सपने बड़े और मजबूत इरादे हो तो मुश्किलें रास्ता नहीं रोक पाती. इस बात को ओडिशा के गंजम जिले के छोटे से गांव बाकलीकोड़ा के रहने वाले जिगर नायक की कहानी से पता चलता है. पिता को कैंसर से खोने, आर्थिक तंगी और जिम्मेदारियों के बीच जिगर ने हार नहीं मानी. मां ने सिलाई कर घर चलाया और बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया. अब जिगर अपने गांव और परिवार का पहला आईआईटीएन (IITian) बनने जा रहा है. राजस्थान के कोटा में दो साल रहकर तैयारी करने वाले जिगर नायक ने जेईई एडवांस 2026 में ऑल इंडिया रैंक 5474 और OBC-NCL कैटेगरी रैंक 1201 हासिल की है. इससे पहले उसने जेईई मेंन में 17783 OBC-NCL कैटेगरी रैंक 4597 था और 98.6143 पर्सेंटाइल स्कोर किया था.
कैंसर ने छीन ली पिता की जिंदगी
जिगर के पिता जूरीनाथ गुजरात की एक टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करते थे. परिवार का जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन अचानक उन्हें कैंसर होने का पता चला. इलाज में परिवार की पूरी जमा पूंजी खर्च हो गई. साल 2020 में पिता का निधन हो गया और परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया. पिता के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह मां अपूर्वा नायक के कंधों पर आ गई.
मां ने सिलाई मशीन को बनाया सहारा
पति के निधन के बाद अपूर्वा नायक ने हार नहीं मानी. उन्होंने गोल्ड लोन लिया और घर-घर से सिलाई का काम लेकर टेलरिंग शुरू की. दिनभर सिलाई मशीन पर मेहनत कर घर का खर्च चलाने के साथ बेटे की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाए. आर्थिक परेशानियां कई बार इतनी बढ़ीं कि घर चलाना मुश्किल हो गया, लेकिन मां ने कभी बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया.

पिता के जाने के बाद मां ने संभाला
सोशल मीडिया से मिली IIT करने की प्रेरणा
जिगर ने बताया कि 10वीं कक्षा तक उसे JEE परीक्षा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. सोशल मीडिया पर इंजीनियरिंग और जेईई से जुड़े वीडियो देखने के बाद पहली बार उसे IIT में पढ़ने की प्रेरणा मिली. इसके बाद उसने तय किया कि वह पढ़ाई के दम पर अपनी मां की जिंदगी बदलेगा. इसी लक्ष्य के साथ वह कोटा आया और एलन में नियमित कक्षाओं के जरिए दो साल तक तैयारी की. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसे फीस में भी रियायत मिली.
"मैं अपने लिए नहीं, पूरे परिवार के लिए पढ़ रहा हूं"
जिगर का एक छोटा भाई भी है, जो सातवीं कक्षा में पढ़ता है. जिगर कहता है कि उसकी मेहनत सिर्फ उसकी सफलता के लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार के बेहतर भविष्य के लिए है. उसका सपना है कि आई आई टी से पढ़ाई पूरी करने के बाद मां को संघर्ष न करना पड़े और छोटे भाई की पढ़ाई भी बिना किसी आर्थिक परेशानी के पूरी हो सके.
एलन के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि जिगर जैसी कहानियां समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं. इनमें विद्यार्थी के साथ-साथ अभिभावकों का संघर्ष भी शामिल होता है. उन्होंने कहा कि जब ऐसी सफलताएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं तो सामाजिक बदलाव की नई संभावनाएं पैदा होती हैं. प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अवसर मिले, यही शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए.
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