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घरों में काम करने वाली मेड को भी मिलेंगे 1500 रुपये, जानिए क्या है BMC की स्वाभिमान निधि योजना और कैसे मिलेगा लाभ

मुंबई की नई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने भी महिलाओं के लिए एक नई योजना का प्रस्ताव दिया है. इस योजना का नाम ‘स्वाभिमान निधि’ रखा गया है. इसके तहत कामवाली, रसोइया और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को हर महीने 1500 से 2000 रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी.

घरों में काम करने वाली मेड को भी मिलेंगे 1500 रुपये, जानिए क्या है BMC की स्वाभिमान निधि योजना और कैसे मिलेगा लाभ
बीएमसी स्वाभिमान निधि योजना
file photo

महाराष्ट्र में लाडकी बहिन योजना के बाद अब उसी तरह मुंबई की नई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) ने भी महिलाओं के लिए एक नई योजना का प्रस्ताव दिया है. इस योजना का नाम ‘स्वाभिमान निधि' रखा गया है. इसके तहत घरेलू कामगार जैसे कामवाली, रसोइया और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को हर महीने 1500 से 2000 रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी. इस योजना से मुंबई की करीब 5 लाख महिलाओं को फायदा मिल सकता है. अगर यह योजना लागू होती है, तो BMC को हर महीने लगभग 75 से 100 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं.

असल में यह योजना पहले शिवसेना (UBT) ने जनवरी में हुए BMC चुनाव के अपने घोषणापत्र में शामिल की थी, लेकिन अब इस प्रस्ताव को बीजेपी के नेतृत्व वाले पक्ष का भी समर्थन मिल गया है, जो इस समय नगर निगम में बहुमत में है. मार्च महीने में शिवसेना (UBT) की नेता किशोरी पेडणेकर ने इस प्रस्ताव को बीजेपी के नेता गणेश खांकर के सामने रखा. इसके बाद गणेश खांकर ने इस योजना का समर्थन किया और इसे आगे बढ़ाते हुए BMC की स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे को भेज दिया. साथ ही सुझाव दिया गया कि नगर निगम इस योजना के लिए बजट की व्यवस्था संभव है या नहीं, इसकी जांच करे.

बीएमसी स्वाभिमान निधि योजना क्या है?

बीएमसी स्वाभिमान निधि योजना राज्य सरकार की 'मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना' की तर्ज पर शुरू की जा रही है, जो विशेष रूप से मुंबई की कामकाजी महिलाओं के लिए है. इस योजना के तहत मुंबई में काम करने वाली मेड यानी घरेलू कामगारों और अन्य असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों को 1,500 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते दिए जाएंगे.

शिवसेना की नेता किशोरी पेडणेकर ने अपने पत्र में लिखा कि घरेलू काम करने वाली महिलाएं यानी कामवाली और कुक आदि कम आय होने के बावजूद अपने परिवार का खर्च उठाती हैं और बच्चों की पढ़ाई भी करवाती हैं, लेकिन बीमारी, बढ़ती उम्र या अचानक पैसों की जरूरत आने पर ये महिलाएं मुश्किल में पड़ जाती हैं, क्योंकि इनके पास कोई पक्का सहारा नहीं होता.

कैसे होगा रजिस्ट्रेशन और कैसे होगी पहचान

अधिकारियों के मुताबिक, अगर सरकार मंजूरी दे देती है, तो BMC अपने 26 वार्ड ऑफिस के जरिए सर्वे कराएगा, ताकि पात्र महिलाओं की पहचान करके उनका रजिस्ट्रेशन किया जा सके. योजना की पूरी प्रक्रिया मंजूरी मिलने के बाद ही तय होगी, सिर्फ रजिस्टर्ड घरेलू कामगार ही इस योजना का लाभ ले पाएंगी. ज्यादातर घरेलू कामगार असंगठित क्षेत्र से जुड़ी होती हैं, इसलिए उनकी जांच के लिए ई-श्रम (E-Shram) डेटाबेस का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो लोग अभी रजिस्टर्ड नहीं हैं. उन्हें योजना का लाभ लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो सकता है. हाउसिंग सोसायटी से यह सर्टिफिकेट भी लिया जा सकता है कि महिला वहां काम करती है. इसके अलावा NGO और सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) भी इस प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं.

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BMC, Ladki Bahin Scheme
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