Mumbai Pune Expressway Missing Link: मुंबई और पुणे के बीच का सफर अब इतिहास बदलने वाला है. 1 मई को महाराष्ट्र के इंफ्रास्ट्रक्चर में एक नया अध्याय जुड़ेगा जब भारत के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक 'मिसिंग लिंक' को जनता के लिए खोल दिया जाएगा. यह केवल एक सड़क नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे चौड़ी टनल (Twin Tunnels) और घाटी के ऊपर झूलते हुए केबल-स्टेड ब्रिज का एक ऐसा संगम है, जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे. यह प्रोजेक्ट खंडाला घाट के उस हिस्से को पूरी तरह खत्म कर देगा जहां अक्सर जाम और हादसों का डर रहता था.
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पूरी तरह स्मूथ और सीधा रास्ता
यह 13.3 किलोमीटर लंबा लिंक खोपोली (खालापुर टोल) से शुरू होकर सीधे सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट (कुसगांव) पर निकलेगा. वर्तमान में, घाट सेक्शन की लंबाई लगभग 19 किलोमीटर है, लेकिन इस नए रूट की वजह से यह दूरी 6 किलोमीटर कम हो जाएगी. सबसे बड़ी बात यह है कि यात्रियों को अब उन खतरनाक 10 मोड़ों से नहीं गुजरना होगा, जो मानसून में अक्सर भूस्खलन की वजह से बंद हो जाते थे. यह नया रास्ता पूरी तरह से 'स्मूथ' और सीधा है.

10 लेन की टनल और 132 मीटर ऊंचा ब्रिज
इस प्रोजेक्ट में कुछ ऐसे रिकॉर्ड्स हैं जो इसे दुनिया में खास बनाते हैं. यहाँ बनाई गई सुरंगें लगभग 23 मीटर चौड़ी हैं, जो इसे दुनिया की सबसे चौड़ी टनल (10-लेन) की श्रेणी में रखती हैं. वहीं, इस रूट पर बना केबल-स्टेड ब्रिज जमीन से 132 मीटर ऊंचा है. इतना ऊंचा कि इसके नीचे से पुराने एक्सप्रेसवे की गाड़ियाँ छोटी खिलौनों जैसी नजर आती हैं. इस पुल की कुल लंबाई 850 मीटर है और इसे तेज हवाओं के दबाव को झेलने के लिए खास एरोडायनामिक डिजाइन दिया गया है.
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‘मिसिंग लिंक' ब्रिज: मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर भारत का सबसे लंबा केबल‑स्टे ब्रिज 1 मई से शुरू#Mumbai #Pune pic.twitter.com/47S3IiJOru
— NDTV India (@ndtvindia) April 29, 2026
20 से 25 मिनट कम होगा यात्रा का समय
तथ्यों की बात करें तो इस लिंक के शुरू होने से यात्रा के समय में 20 से 25 मिनट की सीधी कटौती होगी. चूंकि गाड़ियों को अब घाट की चढ़ाई नहीं चढ़नी पड़ेगी, इसलिए ईंधन की खपत में भी 15-20% की कमी आने का अनुमान है. भारी ट्रकों और बसों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि उनके लिए घाट पार करना सबसे चुनौतीपूर्ण काम होता था. अब पूरी यात्रा के दौरान गाड़ियाँ 100 किमी/घंटा की स्थिर गति (Constant Speed) बनाए रख सकेंगी.

सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम
सुरक्षा के लिहाज से इस प्रोजेक्ट में 'ऑटोमैटिक इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम' लगाया गया है. अगर सुरंग के अंदर कोई गाड़ी खराब होती है या कोई दुर्घटना होती है, तो कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा. टोल की बात करें तो यात्रियों को किसी नए टोल नाके पर रुकने की जरूरत नहीं होगी. मौजूदा टोल ढांचे के भीतर ही इसका संचालन किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट का कुल बजट लगभग ₹6,695 करोड़ है, जो इसकी भव्यता और इस्तेमाल की गई आधुनिक तकनीक को दर्शाता है.
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