Jantar Mantar Protest FAQ: जंतर मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा सवाल किया है. एक आंदोलन की मांग पर दिल्ली पुलिस के जवाब नहीं देने पर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित महाजन ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली के बीचों बीच प्रदर्शन के लिए जगह कैसे तय किया जा सकता है. इससे ऐसे हालात बन जाते हैं कि पूरा शहर को ही बंधक बना लिया है. मेरे विचार से यह शहर में नहीं होनी चाहिए. बता दें हाल ही में छात्रों के प्रदर्शन से जंतर-मंतर और आस पास का इलाका पूरी तरह से बंद कर दिया गया था. जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा था.
दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन अकसर जंतर-मंतर पर ही किये जाते हैं. जंतर-मंतर को 1,000 तक के प्रदर्शनकारियों के लिए एक तय धरना स्थल के रूप में अनुमति दी जाती है. ऐसे में आपके मन में सवाल होगा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना है तो किससे इजाजत मांगें और इसकी प्रक्रिया क्या होती है. तो चलिए आपके सारे सवालों के जवाब बताते हैं.
प्रदर्शन के लिए किससे अनुमति मांगी जाती है
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए डिप्टी कमिश्नर यानी DCP के कार्यालय में आवेदन देना होता है. प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से NOC लेना जरूरी होता है. राजनीतिक रैलियों, धरनों और प्रदर्शनों की अनुमति के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी मौजूद है. दिल्ली पुलिस के आधिकारिक वेबसाइट पर Lounge/NOC के विकल्प से आवेदन कर सकते हैं.
पुलिस किन आधार पर अनुमति देने से मना कर सकती है
दिल्ली पुलिस संवैधानिक प्रावधानों के तहत प्रदर्शन की अनुमति देने पर विचार कर सकती है. यह तब इनकार किया जा सकता है अगर प्रदर्शन के दौरान हिंसा, दंगे और शांति भंग होने का खतरा हो तो. इसके साथ ही मुख्य मार्ग पर VIP मूवमेंट वाले क्षेत्र में ट्रैफिक ठप होने की आशंका हो. इसके अलावा अगर उस क्षेत्र में धारा 144 यानी नई BNSS के मुताबिक धारा 163 लागू हो तो प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार किया जा सकता है.
प्रदर्शन से कितना समय पहले अनुमति मांगनी होती है
दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर के अनुसार प्रदर्शन करने से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना जरूरी होता है. अगर जंतर-मंतर पर जगह खाली हो तो कुछ विशेष परिस्थितियों में 10 दिन से कम समय में आवेदन पर विचार किया जा सकता है.
पुलिस कितने दिन तक फैसला टाल सकती है
पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति देने को लेकर फैसले का कोई निश्चित समय तय नहीं किया गया है. आवेदन मिलने के बाद पुलिस ट्रैफिक पुलिस और स्पेशल ब्रांच के इनपुट के बाद फैसला देना होता है. अगर पुलिस जानबूझकर फैसला टालती है तो प्रदर्शन करने वाले आयोजक कोर्ट जा सकते हैं. कोर्ट पुलिस को फैसला बताने का आदेश दे सकती है.
कितने लोगों के जुटने की अनुमति होती है
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और दिल्ली पुलिस के नियम के मुताबिक, जंतर-मंतर पर 1000 लोगों के जुटने की अनुमति होती है. इससे अधिक भीड़ जुटने की स्थिति में आयोजकों को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाती है.
प्रदर्शन के लिए क्या शर्ते होती हैं?
प्रदर्शन की अनुमति मिलने के बाद आयोजकों को कई शर्तों का पालन करना होता है. प्रदर्शन के जगह पर टेंट, लाउडस्पीकर लगाने के लिए अलग से परमिशन लेना होता है. किसी भी तरह का हथियार यहां तक की लाठी-डंडे का लाना भी मना होता है. प्रदर्शन केवल दिन के लिए मान्य होता है. प्रदर्शन में किसी तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए, साथ ही एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के लिए रास्ता नहीं रोका जा सकता है.
जंतर-मंतर के अलावा किन जगहों पर प्रदर्शन स्थल बनाने का हो रहा विचार
सुप्रीम कोर्ट भी इस बारे में विचार कर रहा है कि क्या जंतर-मंतर से इतर भी प्रदर्शन के लिए कोई स्थान हो सकता है. अगस्त 2026 में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. याचिका में रामलीला मैदान या शहर की सीमा पर किसी अन्य सुरक्षित मैदान के लिए सुझाव दिया है. बता दें, रामलीला मैदान में प्रदर्शन के लिए प्रतिदिन करीब 50 हजार रुपये का शुल्क देना पड़ता है.
पहले भी क्या सिर्फ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति थी, नहीं तो ये स्थिति कब बदली
जानकारी के मुताबित 1990 के दशक की शुरुआत तक दिल्ली में प्रदर्शन इंडिया गेट के पास स्थित बोट क्लब लॉन में किया जाता था. हालांकि साल 1993 में केंद्र सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से लुटियंस दिल्ली की सुरक्षा को देखते हुए बोट क्लब लॉन को प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया. इसके बाद जंतर-मंतर को आधिकारिक और एक मात्र धरना स्थल के रूप में मुख्य रूप से तय किया गया.
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