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मुंबई में करीब 20 हजार फर्जी जन्म प्रमाण पत्र रद्द करने की सिफारिश; BMC की जांच में महाघोटाले का पर्दाफाश

मुंबई में BMC की जांच में बड़े फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घोटाले का खुलासा हुआ है. 2024-26 के बीच जारी 19,734 संदिग्ध सर्टिफिकेट रद्द करने की सिफारिश की गई है. जांच में बिना दस्तावेज और अधूरी जानकारी से प्रमाण पत्र जारी होने की बात सामने आई है.

मुंबई में करीब 20 हजार फर्जी जन्म प्रमाण पत्र रद्द करने की सिफारिश; BMC की जांच में महाघोटाले का पर्दाफाश
मुंबई में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घोटाला, BMC ने 19,734 सर्टिफिकेट रद्द करने की सिफारिश

Mumbai News: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में जन्म प्रमाण पत्र से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की जांच में भारी अनियमितताओं का खुलासा होने के बाद करीब 19,734 फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों को रद्द करने की सिफारिश की गई है. यह कार्रवाई 2024 से 2026 के बीच जारी किए गए प्रमाण पत्रों की जांच के बाद की गई है. जांच में सामने आया कि हजारों प्रमाण पत्र बिना सही दस्तावेज या अधूरी जानकारी के आधार पर जारी किए गए. इस मामले के सामने आने के बाद न केवल प्रशासन बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है.

कैसे हुआ था खुलासा?

यह पूरा मामला तब सामने आया जब 30 अप्रैल को बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे को एक आंतरिक जांच रिपोर्ट सौंपी गई. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि कई वार्डों के स्वास्थ्य अधिकारियों ने निर्धारित दिशा-निर्देशों और प्रक्रियाओं का पालन किए बिना जन्म रिकॉर्ड में संशोधन किए.

86 हजार सर्टिफिकेट की जांच, बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, 29 मई को जन्म एवं मृत्यु के मुख्य रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर इन सभी जन्म प्रमाणपत्रों को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है. इससे पहले 21 मई तक ऐसे संदिग्ध मामलों की संख्या 10,244 थी, जो अब बढ़कर लगभग 20 हजार तक पहुंच गई है. जांच में सामने आया है कि 19,734 मामलों में से 16,528 जन्म प्रमाणपत्र ऐसे थे जिनके लिए कोई भी सहायक दस्तावेज जमा नहीं किए गए थे. वहीं, 3,206 मामलों में अधूरे दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए गए थे. अधिकारियों का कहना है कि यह निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का उल्लंघन है.
 

इस बीच मुंबई पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) भी मामले की आपराधिक जांच कर रही है. हाल ही में एसआईटी ने बीएमसी अधिकारियों से जन्म पंजीकरण सॉफ्टवेयर, सीआरएम प्रणाली और एसएपी प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली को लेकर पूछताछ की है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर इन प्रमाणपत्रों को किस प्रक्रिया के तहत मंजूरी दी गई और कहीं इसमें किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका तो नहीं थी.

बीएमसी ने अब तक कुल 86,020 जन्म प्रमाणपत्रों की जांच की है. इस दौरान बड़ी संख्या में रिकॉर्ड में अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद मामले की जांच और तेज कर दी गई है.

87 हजार से ज्यादा फर्जी एंट्री का अनुमान

पूरे मामले में 2024 से 2026 के बीच कुल 87,347 संदिग्ध एंट्री सामने आई हैं.

  • 2024 में: 30,507 मामले
  • 2025 में: 49,705 मामले
  • 2026 में अब तक: 7,135 मामले

ये आंकड़े बताते हैं कि समय के साथ यह गड़बड़ी बढ़ती गई और बड़े स्तर पर सिस्टम से छेड़छाड़ की गई.

बांग्लादेशी और रोहिंग्या से जुड़ा एंगल

इससे पहले जांच में यह भी सामने आया है कि कई प्रमाण पत्र कथित तौर पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम पर बनाए गए. इससे न सिर्फ प्रशासनिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता प्रभावित हुई, बल्कि सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा हुई है. इस मामले ने नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मेयर बनने के बाद रीता तावड़े ने पहले ही अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे. अब इस घोटाले के सामने आने से यह मुद्दा और ज्यादा संवेदनशील हो गया है.

अधिकारियों पर गिरी थी गाज, तबादले और सस्पेंशन

इस मामले में कार्रवाई भी देखने को मिली है. बीएमसी ने M/East वार्ड में 2 स्वास्थ्य अधिकारियों और 2 क्लर्क को निलंबित किया था. इसके अलावा 24 वार्डों में मेडिकल हेल्थ ऑफिसर्स (MHOs) के चरणबद्ध तबादले की योजना बनाई गई थी. पहले चरण में अंधेरी, दहिसर और भायखला के अधिकारियों के तबादले की तैयारी थी. हालांकि, जांच के दायरे में आए कुछ बीएमसी अधिकारियों का कहना है कि उनके खिलाफ बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए कार्रवाई की जा रही है और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया है.

नागरिक सतर्कता विभाग को सौंपी जांच

पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए सिविक विजिलेंस डिपार्टमेंट को जिम्मेदारी दी गई है. साथ ही, शहर के सभी वार्डों में जन्म और मृत्यु पंजीकरण का व्यापक ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है. इसका उद्देश्य सिस्टम में पारदर्शिता लाना और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकना है. करीब 20 हजार जन्म प्रमाणपत्रों को रद्द करने की सिफारिश के साथ यह मामला बीएमसी के हाल के वर्षों के सबसे बड़े दस्तावेजी अनियमितता मामलों में से एक बन गया है. अब सभी की नजरें एसआईटी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के अगले चरण पर टिकी हैं.

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