UP Rent Agreement New Rules: उत्तर प्रदेश में किराये की संपत्ति का एग्रीमेंट बनवाना अब बहुत सस्ता और झंझट मुक्त होने जा रहा है. दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश किरायेदारी नियमावली से जुड़े स्टाम्प और पंजीयन शुल्क के नए प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है. इसके साथ ही अब पुराने सर्किल रेट वाले फार्मूले को खत्म कर निर्धारित फिक्स्ड चार्ज लागू कर दिए गए हैं.
सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य राज्य में किरायेदारी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना, मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच होने वाले कानूनी विवादों को घटाना और भारी भरकम स्टांप शुल्क के डर से बिना एग्रीमेंट के रहने की प्रथा को समाप्त करना है.
32,000 की जगह अब सिर्फ 1,000 रुपये
स्टांप और पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री रवींद्र जायसवाल के अनुसार, अब तक राज्य में रेंट एग्रीमेंट बनवाते समय प्रॉपर्टी के सर्किल रेट के चार गुना मूल्य पर 4 प्रतिशत का शुल्क चुकाना पड़ता था. इस वजह से कई बार मामूली किराए के लिए भी हजारों रुपये की स्टांप ड्यूटी बन जाती थी.
- पुरानी व्यवस्था का गणित: 2 लाख सालाना किराये वाले मकान का रेंट एग्रीमेंट कराने पर सर्किल रेट के हिसाब से लगभग 32,000 रुपये तक का स्टांप शुल्क देना पड़ता था.
- नई व्यवस्था: अब इस पेचीदा फॉर्मूले को पूरी तरह खत्म करके एक पारदर्शी और फिक्स्ड स्लैब लागू कर दिया गया है. अब 2 लाख रुपये के वार्षिक किराये वाले एग्रीमेंट पर मात्र 1,000 रुपये का ही शुल्क देना होगा.
सालाना किराये के हिसाब से नए स्टांप शुल्क की दरें
| वार्षिक किराया | नया निर्धारित स्टांप शुल्क |
| 2 लाख रुपये तक | 1,000 रुपये |
| 2 लाख से 6 लाख रुपये तक | 3,000 रुपये |
| 6 लाख से 10 लाख रुपये तक | 4,500 रुपये |
कब से लागू होंगी नई दरें
इस पूरे मामले पर संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने स्पष्ट किया कि जैसे ही इस निर्णय की आधिकारिक अधिसूचना जारी होगी, उसी दिन से पूरे उत्तर प्रदेश में यह नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी.
इसलिए लाना पड़ा नया नियम
- अब तक महंगा स्टांप शुल्क होने के कारण अधिकतर लोग बिना एग्रीमेंट या सिर्फ 100 रुपये के सादे स्टांप पर मौखिक समझौते कर लेते थे, जिससे विवाद होने पर कानूनी मदद मिलना मुश्किल होता था.
- दुकान, गोदाम या रहने के लिए घर किराये पर लेने वाले छोटे कारोबारियों, नौकरीपेशा लोगों और विद्यार्थियों की जेब पर अब अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा.
- कानूनी रूप से रजिस्टर्ड एग्रीमेंट होने से मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे.
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