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गाजियाबाद में घर बनाने से पहले जान लें GDA का नया नियम, नहीं तो अटक जाएगा नक्शा

Ghaziabad News: GDA के मुताबिक, जो भी व्यक्ति या बिल्डर 200 वर्ग मीटर या उससे बड़े प्लॉट का नक्शा पास कराएगा, उसे सोलर पैनल लगाने के लिए पहले से जगह दिखानी होगी. नक्शा पास कराने के दौरान आवेदकों को एक सिक्योरिटी राशि भी जमा करनी होगी.

गाजियाबाद में घर बनाने से पहले जान लें GDA का नया नियम, नहीं तो अटक जाएगा नक्शा
Ghaziabad News: गाजियाबाद में घर बनाने पर GDA के नए नियम लागू

Ghaziabad News: अगर आप गाजियाबाद में घर बनाने की योजना बना रहे हैं, तो अब एक नया नियम जानना बेहद जरूरी है. बता दें कि गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी (Ghaziabad Development Authority) ने 1 अप्रैल से बड़ा फैसला लागू कर दिया है. इसके तहत अब 200 वर्ग मीटर या उससे बड़े प्लॉट पर मकान बनाने के लिए छत पर सोलर पैनल लगाने की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया गया है.

क्या है नया नियम?

GDA के मुताबिक, जो भी व्यक्ति या बिल्डर 200 वर्ग मीटर या उससे बड़े प्लॉट का नक्शा पास कराएगा, उसे सोलर पैनल लगाने के लिए पहले से जगह दिखानी होगी. अगर नक्शे में सोलर पैनल की जगह नहीं होगी, तो उसे सीधे खारिज कर दिया जाएगा.

देनी होगी जमानत राशि

नक्शा पास कराने के दौरान आवेदकों को एक सिक्योरिटी (जमानत) राशि भी जमा करनी होगी. यह राशि प्लॉट के साइज के अनुसार तय की गई है. जैसे- 

  • 200 से 500 वर्ग मीटर के लिए 20,000 रुपये
  • 500 से 1000 वर्ग मीटर के लिए 50,000 रुपये
  • 1000 से 5000 वर्ग मीटर के लिए 1 लाख रुपये और 
  • 5000 वर्ग मीटर से अधिक के लिए 2 लाख रुपये.

अच्छी बात यह है कि सोलर पैनल लगाने के बाद यह राशि वापस कर दी जाएगी.

छोटे प्लॉट वालों को राहत

GDA ने साफ किया है कि 200 वर्ग मीटर से छोटे प्लॉट इस नियम के दायरे में नहीं आएंगे. यानी छोटे घर बनाने वालों को न तो सोलर पैनल लगाना अनिवार्य है और न ही कोई अतिरिक्त शुल्क देना होगा.

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क्यों लिया गया यह फैसला?

यह कदम शहर को 'सोलर सिटी' बनाने की दिशा में उठाया गया है. Uttar Pradesh New and Renewable Energy Development Agency (UPNREDA) के अनुसार, गाजियाबाद में करीब 2,858 मेगावाट सोलर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता है. ऐसे में सरकार चाहती है कि 2027 तक शहर अपनी कुल बिजली जरूरत का कम से कम 10% हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा करे.

लोगों को क्या फायदा होगा?
  • बिजली बिल में कमी आएगी.
  • अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर कमाई हो सकती है.
  • पर्यावरण को फायदा मिलेगा. 
  • इसके साथ ही सोलर ऊर्जा पारंपरिक बिजली से करीब 30% सस्ती है.

यानी GDA का यह फैसला न सिर्फ पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि लोगों की जेब पर भी हल्का पड़ेगा. ऐसे में अगर आप नया घर बनाने जा रहे हैं, तो इस नियम को ध्यान में रखें और समय रहते सोलर पैनल की योजना बना लें, ताकि नक्शा पास कराने में कोई परेशानी न हो.

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