भारतीय रेलवे के इतिहास में रविवार को नया अध्याय जुड़ गया है. जींद से सोनीपत रूट पर चल रही हाइड्रोजन ट्रेन के बाद अब LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) से चलने वाली ट्रेन लॉन्च हो गई है. यह ट्रेन डुअल-फ्यूल-टेक्नोलॉजी के जरिए चलाई जाएगी. जैसे सीएनजी कार पेट्रोल और सीएनजी पर चलती है, वैसे ही ये ट्रेन डीजल और एलएनजी पर चलेगी. देश में एलएनजी का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, ऐसे में ये भविष्य में ट्रेन का सस्ता ईंधन बन सकती है. इस ट्रेन का किराया नॉर्मल पैसेंजर ट्रेन जैसा ही होगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साबरमती स्टेशन से देश की पहली LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई. उन्होंने कवच सिस्टम और साबरमती-सरखेज डबल ब्रॉड गेज रेल लाइन कनेक्टिविटी की श भी शुरुआत की. अहमदाबाद रेलवे डिवीजन के मुताबिक, राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर पहली बार ट्रेन की ड्राइविंग पावर कारों (DPCs) में LNG ईंधन सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है. नई DFC टेक्नोलॉजी से एक ही इंजन LNG और डीजल दोनों पर चल सकता है.
क्या है नई LNG ट्रेन तकनीक?
LNG ट्रेन तकनीक नई व्यवस्था के तहत पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) ट्रेन को डुअल-फ्यूल सिस्टम में बदला गया है. ट्रेन का इंजन अब डीजल और एलएनजी दोनों से चल सकेगा. इसमें एलएनजी की मदद से डीजल की खपत में 40 प्रतिशत तक की कमी आएगी. ट्रेन के ड्राइविंग पावर कार (DPC) में लगभग 2,200 लीटर का LNG टैंक फिट किया गया है. एक बार पूरा रिफिल करने पर यह ट्रेन दैनिक रूप से 222 किलोमीटर तक की यात्रा तय कर सकती है.
अहमदाबाद में देश की पहली LNG ट्रेन, साबरमती रेलवे स्टेशन के नए स्वरूप व मेंटेनेंस शेड के शुभारंभ से लाइव...
— Amit Shah (@AmitShah) September 27, 2026
અમદાવાદમાં દેશની પ્રથમ LNG ટ્રેનનો શુભારંભ, સાબરમતી રેલવે સ્ટેશનના પુન:વિકસિત સ્વરૂપનું લોકાર્પણ તેમજ WAG 12 મેઈન્ટેનન્સ શેડના ઉદ્ઘાટનથી લાઈવ. https://t.co/3JclEQuVge
LNG से चलने वाली ट्रेन कैसे काम करेगी?
यह ट्रेन पूरी तरह से LNG पर निर्भर नहीं होगी. इसका इंजन LNG और डीजल दोनों पर चल सकता है, जिससे यह एक डुअल-फ्यूल सिस्टम बन जाता है. फ्यूल की उपलब्धता के आधार पर, इंजन LNG और डीजल के बीच स्विच कर सकता है. इसका मतलब यह भी है कि अगर LNG उपलब्ध न हो, तब भी ट्रेन का संचालन जारी रह सकता है. एक और फायदा यह है कि LNG की वजह से ट्रेन दोबारा फ्यूल भरवाने से पहले ज्यादा दूरी तय कर सकती है.
LNG ट्रेन से उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी
भारतीय रेलवे को उम्मीद है कि LNG के इस्तेमाल से डीज़ल की खपत और इंजन से होने वाला उत्सर्जन कम होगा. यह तकनीक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और पार्टिकुलेट मैटर (PM) जैसे प्रदूषकों को कम करने में मदद कर सकती है. इसलिए, इस पहल का मकसद साफ़-सुथरे और पर्यावरण के अनुकूल रेल परिवहन को बढ़ावा देना है.
बचेगी फ्यूल की लागत
LNG के इस्तेमाल से फ्यूल की लागत भी कम हो सकती है क्योंकि LNG डीज़ल से सस्ता है. ट्रायल डेटा के आधार पर, भारतीय रेलवे का अनुमान है कि एक DPC से हर साल लगभग 11.9 लाख रुपये की बचत होगी. रेलवे ने कहा कि 8-कोच वाली ट्रेन के लिए सालाना बचत का अनुमान लगभग 23.9 लाख रुपये है.रेलवे ने कहा, इंडियन रेलवे द्वारा LNG डुअल-फ्यूल टेक्नोलॉजी को अपनाना साफ-सुथरी ऊर्जा, ईंधन की बचत, कम ऑपरेटिंग लागत और पर्यावरण की सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम है. यह टेक्नोलॉजी भविष्य में ज्यादा टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल रेलवे ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करने में अहम भूमिका निभा सकती है.
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