- नो कॉस्ट ईएमआई का मतलब पूरी तरह से ब्याज मुक्त लोन नहीं होता, इसमें ग्राहक से छिपे हुए शुल्क वसूले जाते हैं.
- बैंक और व्यापारी मिलकर ब्याज के बराबर डिस्काउंट कम करके ग्राहक को नकद भुगतान वाले फायदे से वंचित कर देते हैं.
- ब्याज और प्रोसेसिंग फीस पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी लागू होता है, जिससे कुल लागत में अप्रत्यक्ष वृद्धि होती है.
No Cost EMI Truth: सेल के दौरान या त्योहारों के सीजन में ऑनलाइन (Online) और ऑफलाइन स्टोर्स पर नो कॉस्ट ईएमआई (No Cost EMI) के विज्ञापनों की भरमार रहती है. महंगे स्मार्टफोन, लैपटॉप या होम अप्लायंसेज को किस्तों में खरीदने का यह तरीका ग्राहकों को बहुत लुभावना लगता है, लेकिन वित्तीय नजरिए से देखा जाए तो नो कॉस्ट ईएमआई पूरी तरह से मुफ्त नहीं होती है.
दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर लोन नहीं दे सकता. ऐसे में कंपनियां और बैंक मिलकर इस तरह से ऑफर डिजाइन करते हैं कि ब्याज की रकम किसी न किसी रूप में आपकी जेब से ही निकलती है.
नो कॉस्ट ईएमआई की सच्चाई
आपको बता दें कि नो कॉस्ट ईएमआई नाम की कोई चीज नहीं होती है. दरअसल, नो कॉस्ट ईएमआई के तहत खरीदारी करते वक्त चार तरीकों से अतिरिक्त पैसे वसूले जाते हैं, जिससे ग्राहकों को कई तरह से नुकसान उठाना पड़ता है.
अपफ्रंट डिस्काउंट का खेल
शॉपिंग के दौरान जब आप नो कॉस्ट ईएमआई चुनते हैं, तो बैंक आपसे ब्याज जरूर लेता है. लेकिन व्यापारी आपको उत्पाद की मूल कीमत पर उतना ही डिस्काउंट दे देता है, जितना बैंक का ब्याज बनता है. इसका मतलब यह है कि अगर आप नकद भुगतान करते, तो आपको वह डिस्काउंट सीधे मिलता. ईएमआई चुनने के कारण आपने वह डिस्काउंट गंवा दिया.
प्रोसेसिंग फीस
सच्चाई ये है कि ज्यादातर बैंक या एनबीएफसी नो कॉस्ट ईएमआई की सुविधा देने के बदले एक निश्चित प्रोसेसिंग फीस जैसे 99 रुपये से लेकर 299 रुपये या उससे ज्यादा वसूलते हैं, जो आपकी पहली किस्त के साथ जुड़कर आती है.
18 प्रतिशत जीएसटी भी जुड़ जाता है
रिजर्केव बैंक ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार, लोन के ब्याज और प्रोसेसिंग फीस पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है. भले ही कंपनी ने आपको ब्याज पर डिस्काउंट दे दिया हो, लेकिन बैंक की ओर से लगाए गए उस ब्याज वाले हिस्से पर आपको हर महीने 18 जीएसटी अलग से देना होता है.
कैश डिस्काउंट का नुकसान होता है
बिना ईएमआई के एकमुश्त पेमेंट या क्रेडिट कार्ड के सीधे पेमेंट करके अगर आप वही सामान खरीदते हैं, तो अक्सर आपको इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट या नो ईएमआई डिस्काउंट मिलता है. नो कॉस्ट ईएमआई चुनने पर आप इस सीधे फायदे से वंचित रह जाते हैं.
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ऐसे में अगर आप नो कॉस्ट ईएमआई पर कोई सामान खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखकर समझदारी से फैसला लें.
सेम वक्त में आप ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर जाकर चेक करें कि बिना ईएमआई के वह सामान कितने में मिल रहा है. यदि नकद या कार्ड से सीधे खरीदने पर भारी छूट मिल रही है, तो ईएमआई न लें.
पेमेंट पेज पर चेक आउट करते समय या लोन एग्रीमेंट में प्रोसेसिंग फीस और उस पर लगने वाले जीएसटी की पूरी जानकारी ध्यान से पढ़ें.
सिर्फ सस्ती किस्त का टैग देखकर गैरजरूरी या महंगी चीजें खरीदने से बचें. हमेशा अपनी आय और हर महीने की कुल ईएमआई देनदारी का संतुलन बनाए रखें.
सभी किस्तों की ईएमआई, प्रोसेसिंग फीस और जीएसटी को जोड़कर देखें कि अंत में आप वस्तु की मूल कीमत से कितना ज्यादा भुगतान कर रहे हैं.
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