UP Land Lease Registry Fee Cap: उत्तर प्रदेश में रेंट एग्रीमेंट बनवाना और उसका रजिस्ट्रेशन कराना काफी सस्ता होने जा रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय के लिए लीज या एग्रीमेंट करवाते हैं. दरअसल, उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 10 साल तक के रेंट और लीज एग्रीमेंट पर लगने वाले स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क के नए और संशोधित नियम को मंजूरी दे दी है. सरकार का यह कदम औपचारिक रेंट एग्रीमेंट को अधिक किफायती बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि लोग मौखिक या अनौपचारिक व्यवस्थाओं के बजाय कानूनी रूप से अपने अनुबंधों का रजिस्ट्रेशन करवा सकें.
यह बदलाव लंबी अवधि की लीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. दरअसल, संशोधित ढांचे के तहत, लगभग 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराए वाले 10 साल के लीज एग्रीमेंट के रजिस्ट्रेशन पर आने वाला खर्च अब काफी कम हो जाएगा. इस कदम से न केवल कानूनी पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि किराएदारों और मकान मालिकों दोनों को ही बड़ी आर्थिक राहत भी मिलेगी. हालांकि, यह छूट खनन और टोल पट्टों पर लागू नहीं होगी.
लीज अवधि और वार्षिक किराये के हिसाब से तय फीस का स्लैब
- 2,00,000 रुपये तक का औसत वार्षिक किराया.
- एक वर्ष तक की अवधि के लिए अधिकतम 1,000 रुपये.
- एक वर्ष से ज्यादा और 5 वर्ष तक के लिए अधिकतम 2,000 रुपये.
- पांच वर्ष से ज्यादा और 10 वर्ष तक के लिए अधिकतम 4,000 रुपये.
सालाना 2,00,000 रुपये से 6,00,000 रुपये तक का किराया
- एक वर्ष तक के लिए ज्यादा से ज्यादा 3,000 रुपये
- एक वर्ष से ज्यादा और 5 वर्ष तक के लिए ज्यादा के लिए अधिकतम 6,000 रुपये.
- 5 वर्ष से अधिक और 10 वर्ष तक के लिए अधिकतम 8,000 रुपये.
6,00,000 रुपये से अधिक और 10,00,000 रुपये तक का किराया
- एक वर्ष तक की अवधि के लिए ज्यादा से ज्यादा 4,500 रुपये.
- एक वर्ष से ज्यादा और 5 वर्ष तक के लिए अधिकतम 10,000 रुपये.
- 5 वर्ष से ज्यादा और 10 वर्ष तक के लिए अधिकतम 13,000 रुपये.
10,00,000 रुपये से ज्यादा का किराया
- 10 लाख रुपये पर क्रम संख्या 3 के अनुसार तय फीस लागू होगी.
- 10 लाख से ज्यादा की शेष राशि पर सामान्य रजिस्ट्री दर से फीस देय होगी.
इन पट्टों पर लागू नहीं होगी छूट
इसके साथ ही सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि रजिस्ट्री फीस की यह अधिकतम सीमा छूट टोल पट्टा और खनन पट्टा पर लागू नहीं होगी. इन श्रेणियों में पुरानी व सामान्य दरों के मुताबिक ही फीस का निर्धारण किया जाएगा.
फैसले से क्या होगा फायदा?
- लीज और रेंट एग्रीमेंट पर फीस की ऊपरी सीमा तय होने से गैरकानूनी लेनदेन और असमंजस की स्थिति खत्म होगी.
- व्यावसायिक संपत्ति लीज पर लेने वाले व्यवसायियों के लिए कानूनी प्रक्रिया की लागत काफी कम हो जाएगी.
- फीस कम होने से लोग बिना रजिस्ट्री के कच्चा एग्रीमेंट करने के बजाय कानूनी रूप से रजिस्ट्री कराने के लिए प्रोत्साहित होंगे.
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