रात के समय सड़कों पर गाड़ियों की हाई बीम हेडलाइट्स से आंखों में लगने वाली चकाचौंध सड़क हादसों की एक बड़ी वजह बनती है. इसी जोखिम को कम करने और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ये नए सेफ्टी नॉर्म्स अगले साल अप्रैल से लागू हो सकते हैं. दरअसल, मंत्रालय की ओर से जागरूकता अभियानों के बावजूद हाई बीम का गलत इस्तेमाल न रुकने की वजह से अब कड़े कानूनी नियम लाए जा रहे हैं.
ऑटोमेटिक हेडलाइट सिर्फ लो बीम पर चलेगी
मौजूदा वक्त में दोपहिया वाहनों में मौजूद ऑटोमेटिक हेडलाइट ऑन सिस्टम गाड़ियों की सेटिंग के आधार पर लो बीम या हाई बीम दोनों पर चालू हो सकता है. लेकिन, नए नियम लागू होने के बाद नए दोपहिया वाहनों में AHO सिस्टम ऑटोमेटिक चालू होने पर हेडलाइट सिर्फ लो बीम मोड में ही रहेगी. यह नियम सिर्फ नए बनने वाले दोपहिया वाहनों पर लागू होगा, सड़कों पर पहले से चल रही गाड़ियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
हेडलाइट की ब्राइटनेस और कैंडेला लिमिट होगी कम
रात में सामने से आ रहे चालकों की आंखों को चौंधियाने से बचाने के लिए हेडलाइट्स की अधिकतम लाइट इंटेंसिटी की सीमा घटाने का प्रस्ताव है. इसके मुताबिक ज्यादा से ज्यादा स्वीकार्य तीव्रता को 1.5 लाख कैंडेला से घटाकर एक लाख cd करने का प्रस्ताव है. वहीं, कार और अन्य चार पहिया वाहनों के लिए यह सीमा 2.25 लाख cd से घटाकर 1.5 लाख cd की जा सकती है.
सफेद लाइट की चुभन होगी कम
दरअसल, शोध में पाया गया है कि अत्यधिक सफेद और हाई कलर टेम्परेचर वाली हेडलाइट्स और फॉग लैंप्स से ज्यादा चकाचौंध पैदा होती है, जिससे सामने वाले ड्राइवर की विजिबिलिटी प्रभावित होती है. इसलिए ड्राफ्ट नियमों में वाहन की रोशनी का अधिकतम कलर टेम्परेचर 6,500K तय करने का प्रस्ताव है. इसके अलावा, मेन बीम हेडलाइट्स की माउंटिंग हाइट को भी पासिंग बीम हेडलाइट्स के समान स्तर पर रखने की बात कही गई है.
कम स्पीड पर बजेगा हाई बीम वार्निंग अलार्म
शहरों के भीतर बेवजह हाई बीम का इस्तेमाल रोकने के लिए नई कारों और बाइक्स में स्पीड सेंसिटिव ऑडियो अलार्म सिस्टम दिया जा सकता है. इसके बाद अगर ड्राइवर शहर या भीड़भाड़ वाली सड़कों पर मैनुअली हाई बीम पर स्विच करता है, तो गाड़ी में एक बीप या साउंड वार्निंग बजेगी, जो ड्राइवर को वापस लो बीम पर आने का सुझाव देगी. यह अलार्म स्पीड सेंसिटिव होगा. अगर गाड़ी 60 किमी प्रति घंटा से ज्यादा की स्पीड में हाईवे पर चल रही होगी, तो यह वार्निंग नहीं बजेगी, क्योंकि अंधेरे हाईवे पर दूर तक देखने के लिए हाई बीम की जरूरत होती है.
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रात के वक्त और कोहरे या खराब मौसम के दौरान सड़कों पर खड़े या चल रहे भारी वाहनों की दृश्यता बढ़ाने के लिए भी कड़े कदम उठाए जा रहे हैं. ड्राफ्ट प्रस्ताव के मुताबिक सभी बसों, ट्रकों और कमर्शियल भारी वाहनों पर प्रमाणित रिफ्लेक्टिव टेप लगाना जरूरी किया जा सकता है. इससे पीछे या सामने से आने वाली गाड़ियां दूर से ही भारी वाहनों को पहचान सकेंगी और हादसे टल सकेंगे.
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