Delhi-NCR Speed Limit Rule: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) की सड़कों को सुरक्षित बनाने और जानलेवा हादसों पर लगाम कसने के लिए नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. बोर्ड की ओर से तैयार किए गए ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2041 में कई अंतरराष्ट्रीय मानकों और सुधारों को शामिल किया गया है.
इस नए मास्टर प्लान में जहां शहरों के अंदर वाहनों की रफ्तार सीमित करने का सुझाव दिया गया है. वहीं, बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई के लिए नई प्रणालियों की सिफारिश भी की गई है. NCRPB जल्द ही इस मास्टर प्लान को अंतिम रूप देकर लागू करने की तैयारी में है.
स्वीडन मॉडल पर 30 किमी प्रति घंटा रफ्तार होगी तय
मास्टर प्लान में वैश्विक स्तर पर सफल रहे रोड सेफ्टी मॉडल्स के अध्ययन को शामिल किया गया है, जिसमें यूरोपीय देश स्वीडन की तर्ज पर दिल्ली-एनसीआर के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में वाहनों की अधिकतम गति सीमा 30 किलोमीटर प्रति घंटा तय करने का प्रस्ताव है. इसके अलावा, शहरी इलाकों के अलावा एनसीआर की दूसरी सड़कों पर इंडियन रोड कांग्रेस (IRC) के मानकों के मुताबिक गति सीमा तय की जाएगी और उसका कड़ाई से पालन कराया जाएगा. साथ ही विदेश के कई शहरों की तर्ज पर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर वाहन चालक की आय के आधार पर चालान की राशि तय करने का विचार भी ड्राफ्ट में रखा गया है.
ओवरस्पीडिंग से होती है सड़क हादसों में 44% मौतें
आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में होने वाले कुल सड़क हादसों में 44.3 प्रतिशत मौतों की मुख्य वजह अत्यधिक रफ्तार होती है. एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, एनसीआर के करीब 58 फीसदी अभिभावक सड़क दुर्घटनाओं को अपने बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैं. आंकड़ों से यह भी स्पष्ट है कि लगभग 70 प्रतिशत छात्र रोजाना पैदल स्कूल जाते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान में साइकिल चालकों और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित डेडिकेटेड कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा गया है.
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जीपीएस से कसेगा शिकंजा
यातायात नियमों के उल्लंघन और ओवर स्पीडिंग को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की सिफारिश की गई है. इसके तहत सभी सार्वजनिक और वाणिज्यिक वाहनों में जीपीएस और स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य किया जाएगा. इसके बाद भी जो चालक बार-बार रेड लाइट जंप या ओवरस्पीडिंग जैसे नियमों को तोड़ेंगे, उनका ड्राइविंग लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाएगा. वाहन चालक का एक्सीडेंट रिकॉर्ड सीधे उसके वाहन बीमा से जोड़ा जाएगा. यानी खराब ड्राइविंग रिकॉर्ड वाले चालकों को अधिक बीमा प्रीमियम चुकाना पड़ सकता है.
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