- मुंबई और पुणे के बीच खंडाला घाट में बनी जुड़वां सुरंगें दुनिया की सबसे चौड़ी हैं, जिनकी चौड़ाई 23.75 मीटर है
- प्रोजेक्ट में 132 मीटर ऊंचाई पर केबल-स्टेड ब्रिज है, जो मानसून की भीषण हवाओं, भौगोलिक चुनौतियों को सहन करता है
- मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट से खंडाला घाट के खतरनाक मोड़, जाम और भूस्खलन की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी
मुंबई और पुणे के बीच का सफर अब सिर्फ छोटा ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की इंजीनियरिंग ताकत का नया चेहरा बनने वाला है. खंडाला घाट की दुर्गम पहाड़ियों को मात देकर तैयार किया गया 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट अपनी बेमिसाल तकनीकी विशेषताओं के कारण पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है. इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी जुड़वां सुरंगें हैं, जिनकी चौड़ाई 23.75 मीटर है. यह न केवल भारत बल्कि दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंग है, जिसमें 10 लेन का ट्रैफिक एक साथ सरपट दौड़ सकेगा. इसके अलावा, जमीन से 132 मीटर की ऊँचाई पर बना केबल-स्टेड ब्रिज इस प्रोजेक्ट को एक विजुअल मास्टरपीस बनाता है, जिसे मानसून की भीषण हवाओं और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
दुनिया की सबसे चौड़ी जुड़वां सुरंग, गिनीज रिकॉर्ड की तैयारी
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, अनिल कुमार गायकवाड़ ने इस प्रोजेक्ट की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए इसे हर भारतीय के लिए सम्मान का विषय बताया है. NDTV से बात करते हुए उन्होंने साझा किया, "हर भारतीय को 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट पर गर्व होना चाहिए क्योंकि इसमें दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंग शामिल है." उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि को आधिकारिक मान्यता मिलने वाली है, क्योंकि "कल गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अधिकारी निरीक्षण के लिए आएंगे, जिसके बाद इस टनल को दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंग के रूप में दर्ज किया जाएगा."
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कठिन पहाड़ों में इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी चुनौती
इस प्रोजेक्ट को पूरा करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था. गायकवाड़ ने केबल-स्टेड ब्रिज के निर्माण को अपने जीवन के सबसे कठिन कार्यों में से एक बताते हुए कहा कि खंडाला के दुर्गम रास्तों से कच्चा माल, मशीनरी और श्रमिकों को सही समय पर पहुंचाना और गुणवत्ता के साथ काम पूरा करना एक बेहद जटिल प्रक्रिया थी. यह प्रोजेक्ट न केवल 25 मिनट का समय बचाएगा, बल्कि 'जीरो-ग्रेडिएंट' और 'पॉइंट एक्सट्रैक्शन' जैसी अत्याधुनिक फायर सेफ्टी और AI-आधारित सुरक्षा प्रणालियों से लैस होकर यात्रा को लैंडस्लाइड के खतरों से मुक्त और सुरक्षित बनाएगा. अब 100 किमी/घंटा की निरंतर गति से यात्री बिना किसी मोड़ और रुकावट के सह्याद्रि के सीने को चीरते हुए अपना सफर तय कर सकेंगे.
खंडाला घाट के खतरनाक मोड़ और जाम होगा पूरी तरह बाइपास
सालों से खंडाला घाट का यह इलाका यात्रियों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा है, जहां मानसून के दौरान भूस्खलन और धुंध के कारण घंटों तक ट्रैफिक जाम लगा रहता था. पुराने मार्ग के 10 खतरनाक 'हेयरपिन बेंड्स' और 'अदोषी टनल' के पास की संकरी गलियां सबसे बड़े बॉटलनेक थे, जहाँ भारी ट्रकों के खराब होने या पलटने से पूरा एक्सप्रेसवे ठप हो जाता था. इसके अलावा, घाट की खड़ी चढ़ाई के कारण गाड़ियों के ब्रेक फेल होने और इंजन गर्म होने की समस्या आम थी. लेकिन अब 'मिसिंग लिंक' इन तमाम जोखिम भरे बिंदुओं को पूरी तरह बाईपास कर देगा. जहां पहले पहाड़ों के ऊपर से घुमावदार रास्तों पर रेंगना पड़ता था, अब यात्री पहाड़ के बीचों-बीच बनी अत्याधुनिक सुरंगों और सीधे पुल से गुजरेंगे, जिससे न केवल दुर्घटनाओं का खतरा न्यूनतम हो जाएगा बल्कि बारिश के मौसम में पत्थरों के गिरने का डर भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा.
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1 मई से शुरुआत, टोल वही, रफ्तार और सुरक्षा ज्यादा
यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि 1 मई को उद्घाटन के बाद, पहले चरण (31 अक्टूबर 2026 तक) में इस 'मिसिंग लिंक' पर केवल कारों जैसी हल्की मोटर गाड़ियों (LMVs) और बसों को ही अनुमति दी जाएग. सुरक्षा कारणों से भारी ट्रकों और मालवाहक वाहनों पर फिलहाल प्रतिबंध रहेगा. सबसे राहत की बात यह है कि इस हाई-टेक रास्ते के लिए आपको कोई अतिरिक्त टोल नहीं देना होगा, यानी मौजूदा टोल दरों पर ही आप इस आधुनिक सफर का आनंद ले सकेंगे. रफ्तार की बात करें तो कारों के लिए 100 किमी/घंटा और बसों के लिए 80 किमी/घंटा की अधिकतम गति सीमा तय की गई है, जबकि दोपहिया वाहनों और खतरनाक सामान ले जाने वाले वाहनों का प्रवेश यहां पूरी तरह वर्जित रहेगा. मिसिंग लिंक न केवल मुंबई और पुणे की दूरी को कम करेगा, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग की श्रेष्ठता का प्रमाण बनकर यात्रियों के सफर को सुरक्षित, सुगम और यादगार बनाएगा.
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