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RBI के नए नियम से 2027 में कैसे बदलेगी आपकी होम और पर्सनल लोन की EMI?

RBI नए प्रस्तावित ड्राफ्ट पर 11 सितंबर 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं. वहीं अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो यह नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू हो जाएगा. ऐसे में सवाल है कि क्या आपके होम लोन की EMI बदल जाएगी?

RBI के नए नियम से 2027 में कैसे बदलेगी आपकी होम और पर्सनल लोन की EMI?
RBI

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले समय में एक ऐसे बदलाव का प्रस्ताव ला रहा है, जिससे फ्लोटिंग रेट लोन पर इंटरेस्ट रेट में बदलाव का असर तेजी से दिखेगा. RBI का यह फ्रेमवर्क अभी केवल एक ड्राफ्ट है, जिस पर 11 सितंबर 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं. वहीं अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो यह नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू हो जाएगा. ऐसे में सवाल है कि क्या आपके होम लोन की EMI बदल जाएगी?  नए नियम से आपके EMI में तुरंत बदलाव नहीं दिखेगा, लेकिन RBI द्वारा दरों में कटौती या बढ़ोतरी का आपके लोन की दर पर असर पड़ने का तरीका काफ़ी बदल सकता है

RBI का सबसे बड़ा प्रस्तावित बदलाव ब्याज दरों के रीसेट होने की फ़्रीक्वेंसी से जुड़ा है. अभी, कई फ्लोटिंग-रेट लोन साल में सिर्फ एक बार रीसेट होते हैं. इसका मतलब है कि RBI द्वारा रेपो रेट में कटौती के बाद भी, लोन लेने वालों को इसका फायदा मिलने में कई महीने लग सकते हैं.

क्या है नया नियम

प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत फ्लोटिंग रेट लोन को ज्यादा से ज्यादा तीन महीने के अंदर रीसेट करना होगा. रेपो-लिंक्ड होम लोन लेने वालों के लिए इसका मतलब दरों में कटौती और बढ़ोतरी दोनों का असर तेजी से दिखना हो सकता है. दूसरे शब्दों में कहें तो जब रेट कम होते हैं तो आपको इसका फायदा जल्दी मिल सकता है. लेकिन जब रेट बढ़ते हैं तो उसका सर भी जल्दी दिख सकता है.

इस बारे में चॉइस फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड के CEO विजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि होम-लोन लेने वालों के लिए मुख्य फायदा रेट में तुरंत कमी के बजाय टाइमिंग और ट्रांसपेरेंसी होगी.

शेखावत ने कहा, होम-लोन लेने वाले के लिए असली फायदा टाइमिंग और ट्रांसपेरेंसी है, न कि पहले दिन कम रेट मिलना. रेपो रेट में कटौती का असर अब महीनों तक रुका नहीं रहेगा, और पहली बार लोन एग्रीमेंट में साफ तौर पर बताना होगा कि आपका रेट किस बेंचमार्क पर आधारित है और इसे कितनी बार बदला जा सकता है. नया लोन लेने वाले के लिए, बेंचमार्क के ऊपर का स्प्रेड (अंतर) ही तुलना करने के लिए ज़रूरी है, क्योंकि यही चीज 20 साल तक आपके साथ रहती है.

पर्सनल लोन EMI का क्या होगा?

लोन लेने वालों को बारीक शर्तों को ध्यान से पढ़ने की जरूरत है. प्रस्तावित रीसेट फ्रेमवर्क फ्लोटिंग-रेट लोन पर लागू होता है. रिटेल लेंडिंग में, यह खास तौर पर होम लोन के लिए लागू होता है. ज्यादातर पर्सनल और ऑटो लोन फिक्स्ड-रेट लोन होते हैं. इसलिए RBI के इन प्रस्तावित नियमों की वजह से मौजूदा पर्सनल-लोन EMI में अचानक कोई बदलाव नहीं होगा. हालांकि, नया लोन लेने वालों को ज्यादा स्पष्टता मिल सकती है. लोन एग्रीमेंट में इस्तेमाल किए जा रहे बेंचमार्क, रेट कितनी बार रीसेट होगा और रीसेट किस तारीख को होगा, इन बातों का साफ़ तौर पर जिक्र करना होगा.

ड्राफ्ट में यह भी प्रस्ताव है कि स्प्रेड के नॉन-क्रेडिट हिस्से में तीन साल तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकता. इससे लोन लेने वालों के लिए यह समझना आसान हो सकता है कि वे असल में किस चीज के लिए पेमेंट कर रहे हैं.

मौजूदा होम लोन का क्या होगा?

फ्लोटिंग-रेट वाले मौजूदा लोन लेने वालों को अभी कुछ करने की जरूरत नहीं है. प्रस्तावित नियम के अनुसार, मौजूदा लोन 1 अप्रैल, 2029 तक नए स्ट्रक्चर में बदल दिए जाएंगे. इस बदलाव के लिए लोन लेने वाले की सहमति जरूरी होगी. इस बदलाव के लिए कोई फीस नहीं लगेगी और लेंडर सिर्फ़ बदलाव की वजह से ब्याज दर नहीं बढ़ा सकता. यह लोन लेने वालों के लिए अपने मौजूदा लोन की समीक्षा करने का एक अच्छा मौका भी हो सकता है.

शेखावत ने कहा, "रीसेट के समय, लोन लेने वाले फिक्स्ड-रेट लोन में बदलने पर विचार कर सकते हैं, जहाँ यह विकल्प उपलब्ध हो. वे लेंडर से कम स्प्रेड की मांग भी कर सकते हैं, खासकर अगर लोन लेने के बाद से उनका क्रेडिट प्रोफ़ाइल बेहतर हुआ हो.

नए लोन लेने वाले के लिए, होम-लोन की मुख्य दर पूरी कहानी का सिर्फ़ एक हिस्सा है. बेंचमार्क के ऊपर स्प्रेड भी उतना ही महत्वपूर्ण हो सकता है. होम-लोन की दरें अभी सबसे अच्छे क्रेडिट प्रोफाइल वाले लोन लेने वालों के लिए लगभग 7.1-7.25 प्रतिशत से शुरू होती हैं. ज्यादातर सैलरीड लोन लेने वालों को आम तौर पर 7.5-8.5 प्रतिशत की रेंज में दरें मिलती हैं, जबकि NBFC और कमज़ोर प्रोफ़ाइल वाले लोन लेने वालों को ज़्यादा दरें चुकानी पड़ सकती हैं।

मान लीजिए कि आप 20 साल के लिए 8% की ब्याज दर पर ₹50 लाख का फ्लोटिंग-रेट होम लोन लेते हैं. इसकी EMI लगभग ₹41,800 प्रति महीना होगी. ब्याज दर में 0.5% का अंतर भी पूरे लोन के समय में लगभग ₹3.5 लाख से ₹4 लाख का फ़र्क डाल सकता है. इसीलिए लोन लेने वालों को सिर्फ़ सबसे कम विज्ञापित दर के पीछे नहीं भागना चाहिए. उन्हें बेंचमार्क, स्प्रेड और दर कितनी बार रीसेट हो सकती है, यह भी देखना चाहिए.

RBI ने अगस्त 2026 में रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखा. यह 2025 में कुल 125-बेसिस-पॉइंट की कटौती के बाद हुआ है. शेखावत ने कहा, इसलिए प्रस्तावित नियम लोन लेने वालों के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भविष्य में दरों में बदलाव का असर उन पर तेज़ी से पड़ सकता है. दर में कटौती से लोन लेने की लागत जल्दी कम हो सकती है। हालाँकि, दर में बढ़ोतरी से EMI बढ़ सकती है या लोन चुकाने की अवधि तेज़ी से बढ़ सकती है.

लोन लेने वालों को ये तीन बातें देखनी चाहिए

अगर आप नया होम लोन ले रहे हैं, तो तीन नंबर और शर्तें ध्यान से देखनी चाहिए। पहला, स्प्रेड देखें. सिर्फ़ विज्ञापित ब्याज दर की तुलना न करें। स्प्रेड कई सालों तक आपके साथ बना रह सकता है. दूसरा, रीसेट फ़्रीक्वेंसी देखें। ठीक से जानें कि आपका लेंडर ब्याज दर में कब बदलाव कर सकता है. तीसरा, EMI के लिए कुछ गुंजाइश रखें. भविष्य में दर बढ़ने पर आपके महीने के बजट पर बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए.

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