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Missing Link Project: पुणे से मुंबई आना-जाना आसान, आधे घंटे का समय और 20 फीसदी तक पेट्रोल-डीजल भी बचेगा

इस पूरे प्रोजेक्ट को लगभग ₹6,695 करोड़ की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया है. इस लिंक के शुरू होने से मुंबई-पुणे के बीच की दूरी लगभग 6 किलोमीटर कम हो जाएगी. नए मार्ग से यात्रा करने पर यात्रियों के समय में करीब 30 मिनट की बचत होगी.

Missing Link Project: पुणे से मुंबई आना-जाना आसान, आधे घंटे का समय और 20 फीसदी तक पेट्रोल-डीजल भी बचेगा
मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट का आज उद्घाटन.
मुंबई:

Mumbai-Pune Expressway Missing Link: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के लोगों को आज एक खास सौगात मिलने जा रही है. यह सौगात खास कर उन लोगों की सुविधाएं बढ़ाएगा, जो पुणे से मुंबई का अक्सर आना-जाना करते हैं. मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट का आज उद्घाटन होने जा रहा है. इससे मुंबई से पुणे आने-जाने में आधे घंटे के समय की बचत होगी. साथ ही इन दो शहरों के बीच हर रोज गुजरने वाले लाखों वाहनों का ईंधन भी 15 से 20 फीसदी तक बचेगा. 

अभी 3 घंटे लगता समय, इसके उद्घाटन के बाद ढाई घंटे में पूरा होगा सफर

मुंबई से पुणे की दूरी करीब 155 किलोमीटर है. जिसे अभी तय करने में करीब 3 घंटे का समय लगता है. लेकिन मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट के उद्घाटन के बाद यह सफर और आसान हो जाएगा. क्योंकि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत के बाद मुंबई से पुणे के सफर में करीब आधे घंटे का समय बचेगा. साथ-साथ 15-20 फीसदी ईंधन की भी बचत होगी.  

महाराष्ट्र दिवस पर सीएम देंगे सौगात

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार आज दोपहर 12:30 बजे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे. आज 1 मई को महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण किया जा रहा है. 

6,695 करोड़ की लागत से हुआ है निर्माण

इस पूरे प्रोजेक्ट को लगभग ₹6,695 करोड़ की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया है. इस लिंक के शुरू होने से मुंबई-पुणे के बीच की दूरी लगभग 6 किलोमीटर कम हो जाएगी. नए मार्ग से यात्रा करने पर यात्रियों के समय में करीब 30 मिनट की बचत होगी.

खंडाला के खतरनाक कट से भी बचेगा सफर

मिसिंग लिंक के कारण अब यात्रियों को खंडाला के खतरनाक और घुमावदार घाट से नहीं गुजरना पड़ेगा. इस लिंक से 70% ट्रैफिक डाइवर्ट होगा, जिससे जाम और ईंधन की समस्या खत्म होगी. ये एशिया की सबसे चौड़ी सुरंग है—प्रोजेक्ट में 23.5 मीटर चौड़ी सुरंग बनाई गई है, जो एशिया में सबसे चौड़ी है.

एशिया की सबसे लंबी सड़क सुरंगों में से एक

सुरंग की अद्भुत चौड़ाई के कारण आज इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल करने की भी कोशिश है. इस प्रोजेक्ट में दो जुड़वां सुरंगें बनाई गई हैं. पहली सुरंग की लंबाई 8.92 किमी है, जो एशिया की सबसे लंबी सड़क सुरंगों में से एक है. जबकि दूसरी सुरंग की लंबाई लगभग 1.75 किमी है.

इन सुरंगों की चौड़ाई 23.5 से 23.75 मीटर है, जो इन्हें दुनिया की सबसे चौड़ी सड़क सुरंगों में से एक बनाती है. ये सुरंगें 8-लेन (प्रत्येक दिशा में 4 लेन) की क्षमता वाली हैं. सुरंगों के भीतर वेंटिलेशन, लाइटिंग और आपातकालीन निकास के विश्वस्तरीय इंतजाम किए गए हैं.

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इंजीनियरों ने घने कोहरे और दुर्गम इलाके की चुनौतियों को पार कर इसे पूरा किया है. यहां 650 मीटर लंबा और 180 मीटर ऊँचा “केबल-स्टे ब्रिज” बनाया गया है. टाइगर वैली के ऊपर 650 मीटर लंबा भव्य 'केबल-स्टेड' ब्रिज बनाया गया है. इस पुल के खंभों की ऊंचाई 182 से 184 मीटर है.

यह भारत के सबसे ऊंचे सड़क पुलों में से एक

यह भारत के सबसे ऊंचे सड़क पुलों में से एक है. यह ब्रिज 252 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं को भी आसानी से झेल सकता है. इस पुल का मुख्य स्पैन 305 मीटर का है. प्रोजेक्ट में एक 850 मीटर लंबा वायडक्ट ब्रिज भी शामिल है. लोहगढ़ किला, विसापुर किला और कार्ला गुफाओं जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी.

ये  लिंक मुंबई की ओर 'खोपोली' को लोनावला के पास 'कुसगाव' से जोड़ता है. यह रास्ता लोनावला झील के नीचे से गुजरता है, जो निर्माण के लिहाज से बेहद जटिल था. इस प्रोजेक्ट का निर्माण महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम MSRDC द्वारा किया गया है.
  • इस परियोजना पर काम अगस्त 2018-2019 में शुरू हुआ था 
  • कोरोना महामारी, सह्याद्रि की कठिन पहाड़ियां, भारी मानसून और तेज हवाओं के कारण काम में कई बाधाएं आईं
  • अनुमान है कि पुराने घाट सेक्शन का लगभग 70% ट्रैफिक इस नई लिंक पर डायवर्ट हो जाएगा
  • रास्ता छोटा और सीधा होने से वाहनों के ईंधन की भारी बचत होगी.

अभी हल्की मोटर वाहनों का ही होगा परिचालन

इतनी बड़ी लागत के बावजूद यात्रियों पर कोई नया या अतिरिक्त टोल नहीं लगाया जाएगा. खालापुर और तलेगांव टोल प्लाजा पर मौजूदा दरें ही लागू रहेंगी. पहले चरण में केवल हल्की मोटर गाड़ियाँ कार और बसें ही इस मार्ग का उपयोग कर सकेंगी. ट्रक और खतरनाक सामान ले जाने वाले भारी वाहन फिलहाल पुराने घाट मार्ग का ही उपयोग करेंगे.

भारी वाहनों के लिए यह प्रतिबंध शुरुआती 6 महीनों तक रह सकता है ताकि ट्रैफिक व्यवहार का अध्ययन किया जा सके. खतरनाक मोड़ और बॉटलनेक खत्म होने से दुर्घटनाओं के खतरे में भारी कमी आएगी. बेहतर कनेक्टिविटी से मुंबई और पुणे के बीच व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी. सुगम यातायात के कारण वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी.

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