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Share Market Crash: सेंसेक्‍स 1200 अंक गिरा! क्‍या इंश्‍योरेंस पर इस एक नियम से शेयर मार्केट में आया भूचाल?

Stock Market Falls: शेयर मार्केट में आज बड़ी गिरावट देखी जा रही है. 30 शेयरों वाले सेंसेक्‍स पैक में सभी लाल निशान में कारोबार करते दिखे हैं. इसके पीछे की वजह सीधे आपसे जुड़ी है. पूरी डिटेल यहां.

Share Market Crash: सेंसेक्‍स 1200 अंक गिरा! क्‍या इंश्‍योरेंस पर इस एक नियम से शेयर मार्केट में आया भूचाल?
शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट
(NDTV File Photo)

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी जा रही है. दोपहर करीब 2:30 बजे सेंसेक्‍स में 1200 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट देखी गई. वहीं, दूसरी तरफ निफ्टी का भी हाल बेहाल है. सेंसेक्स करीब 1228 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 73,600 के करीब कारोबार करता दिखा, जबकि NSE निफ्टी 3756 अंक लुढ़ककर 23069 पर ट्रेड करता दिखा. 

BSE के 30 शेयरों वाले इंडेक्स में इस वक्त सारे शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं.  एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस जैसे शेयरों में 4 से 6 फीसदी की बड़ी गिरावट देखी जा रही है. 

बीमा कंपनियों की बात करें तो PB फिनटेक के शेयरों में 28 फीसदी तक की गिरावट देखी गई, वहीं Turtlemint के शेयरों में भी 20 फीसदी तक की गिरावट देखी जा रही है.  

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क्‍या इंश्‍योरेंस पर IRDAI के फैसले से आई गिरावट? 

मार्केट में गिरावट के पीछे की बड़ी वजह बीमा नियामक IRDAI के प्रस्‍तावित ड्राफ्ट को बताया जा रहा है. दरअसल, IRDAI ने अनिवार्य थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस और नई गाड़ियों के आसानी से बिकने वाले इंश्योरेंस प्रोडक्ट पर कमीशन कम करने का प्रस्ताव रखा है.

IRDAI ने इंश्योरेंस में बड़े सुधारों के लिए 'Recalibrating Economics of Insurance Distribution' के नाम से एक प्रपोजल रखा है, जिसका मकसद बैंकों की ओर से जबरन बीमा बेचने, बीमा के खर्च को कम करना और 'कमीशन कैप' लगाना है. इस प्रस्‍ताव से बैंकों और इंश्‍योरेंस कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की संभावना है. 

मार्केट में गिरावट के पीछे ये 4 वजहें भी 

  1. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 2007 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जिससे डॉलर असेट्स आकर्षक हो गए हैं और भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी निवेश पर दबाव पड़ रहा है.   
  2. ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका: मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के कारण अक्टूबर में फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना 66% से अधिक हो गई है, जिससे जोखिम भरे असेट्स की वैल्युएशन प्रभावित हो रही है.
  3. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल: ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश का आयात बिल बढ़ने और महंगाई का जोखिम पैदा हो गया है.
  4. ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव: जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितताओं और तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे बाजारों में चिंता बढ़ी है.

एक्‍सपर्ट्स क्‍या बता रहे हैं? 

स्टॉक्सकार्ट के डायरेक्टर और CEO प्रणय अग्रवाल ने NDTV को बताया कि भारतीय बाजारों में आई कमजोरी घरेलू और वैश्विक दबावों का मिलाजुला असर है, जिसमें मुख्य रूप से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंकाएं शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए क्रूड ऑयल का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना महंगाई, आयात बिल और कॉरपोरेट लागत को लेकर चिंताएं बढ़ाता है. 

साथ ही, वैश्विक स्तर पर यील्ड बढ़ने से विदेशी संस्थागत निवेश (FII) के प्रवाह पर असर पड़ सकता है और रुपया दबाव में रह सकता है. इस मौजूदा अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक गतिविधियों और केंद्रीय बैंकों के रुख पर करीबी नजर रखनी चाहिए.

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