- फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग का आकर्षण बढ़ा है लेकिन रिटेल ट्रेडर्स को भारी वित्तीय नुकसान होता है.
- ऑप्शन ट्रेडिंग में ग्रीक्स जैसे थीटा, डेल्टा और इंप्लायड वोलैटिलिटी को समझना आवश्यक होता है.
- स्टॉप-लॉस न लगाने और ओवर-लेवरेजिंग करने से छोटी गलती भी पूंजी के बड़े नुकसान का कारण बन जाती है.
Futures & Options Trading Mistakes: भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (Futures & Options) ट्रेडिंग का क्रेज तेजी से बढ़ा है. दरअसल, कम पूंजी में बड़ा एक्सपोजर मिलने की वजह से रिटेल निवेशक इसकी ओर आकर्षित होते हैं. हालांकि, बाजार नियामक सेबी (SEBI) की रिपोर्ट के मुताबिक एफ एंड ओ ट्रेडिंग करने वाले 10 में से 9 रिटेल ट्रेडर्स (Retail Traders) को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है.
ऑप्शन ट्रेडिंग मुख्य रूप से हेजिंग (Risk Hedging) का औजार है, लेकिन ज्ञान और अनुशासन की कमी की वजह से ज्यादातर लोग इसे सट्टेबाजी (Speculation) की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं. इनमें से ज्यादा तर लोग कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पैसा डूब जाता है.
ये हैं फ्यूचर्स एंड ऑप्शन में पैसे डुबोने वाली गलतियां
बिना सही ज्ञान और ग्रीक्स के ट्रेडिंग
दरअसल, ऑप्शन की कीमत केवल शेयर के दाम पर निर्भर नहीं करतीं. थीटा डिके (Time Decay), इंप्लायड वोलैटिलिटी और डेल्टा जैसे ग्रीक्स को समझे बिना ट्रेड लेने से बाजार सही दिशा में जाने के बावजूद ऑप्शन बायर का प्रीमियम घटने लगता है.
स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल न करना
ट्रेड में नुकसान को समय रहते सीमित करने के लिए स्टॉप-लॉस न लगाना सबसे बड़ी भूल है. अनुशासनहीनता के कारण एक छोटा सा घाटा देखते ही देखते पूरी ट्रेडिंग कैपिटल को साफ कर देता है.
ओवर-लेवरेजिंग करना
लालच में आकर अपनी वित्तीय क्षमता से अधिक बड़े लॉट साइज में दांव लगाना खतरनाक होता है. बाजार में मामूली विपरीत हलचल होने पर भी भारी मार्जिन कॉल आ जाती है और ट्रेडर बाहर हो जाता है.
ट्रेड से अवास्तविक अपेक्षाएं
पैसा दोगुना कर रातों-रात अमीर बनने का सपना देखने या बिना किसी नुकसान के लगातार मुनाफा कमाने की सोच के साथ बाजार में उतरना ट्रेडर्स को लगातार जोखिम भरे फैसले लेने पर मजबूर करता है.
भावनात्मक ट्रेडिंग
डर और लालच में फंसकर फैसले लेना भारी पड़ता है. एक ट्रेड में नुकसान होने के बाद उसकी भरपाई करने के लिए तुरंत दूसरा बिना रणनीति का ट्रेड लेना घाटे को दोगुना कर देता है.
नुकसान से बचने के ये हैं 3 गोल्डन रूल्स
दो प्रतिशत स्टॉप-लॉस का नियम फॉलो करें
किसी भी एक ट्रेड में अपनी कुल उपलब्ध ट्रेडिंग कैपिटल का अधिकतम दो प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा जोखिम पर न लगाएं. अगर आपकी पूंजी एक लाख है, तो एक ट्रेड में आपका अधिकतम स्टॉप-लॉस दो हजार से ज्यादा नहीं होना चाहिए.
पे-ऑफ और रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो की समझ
ट्रेड एक्जीक्यूट करने से पहले संभावित नफा और नुकसान के अनुपात का मूल्यांकन करें. आदर्श रूप से 1 अनुपात 2 या उससे बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड मिलने पर ही ट्रेड में एंट्री लें.
पोर्टफोलियो और स्ट्रेटेजी डाइवर्सिफिकेशन करें
अपनी पूरी पूंजी को केवल एक स्ट्राइक प्राइस, एक कॉन्ट्रैक्ट या एक ही सेक्टर के स्टॉक्स में न लगाएं. केवल ऑप्शन बाइंग के बजाय हेज्ड स्ट्रेटेजीज जैसे बुल स्प्रेड (Bull Call Spread) और आइरन कौन्डर (Iron Condor) का उपयोग करें.
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