- दिल्ली हाई कोर्ट ने जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए रखने पर गंभीर सवाल उठाए हैं
- अदालत ने कहा कि दिल्ली के बीचों बीच किसी जगह को प्रदर्शन के लिए तय करना उचित नहीं है
- बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से शहर की व्यवस्था प्रभावित होती है और हालात बिगड़ते हैं
दिल्ली हाई कोर्ट ने जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए रखने पर सवाल उठाया है. अदालत ने कहा कि आखिर दिल्ली के बीचों बीच किसी जगह को प्रदर्शन के लिए कैसे तय किया जा सकता है. यहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से व्यवस्था खराब होती है और ऐसे हालात बन जाते हैं कि जैसे पूरे शहर को ही बंधक बना लिया गया है. जस्टिस अमित महाजन ने अपनी टिप्पणी में कहा, 'मेरे विचार से ऐसी चीजें शहर में नहीं होनी चाहिए. लेकिन यह फैसला तो सरकार को करना है. आखिर बेवजह शहर को बंधक क्यों बनने देना चाहिए?' जज ने यह टिप्पणी ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए की.
दलित क्रिश्चियन राइट्स कमेटी की मांग थी कि उन्हें जंतर मंतर पर 10 अगस्त को तीन घंटे प्रदर्शन करने की अनुमति दी जाए. याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि दिल्ली पुलिस से इस प्रदर्शन की अनुमति 9 जुलाई को मांगी गई थी, लेकिन तब से अब तक दिल्ली पुलिस ने कोई फैसला नहीं किया है. इस पर जस्टिस महाजन ने कहा, 'मैं निजी तौर पर कह रहा हूं कि आखिर शहर के अंदर ही प्रदर्शन क्यों होने चाहिए?' उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था संभालना तो पुलिस का मसला है. फिर भी हम दिल्ली पुलिस से कहते हैं कि वह शनिवार तक संगठन की ओर से प्रदर्शन की मांग पर फैसला करे.
जज अमित महाजन ने कहा कि मैं कोई आदेश पारित नहीं कर रहा हूं. लेकिन अथॉरिटीज को कम से कम यह जानकारी को याचिकाकर्ता को देनी ही चाहिए कि उनकी ओर से प्रदर्शन की अनुमति मांगे जाने पर क्या फैसला हुआ है. उन्हें प्रदर्शन करने की परमिशन रहेगी या फिर नहीं. अडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस में कुछ ही दिन बचे हैं और एहतियात के तौर पर कई पाबंदियां लगाई गई हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी इस बारे में विचार कर रहा है कि क्या जंतर-मंतर से इतर भी प्रदर्शन के लिए कोई स्थान हो सकता है.
किस मांग को लेकर जंतर मंतर पहुंचना चाहता है दलित संगठन
बता दें कि 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल न रहने दिया जाए. इसमें कहा गया था कि दिल्ली के बीचों बीच प्रदर्शन होने से अकसर शहर की व्यवस्था खराब होती है और जरूरी सेवाओं पर भी सीधा असर होता है. वहीं दलित क्रिश्चियन कमेटी के वकील ने कहा कि हमारे प्रदर्शन में सिर्फ 75 लोग ही रहेंगे और दिल्ली पुलिस कोई वैकल्पिक स्थान भी सुझा सकती है. अदालत ने इस पर कहा कि दिल्ली पुलिस शनिवार तक फैसला ले और याची को अपने निर्णय के बारे में सूचित करे. दरअसल संगठन की मांग है कि दलित ईसाइयों को भी अनुसूचित जाति का दर्जा मिलना चाहिए. इसी मांग को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी है.
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