के बारे में पूछ रहे थे. इसलिए आप सभी के लिए यहां के खर्चों का ब्यौरा दिया है. गौरव ने बताया कि उन्हें कोई किराया नहीं देना पड़ता है, क्योंकि हम अपने ही एक होमस्टे में रहते हैं. हमारे पास सोलर पैनल हैं, इसलिए बिजली का कोई मासिक बिल नहीं आता. 

पानी का बिल दो महीने के लिए 488 रुपये आता है. हमारे वाई-फाई और मोबाइल रिचार्ज का खर्च महीने का 1500 रुपये है. ईंधन और किराने का सामान 10000 का आता है. बीमा और अन्य पॉलिसियों का खर्च 6 हजार है. जिम की मेंबरशिप और वेलनेस पर हमारा खर्च महीने का 5000 आता है. बाहर खाना और दिल्ली की एक यात्रा (क्योंकि मेरी पार्टनर गरिमा वहीं की रहने वाली है) का खर्च 10 हजार आता है. इस तरह दो लोगों और एक बहुत लाड़-प्यार से पले-बढ़े कुत्ते के लिए हमारा मासिक खर्च लगभग 33 हजार रुपये हो जाता है. 

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