- तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से अलग स्थान देने और एनसीपीआई में विलय की मांग की है
- एनसीपीआई के महासचिव शांतनु डे ने इस विलय का विरोध जताते हुए खुद को बागी सांसदों के शामिल के खिलाफ बताया
- एनसीपीआई की स्थापना 2022 में हुई थी. इसका कार्यालय त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में है
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के बागी गुट ने रविवार शाम स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और सदन में टीएमसी से अलग स्थान दिए जाने की मांग की. साथ ही त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में अपने विलय की भी घोषणा कर दी. इस बीच NCPI के राष्ट्रीय महासचिव शांतनु डे ने कहा है कि मैं इस विलय के खिलाफ हूं. मैं नहीं चाहता कि TMC के बागी गुट हमारी पार्टी ज्वाइन करें.
शांतनु डे ने कहा कि मैं पार्टी का नेशनल जनरल सेक्रेटरी हूं. ये पार्टी मैंने लोक अधिकार के लिए खड़ी की थी. हमने 2023 का चुनाव भी लड़ा था. मैं नहीं चाहता कि रेबल TMC हमारी पार्टी ज्वाइन करें., लेकिन हमारी पार्टी के अध्यक्ष इनके साथ जुड़ना चाहते हैं, लेकिन मैं इसको सपोर्ट नहीं करता.

बता दें कि टीएमसी के इन बागी सांसदों के गुट की अगुवाई चार बार की लोकसभा सांसद रहीं डॉ. काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय कर रही हैं. बागी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होने के फैसले की पुष्टि करते हुए घोष दस्तीदार ने कहा कि हम देश के हित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के साथ काम करेंगे.
इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बांकुरा से तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसद अरूप चक्रवर्ती ने मीडिया को बताया कि एनसीपीआई पूरे पश्चिम बंगाल में अपने दफ्तर खोलेगी.

इससे पहले, बागी सांसदों ने संकेत दिया था कि वे लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के अंदर एक अलग गुट बनाएंगे, जैसा पश्चिम बंगाल विधानसभा में किया गया था, और उसके बाद एनडीए से समर्थन की अपील करेंगे.

इसके बाद, पार्टी के बागी गुट के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और एनसीपीआई में शामिल होने और एनडीए का समर्थन करने के अपने फैसले के बारे में एक प्रस्ताव सौंपा.
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