नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल विरोध प्रदर्शन जारी है. जंतर-मंतर का नाम सुनते ही सबसे पहले दिल्ली का जिक्र आता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में कुल पांच जंतर-मंतर बनाए गए थे. इन्हें 18वीं सदी में जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने खगोलीय अध्ययन के लिए बनवाया था. इन वेधशालाओं का इस्तेमाल समय मापने, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति जानने और ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करने के लिए किया जाता था. इनमें से सिर्फ जयपुर का जंतर-मंतर ही यूनेस्को विश्व धरोहर (UNESCO World Heritage Site) का दर्जा हासिल कर पाया है. आइए जानते हैं अन्य जंतर-मंतर कहां-कहां बनाए गए थे और इन जगहों पर घूमने के लिए कैसे जाया जा सकता है.
जयपुर को मिला UNESCO की विश्व धरोहर का दर्जा

जयपुर का जंतर-मंतर 1728 से 1734 के बीच बनाया गया था. यह पांचों वेधशालाओं में सबसे बड़ा और सबसे अच्छी स्थिति में सुरक्षित है. यहां दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की सूर्य घड़ियों में से एक सम्राट यंत्र भी मौजूद है. इसकी ऐतिहासिक और वैज्ञानिक अहमियत को देखते हुए इसे UNESCO विश्व धरोहर का दर्जा मिला है. अगर आप दिल्ली एनसीआर से हैं तो आप ट्रेन या फिर अपनी कार से राजस्थान के जयपुर में जंतर-मंतर देखने आ सकते हैं.
1721 में बना था देश का पहला जंतर-मंतर

1721 में बना दिल्ली का जंतर मंतर सबसे पहला था. संसद मार्ग पर स्थित यह वेधशाला आज सिर्फ ऐतिहासिक स्मारक ही नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों और आंदोलनों के प्रमुख स्थल के रूप में भी जानी जाती है.
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खगोल विज्ञान का प्रमुख केंद्र उज्जैन

करीब 1725 में बने उज्जैन के जंतर-मंतर का संबंध प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान से रहा है. यहां के यंत्र ग्रहों की गति और आकाशीय निर्देशांकों का अध्ययन करने के लिए बनाए गए थे. अगर आप यहां घूमना चाहते हैं तो आप रेलवे स्टेशन से कैब बुक कर यहां घूमने आ सकते हैं.
वाराणसी में गंगा किनारे बनी है वेधशाशा

वाराणसी का जंतर-मंतर 1737 के आसपास बनाया गया था. दशाश्वमेध घाट के पास स्थित यह वेधशाला गंगा किनारे होने के कारण खूबसूरत दृश्य के लिए भी प्रसिद्ध है. हालांकि यहां अब कम यंत्र सुरक्षित बचे हैं. अगर आप वाराणसी घूमने जा रहे हैं तो यहां का जंतर-मंतर घूमने जरूर जाएं.
अब सिर्फ इतिहास में दर्ज है मथुरा का जंतर-मंतर

मथुरा में भी सवाई जय सिंह द्वितीय ने जंतर मंतर बनवाया था, लेकिन समय के साथ यह पूरी तरह नष्ट हो गया. आज इसकी मूल संरचना लगभग खत्म हो चुकी है और इसका जिक्र सिर्फ ऐतिहासिक दस्तावेजों में मिलता है. अगर आप मथुरा में बांके बिहारी जी के दर्शन के लिए आ रहे हैं तो जंतर-मंतर भी जरूर घूमने जाएं.
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