कार, दोपहिया वाहन हो या टीवी-फ्रिज जैसे इलेक्ट्रिक उत्पाद, अक्सर सामान में खराबी पाए जाने पर कंपनियां ग्राहकों की शिकायतों को अनदेखा कर देती हैं. पीड़ित उपभोक्ता चक्कर लगाते रहता है, लेकिन उसे न्याय नहीं मिलता. कार में खराबी से जुड़े ऐसे ही एक मामले में पीड़ित को 14 साल बाद न्याय मिला है. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने कार निर्माता कंपनी हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड को सेवा में कमी और ग्राहक को परेशान करने के केस में अहम फैसला दिया है.पीड़ित ने 2012 में नई हुंडई i10 कार खरीदी थी. लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर स्टीयरिंग व्हील में गंभीर खराबी आ गई थी. 14 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आयोग ने कंपनी को मुआवजा देने का आदेश कंपनी को दिया.
क्या था पूरा मामला?
उपभोक्ता मामलों की सलाहकार शीतल कपूर ने ऐसे ही एक मामले की जानकारी दी है. इसमें गोवा की रहने वाली सिजोनी मटिल्डा डायस ने 21 जनवरी 2012 को एक नई हुंडई i10 कार खरीदी थी. खरीदने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने पाया कि कार का स्टीयरिंग व्हील मोड़ने के बाद वापस अपनी सामान्य स्थिति में नहीं आ रहा था, जिससे गाड़ी चलाना असुरक्षित हो गया था. कार विज्ञापनों में बताए गए 20.36 किमी प्रति लीटर के माइलेज के बजाय केवल 8.5 किमी प्रति लीटर का माइलेज दे रही थी. बार-बार शिकायत करने के बावजूद, डीलर (M/S गोवा मोटर्स) और निर्माता कंपनी इस समस्या को ठीक करने में नाकाम रही. डायस ने 2012 में दक्षिण गोवा जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई.
आयोग का फैसला ग्राहक के पक्ष में
जिला आयोग ने इसे एक मैन्चुफैक्चरिंग डिफेक्ट माना और हुंडई और डीलर को कार की पूरी कीमत 503062 रुपये 9% ब्याज के साथ ग्राहक को वापस करने का आदेश दिया. इस फैसले को गोवा राज्य उपभोक्ता आयोग ने भी बरकरार रखा. इसके बाद हुंडई ने 2014 में राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में रिवीजन याचिका दायर की.
राष्ट्रीय आयोग का फैसला
हुंडई ने तर्क दिया कि ग्राहक द्वारा पेश विशेषज्ञ रिपोर्ट में किसी वैज्ञानिक जांच का अभाव है. इससे यह मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित नहीं होता. आयोग ने डीलर के एमडी प्रशांत जोशी के एक आंतरिक ईमेल को सबसे बड़ा सबूत माना. इसमें उन्होंने खुद माना था कि कार का स्टीयरिंग वाकई खराब है और वापस नहीं आता है.आयोग ने कहा कि जब डीलर खुद खराबी मान रहा है तो कंपनी इससे इनकार नहीं कर सकती.
मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित नहीं, लेकिन कार में खराबी
आयोग ने कहा कि भले ही मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित न हो पाया हो, लेकिन यह स्पष्ट है कि कार में खराबी थी. वारंटी अवधि के दौरान इस खराबी को ठीक न करना सेवा में घोर कमी है. आयोग ने कहा कि ग्राहक ने 14 वर्षों तक कार का इस्तेमाल किया है. सुनवाई पूरी होने तक कार 66 हजार किमी चल चुकी थी. इसलिए कार की पूरी कीमत वापस करने का आदेश अनुचित है. आयोग ने कहा कि कंपनी को खराब पुर्जे बदलने चाहिए थे, लेकिन पूरी गाड़ी बदलने की जरूरत नहीं थी.
वारंटी में सेवा देने में कोताही नहीं बरत सकती
राष्ट्रीय आयोग (NCDRC) ने निचली अदालतों के फैसले को आंशिक रूप से संशोधित कर दिया. आयोग ने आदेश दिया कि हुंडई द्वारा 2014 में अंतरिम आदेश के तहत जमा की गई ढाई लाख की राशि ही ग्राहक के दावे का पूरा और अंतिम निपटारा मानी जाएगी.आयोग ने कहा कि कंपनियां वारंटी के दौरान सेवा देने में कोताही नहीं बरत सकतीं. लेकिन लंबे समय तक उत्पाद का उपयोग करने के बाद ग्राहक पूरी कीमत वापसी की उम्मीद नहीं कर सकता, जब तक कि दोष असाधारण रूप से गंभीर न हो.
कहां और कैसे करें शिकायत
- सबसे पहले लिखित सबूत ईमेल वगैरा इकट्ठा करें
- नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन 1915 पर शिकायत दर्ज करें
- जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का रुख करें
सभी सबूत और दस्तावेज सुरक्षित रखें
- जब भी आप गाड़ी सर्विस सेंटर लेकर जाएं तो हर बार जॉब कार्ड की कॉपी जरूर लें
- इसमें गाड़ी की शिकायतें दर्ज होती हैं, यह साबित करेगा कि गाड़ी में समस्या बार-बार हो रही है
- सर्विस सेंटर मैनेजर और कंपनी के कस्टमर केयर को भेजे गए सभी ईमेल का रिकॉर्ड रखें
- गाड़ी में आ रही तकनीकी खराबी के वीडियो रिकॉर्ड कर लें
कंपनी लेवल पर क्या करें
1. अक्सर लोकल डीलर या सर्विस सेंटर मैनेजर कमियां छिपाने के लिए शिकायत आगे नहीं भेजते
2. कार कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर ईमेल आईडी पर अपनी शिकायत भेजें
3. अगर 3-5 दिनों में जवाब न मिले तो कंपनी के नोडल अफसर या कस्टमर रिलेशनशिप हेड को ईमेल भेजें
4. सोशल मीडिया पर कार निर्माता कंपनी, उनके सीईओ और संबंधित मंत्रालय को टैग करते हुए शिकायत, वीडियो पोस्ट करें
- राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शिकायत करें
- कंपनी से समाधान नहीं मिलता है तो सरकारी उपभोक्ता हेल्पलाइन का सहारा लें
- अपने फोन से 1915 डायल करें, यह सरकार की नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन है
- आप व्हाट्सएप नंबर 8130009809 पर मैसेज भेजकर भी शिकायत कर सकते हैं
- वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें और शिकायत दर्ज करें
कंज्यूमर कोर्ट का रुख करें समाधान न मिले तो
समाधान न मिले तो उपभोक्ता फोरम में केस दर्ज करना होगा
ई-दाखिल पोर्टल के जरिये शिकायत दर्ज कर सकते हैं
50 लाख तक : जिला उपभोक्ता आयोग
50 लाख से 2 करोड़ तक: राज्य उपभोक्ता आयोग
2 करोड़ से अधिक: राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग
उपभोक्ता अदालत में क्या मांग कर सकते हैं?
गाड़ी की खराबी को पूरी तरह मुफ्त में ठीक करवाना
मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट पर गाड़ी को पूरी तरह से बदलवाना
गाड़ी की पूरी कीमत ब्याज सहित वापस पाना
मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च के लिए हर्जाना
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