सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस महीने आने वाली अमावस्या भी धार्मिक रूप से विशेष महत्व रखती है. इसे हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. सावन अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा के साथ पितरों का तर्पण, स्नान और दान करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और दान करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है. ऐसे में आइए जानते हैं सावन अमावस्या की तिथि, साथ ही जानेंगे स्नान-दान का शुभ समय क्या रहेगा-
सावन अमावस्या कब की है?
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 12 अगस्त की रात 1 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी और 12 अगस्त को ही रात 11 बजकर 7 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर सावन अमावस्या 12 अगस्त को मनाई जाएगी. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है. अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान किया जा सकता है. अगर पवित्र नदी में नहीं जा सकते हैं, तो घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं.
स्नान-दान का शुभ समय- सावन अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 23 मिनट से 5 बजकर 6 मिनट तक रहेगा. इस समय स्नान और दान करना विशेष शुभ माना गया है.
- इसके अलावा पूजा और धार्मिक कार्यों के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है.
सावन अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है. मान्यता है कि श्रद्धा से किए गए इन कार्यों से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
सावन अमावस्या पर क्या दान करें?जरूरतमंद लोगों को अन्न, कपड़े, तिल, छाता और दक्षिणा का दान किया जा सकता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, दान-पुण्य से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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