Makanmalik Kirayedar Vivad: देश में मकानमालिक किरायेदारी विवाद मुकदमों का सबसे बड़ी वजह बनता है. लोग किराये पर मकान, फ्लैट या दुकान देने से घबराते भी है कि कहीं उस पर हमेशा के लिए कब्जा न हो जाए. हालांकि दिल्ली एनसीआर, मुंबई हो या कानपुर, लखनऊ जैसा कोई शहर, आपको किराये पर मकान या दुकान देने के पहले कुछ सावधानी बरतें तो किरायेदार से कब्जा वापस लेने आसान रहता है. बिना मुकदमा दाखिल किए या कानूनी कार्रवाई के आसान तरीकों से घर या दुकान को खाली कराया जा सकता है. दिल्ली हाईकोर्ट के वकील वरुण दीक्षित ने ऐसे ही कानूनी विकल्पों के बारे में बताया है. आइए जानते हैं कैसे...
दिल्ली हाईकोर्ट अधिवक्ता वरुण दीक्षित, ने बताया, कानून हाथ में लेना मकान मालिक के लिए उल्टा भारी पड़ सकता है. इसलिए बेदखली के दौरान मकान का ताला तोड़ने या नया ताला लगाने, किरायेदार का सामान बाहर फेंकने या दबाव बनाने के लिए बिजली या पानी का कनेक्शन काटने से बचे. दरअसल, ये सभी हरकत अपराध की श्रेणी मं आता हैं. साथ ही असामाजिक तत्वों या बाहुबलियों का सहारा लेकर भूल कर भी धमकी न दें.
मकान मालिक अपना सकते हैं ये लीगल स्टेप्स
रेंट एग्रीमेंट की कानूनी समीक्षा करें
- कोई भी कदम उठाने से पहले अपने रेंट एग्रीमेंट की शर्तों की जांच करें.
- किराएदारी की अवधि यानी और समाप्ति की तारीख चेक करें.
- नोटिस और टर्मिनेशन क्लॉज को अच्छे से पढ़ लें.
- लॉक-इन अवधि, मासिक किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट और पेनल्टी नियम भी देख लें.
- यह भी जांचें कि एग्रीमेंट खत्म होने के बाद क्या आपने किराया लिया है?
औपचारिक लीगल नोटिस भेजें
एग्रीमेंट समाप्त होने या शर्तों के उल्लंघन पर वकील के जरिए रजिस्टर्ड डाक और ईमेल पर औपचारिक नोटिस भेजें. इसमें संपत्ति का शांतिपूर्ण कब्जा वापस करने की मांग करें. साथ ही बकाया किराया, बिजली और मेंटेनेंस बिल चुकाने के लिए भी कहें. साथ ही चाबियां और एक्सेस डिवाइस सौंपने के लिए 15 से 30 दिन का स्पष्ट समय दें. इस दौरान इस बात का विशेष ख्याल रखें कि नोटिस भेजने और उसकी डिलीवरी की रसीद सुरक्षित हों.
बेदखली के लिए निश्चित समय-सीमा तय करें
किरायेदार को मकान खाली करने की एक अंतिम और स्पष्ट तारीख दें. अगले हफ्ते खाली कर दूंगा जैसे अनिश्चित मौखिक आश्वासनों के चक्कर में न आएं. अगर आपसी सहमति से थोड़ा और समय दिया भी जा रहा है, तो उसे लिखित रूप में दर्ज करें.
प्री-लिटिगेशन मध्यस्थता और व्यावहारिक समझौता
अदालती कार्यवाही में लगने वाले समय से बचने के लिए आपसी बातचीत या मध्यस्थता का रास्ता अपनाएं. मकान या दुकान खाली करने की एक अंतिम तारीख तय करें. इस दौरान, बकाया किराए और मेंटेनेंस का हिसाब-किताब निपटाएं. साथ ही सिक्योरिटी डिपॉजिट को एडजस्ट करने का तरीका तय करें. इस दौरान ध्यान रखें कि समझौते का उद्देश्य विवाद सुलझाना है, इसका मतलब यह नहीं कि मकान मालिक को अपनी ही प्रॉपर्टी खाली कराने के लिए किराएदार को पैसे देने पड़ें.
कब्जे के साथ बकाया किराए की कानूनी वसूली
बेदखली और बकाया पैसे की वसूली दो अलग-अलग कानूनी राहतें हैं. अपनी अर्जी में केवल मकान खाली कराने की ही नहीं, बल्कि बकाया किराए, बिजली-पानी के बिल, मेंटेनेंस चार्ज और एग्रीमेंट खत्म होने के बाद के अवैध कब्जे की अवधि का हर्जाना वसूलने का भी स्पष्ट दावा पेश करें.
दिल्ली और यूपी-एनसीआर के रेंट कानूनों के अंतर को समझें
- दिल्ली : सबसे पहले यह देखना होता है कि मामला Delhi Rent Control Act, 1958 के तहत आता है या सामान्य लीज एंड कॉन्ट्रैक्ट एक्ट के तहत.
- नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश में U.P. Regulation of Urban Premises Tenancy Act, 2021 लागू होता है. इसके तहत सिविल कोर्ट के बजाय रेंट अथॉरिटी और रेंट ट्रिब्यूनल में 60 दिनों के भीतर जल्द सुनवाई का प्रावधान है.
सिर्फ बेदखली के लिए एफआईआर ही विकल्प नहीं
दरअसल, किरायेदार के मकान खाली न करने पर पुलिस सीधे तौर पर सिविल विवाद में हस्तक्षेप करके बेदखल नहीं कर सकती. हालांकि, अगर किरायेदार आपके साथ मारपीट, गाली-गलौज, धमकी, जालसाजी या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसा आपराधिक कृत्य करता है, तो उसके खिलाफ थाने में अलग से आपराधिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
बात न बनने पर सक्षम रेंट अथॉरिटी या कोर्ट का रुख करें
अगर नोटिस और बातचीत विफल हो जाए, तो उपयुक्त फोरम में केस फाइल करें. इसके लिए मूल रेंट एग्रीमेंट और प्रॉपर्टी के मालिकाना दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट, किराया पेमेंट और बकाये का प्रमाण. हासिल करें. लीगल नोटिस की कॉपी और डिलीवरी रसीद को संभाल कर रखें. इसके अलावा, बिजली,पानी,मेंटेनेंस बिल और व्हाट्सएप व ईमेल चैट रिकॉर्ड संभाल कर रखें
ट्रायल और कानूनी प्रक्रिया
ट्रायल के दौरान दोनों पक्ष अपनी याचिकाएं और साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं. मकान मालिक को किराएदारी की मौजूदगी, एग्रीमेंट की समाप्ति, नोटिस की वैधता और बकाये राशि को साबित करना होता है. साक्ष्यों और गवाहों की जिरह के बाद अदालत फैसला सुनाती है.
अंतिम आदेश और एक्जीक्यूशन
अगर कोर्ट या रेंट ट्रिब्यूनल मकान मालिक के पक्ष में फैसला सुनाता है और इसके बावजूद किराएदार खुद से मकान खाली नहीं करता, तो मकान मालिक को कोर्ट के माध्यम से निष्पादन याचिका दाखिल करनी होती है. इसके बाद कोर्ट का अमीन या पुलिस बल मौके पर जाकर कानूनन कब्जा दिलाता है.
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जब किरायेदार मकान खाली करे, तो लिखित में एक हैंडओवर मेमो जरूर बनवाएं, इसमें कब्जा सौंपने की तारीख और समय दर्ज हो. इसके साथ ही चाबियां और एक्सेस कार्ड प्राप्त होने का ब्योरा भी दर्ज हो. इसमें बिजली व पानी के मीटर की अंतिम रीडिंग और तस्वीरें भी दर्ज होनी चाहिए. साथ ही प्रॉपर्टी की स्थिति और सिक्योरिटी डिपॉजिट एडजस्टमेंट की लिखित पुष्टि भी होनी चाहिए.
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