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Ravish Ranjan Shukla Blog

'Ravish Ranjan Shukla Blog' - 44 News Result(s)
  • 'तुगलक' को आयोजक नहीं...तो क्या फिर अच्छे साहित्यिक सृजन की गुंजाइश बचेगी?

    'तुगलक' को आयोजक नहीं...तो क्या फिर अच्छे साहित्यिक सृजन की गुंजाइश बचेगी?

    ऐतिहासिक घटनाओं पर लिखे नाटकों के बिंब अगर दर्शकों को वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य से जोड़ दें, तो वो नाटक सफल माना जाता है. तुगलक नाटक में 13 दृश्य हैं और मोहम्मद बिन तुगलक के अलावा अज़ीज़ सबसे महत्वपूर्ण किरदार है.

  • अमरीका जाने और लौटने की चार दोस्तों की Viral बातचीत

    अमरीका जाने और लौटने की चार दोस्तों की Viral बातचीत

    भारत लौटने वाले डॉ रजत दांडेकर कहते हैं, अपने देश लौटने पर आपको दोस्त और रिश्तेदारों की मदद मिलती है, जिससे आप अपना पूरा ध्यान अपने काम पर लगा सकते हैं, लेकिन अमरीका में आप अपना व्यक्तिगत अनुभव अपने सहकर्मियों के साथ साझा नहीं कर सकते हैं.

  • कोविड से बचाव के लिए सभी पत्रकारों का वैक्सीनेशन क्यों नहीं?

    कोविड से बचाव के लिए सभी पत्रकारों का वैक्सीनेशन क्यों नहीं?

    पिछले साल 22 मार्च को प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 'पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों की तरह मीडिया की भी इस महामारी से लड़ने में अहम भूमिका होगी.' कोरोना काल में ज्यादातर पत्रकारों ने काम के दौरान अपने जान की बाजी लगा दी...अस्पताल से लेकर श्मशान तक और सड़क से लेकर खलिहान तक की रिपोर्टिंग की. आम लोगों की समस्या को सरकार के सामने लाए, लेकिन वैक्सीन आने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य कर्मी तो फ्रंटलाइन वर्कर माने गए लेकिन पत्रकारों को इस वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में सरकारी बाबुओं ने दूध में मक्खी की तरह बाहर कर दिया. जबकि इस दौरान देशभर में 50 से ज्यादा पत्रकारों की कोरोना से मौत हुई, सैकड़ों बीमार हुए...हजारों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा...लेकिन मरने के बाद करीब 40 पत्रकारों को 5 लाख की आर्थिक मदद देकर सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया.

  • कोरोना काल में गुपचुप तरीके से किराया बढ़ा रही है रेलवे

    कोरोना काल में गुपचुप तरीके से किराया बढ़ा रही है रेलवे

    13 फरवरी को दिल्ली से करीब 1200 किमी दूर रांची रेलवे स्टेशन पर जब एक शख्स ने प्लेटफार्म टिकट खरीदा तो 15 रुपए का टिकट उसे 30 रुपए में दिया गया. उसने जब काउंटर पर पूछा कि ये टिकट तो पहले 15 रुपए का था तो जवाब मिला है कल यानि 12 फरवरी से ये 30 रुपए का हो गया है.

  • टीवी मीडिया के गटर से निकला जमूरा पत्रकारिता का जिन्न

    टीवी मीडिया के गटर से निकला जमूरा पत्रकारिता का जिन्न

    पुलिस बेरीकेटिंग के नजदीक हम लोग लाइव की तैयारी कर रहे थे..सुबह के आठ बजने वाले थे...नर्म धूप धीरे-धीरे तीखी हो रही थी लेकिन हवा में अब भी  हल्की ठंड मौजूद थी. गांव जाने वाले रास्ते को पुलिस बेरीकेट से बंद कर दिया गया था और एक इंस्पेक्टर जीप के बोनट पर ड्यूटी बदलने का चार्ट बना रहा था. रात भर की ड्यूटी से हलकान पुलिस और PAC वालों के चेहरे तो मास्क में छिपे थे लेकिन कोई बेरीकेट तो कोई दीवार के सहारे टिका शरीर को थोड़ा आराम देने की कोशिश कर रहा था. असहाय सी दिखने वाली सबकी आंखें बस बिना उम्मीद मीडिया के कैमरे और रिपोर्टर पर टिकी थी. गोरिल्ला युद्ध की तरह अचानक लस्त पस्त पड़ी पुलिस फोर्स को देखकर एक महिला एंकर बेरीकेट खींचकर अंदर दाखिल हुई और लाइव में चीखते हुए.. ये देखिए किस तरह हमें रोकने की कोशिश हो रही है लेकिन हम इंसाफ दिलाकर रहेंगे...

  • दिल्ली हिंसा : GTB अस्पताल में वो 5 दिन....

    दिल्ली हिंसा : GTB अस्पताल में वो 5 दिन....

    इमरजेंसी के बाहर खड़े होकर लाइव करने के दौरान ऐंबुलेंस और पुलिस जिप्सी की आवाजाही बढ़ती जा रही थी. कोई अपनों को स्कूटी पर ला रहा था तो कोई ई रिक्शा से. कुछ लोगों को ऐंबुलेंस तो कुछ को पुलिस जिप्सी में ला रही थी. जिस दंगे को कुछ देर पहले मैं रुटीन बवाल मान रहा था अब दिल दहलाने वाली घटना में तेजी से बदलती जा रहा था.

  • दिल्ली में BJP की हार से चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर पर उठने लगे हैं सवाल

    दिल्ली में BJP की हार से चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर पर उठने लगे हैं सवाल

    दिल्ली के चुनाव नतीजे आने के बाद से ही अब तक न तो वो प्रदेश दफ्तर में दिखाई दिए और न ही इस करारी हार पर उनका कोई ट्वीट मिला. एक निजी टीवी इंटरव्यू में उन्होंने हार की ठीकरा कांग्रेस के गिरते वोट पर फोड़ा. हां, बीजेपी की हार का एक बड़ा कारण कांग्रेस का वोट बैंक 5 फीसदी से नीचे आना भी रहा. चुनाव त्रिकोणीय होने के बजाए बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच हुआ, जिसमें वोट परसेंटेज बढ़ने के बजाए बीजेपी को करारी हार मिली.

  • आखिर कौन हैं दिल्ली के कातिलाना प्रदूषण के गुनहगार?

    आखिर कौन हैं दिल्ली के कातिलाना प्रदूषण के गुनहगार?

    प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की डांट फटकार, लोगों की लानत- मलानत, ऑड-इवेन स्कूलों को बंद करने और हमारे-आपके जैसे पत्रकारों की प्रदूषण पर थोक खबरों के बावजूद प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है. 

  • क्या आज भी मौजूद हैं नमक के दरोगा?

    क्या आज भी मौजूद हैं नमक के दरोगा?

    मित्रों मुंशी प्रेमचंद की कहानी नमक का दरोगा का ये अंश है. इस कहानी को दोबारा सालों बाद इसलिए पढ़ी कि शनिवार को मैं किसी पैरामिलिट्री के अफसर के पास बैठा था उन्होंने मुझे बताया कि ISS यानी इंडियन साल्ट सर्विसेज यानी भारतीय नमक सेवा अब भी देश में मौजूद है. देशभर में करीब दर्जनभर अधिकारी हैं जो नमक की गुणवत्ता और उसकी सप्लाई पर नजर रखते हैं.

  • यूपी में कागज पर गठबंधन और जमीन पर बीजेपी क्यों मजबूत है?

    यूपी में कागज पर गठबंधन और जमीन पर बीजेपी क्यों मजबूत है?

    ये लोकसभा चुनाव खासा असमंजस से भरा है. लोकसभा चुनाव के दौरान मैंने बीजेपी या गठबंधन के कोर वोटरों से बात करने के बजाए नॉन यादव ओबीसी और नॉन जाटव दलितों से ज्यादा बात करने की कोशिश की है. इसमें पाया कि नॉन यादव ओबीसी का बड़ा वर्ग बीजेपी और खासतौर से मोदी से प्रभावित है.

'Ravish Ranjan Shukla Blog' - 44 News Result(s)
  • 'तुगलक' को आयोजक नहीं...तो क्या फिर अच्छे साहित्यिक सृजन की गुंजाइश बचेगी?

    'तुगलक' को आयोजक नहीं...तो क्या फिर अच्छे साहित्यिक सृजन की गुंजाइश बचेगी?

    ऐतिहासिक घटनाओं पर लिखे नाटकों के बिंब अगर दर्शकों को वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य से जोड़ दें, तो वो नाटक सफल माना जाता है. तुगलक नाटक में 13 दृश्य हैं और मोहम्मद बिन तुगलक के अलावा अज़ीज़ सबसे महत्वपूर्ण किरदार है.

  • अमरीका जाने और लौटने की चार दोस्तों की Viral बातचीत

    अमरीका जाने और लौटने की चार दोस्तों की Viral बातचीत

    भारत लौटने वाले डॉ रजत दांडेकर कहते हैं, अपने देश लौटने पर आपको दोस्त और रिश्तेदारों की मदद मिलती है, जिससे आप अपना पूरा ध्यान अपने काम पर लगा सकते हैं, लेकिन अमरीका में आप अपना व्यक्तिगत अनुभव अपने सहकर्मियों के साथ साझा नहीं कर सकते हैं.

  • कोविड से बचाव के लिए सभी पत्रकारों का वैक्सीनेशन क्यों नहीं?

    कोविड से बचाव के लिए सभी पत्रकारों का वैक्सीनेशन क्यों नहीं?

    पिछले साल 22 मार्च को प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 'पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों की तरह मीडिया की भी इस महामारी से लड़ने में अहम भूमिका होगी.' कोरोना काल में ज्यादातर पत्रकारों ने काम के दौरान अपने जान की बाजी लगा दी...अस्पताल से लेकर श्मशान तक और सड़क से लेकर खलिहान तक की रिपोर्टिंग की. आम लोगों की समस्या को सरकार के सामने लाए, लेकिन वैक्सीन आने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य कर्मी तो फ्रंटलाइन वर्कर माने गए लेकिन पत्रकारों को इस वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में सरकारी बाबुओं ने दूध में मक्खी की तरह बाहर कर दिया. जबकि इस दौरान देशभर में 50 से ज्यादा पत्रकारों की कोरोना से मौत हुई, सैकड़ों बीमार हुए...हजारों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा...लेकिन मरने के बाद करीब 40 पत्रकारों को 5 लाख की आर्थिक मदद देकर सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया.

  • कोरोना काल में गुपचुप तरीके से किराया बढ़ा रही है रेलवे

    कोरोना काल में गुपचुप तरीके से किराया बढ़ा रही है रेलवे

    13 फरवरी को दिल्ली से करीब 1200 किमी दूर रांची रेलवे स्टेशन पर जब एक शख्स ने प्लेटफार्म टिकट खरीदा तो 15 रुपए का टिकट उसे 30 रुपए में दिया गया. उसने जब काउंटर पर पूछा कि ये टिकट तो पहले 15 रुपए का था तो जवाब मिला है कल यानि 12 फरवरी से ये 30 रुपए का हो गया है.

  • टीवी मीडिया के गटर से निकला जमूरा पत्रकारिता का जिन्न

    टीवी मीडिया के गटर से निकला जमूरा पत्रकारिता का जिन्न

    पुलिस बेरीकेटिंग के नजदीक हम लोग लाइव की तैयारी कर रहे थे..सुबह के आठ बजने वाले थे...नर्म धूप धीरे-धीरे तीखी हो रही थी लेकिन हवा में अब भी  हल्की ठंड मौजूद थी. गांव जाने वाले रास्ते को पुलिस बेरीकेट से बंद कर दिया गया था और एक इंस्पेक्टर जीप के बोनट पर ड्यूटी बदलने का चार्ट बना रहा था. रात भर की ड्यूटी से हलकान पुलिस और PAC वालों के चेहरे तो मास्क में छिपे थे लेकिन कोई बेरीकेट तो कोई दीवार के सहारे टिका शरीर को थोड़ा आराम देने की कोशिश कर रहा था. असहाय सी दिखने वाली सबकी आंखें बस बिना उम्मीद मीडिया के कैमरे और रिपोर्टर पर टिकी थी. गोरिल्ला युद्ध की तरह अचानक लस्त पस्त पड़ी पुलिस फोर्स को देखकर एक महिला एंकर बेरीकेट खींचकर अंदर दाखिल हुई और लाइव में चीखते हुए.. ये देखिए किस तरह हमें रोकने की कोशिश हो रही है लेकिन हम इंसाफ दिलाकर रहेंगे...

  • दिल्ली हिंसा : GTB अस्पताल में वो 5 दिन....

    दिल्ली हिंसा : GTB अस्पताल में वो 5 दिन....

    इमरजेंसी के बाहर खड़े होकर लाइव करने के दौरान ऐंबुलेंस और पुलिस जिप्सी की आवाजाही बढ़ती जा रही थी. कोई अपनों को स्कूटी पर ला रहा था तो कोई ई रिक्शा से. कुछ लोगों को ऐंबुलेंस तो कुछ को पुलिस जिप्सी में ला रही थी. जिस दंगे को कुछ देर पहले मैं रुटीन बवाल मान रहा था अब दिल दहलाने वाली घटना में तेजी से बदलती जा रहा था.

  • दिल्ली में BJP की हार से चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर पर उठने लगे हैं सवाल

    दिल्ली में BJP की हार से चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर पर उठने लगे हैं सवाल

    दिल्ली के चुनाव नतीजे आने के बाद से ही अब तक न तो वो प्रदेश दफ्तर में दिखाई दिए और न ही इस करारी हार पर उनका कोई ट्वीट मिला. एक निजी टीवी इंटरव्यू में उन्होंने हार की ठीकरा कांग्रेस के गिरते वोट पर फोड़ा. हां, बीजेपी की हार का एक बड़ा कारण कांग्रेस का वोट बैंक 5 फीसदी से नीचे आना भी रहा. चुनाव त्रिकोणीय होने के बजाए बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच हुआ, जिसमें वोट परसेंटेज बढ़ने के बजाए बीजेपी को करारी हार मिली.

  • आखिर कौन हैं दिल्ली के कातिलाना प्रदूषण के गुनहगार?

    आखिर कौन हैं दिल्ली के कातिलाना प्रदूषण के गुनहगार?

    प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की डांट फटकार, लोगों की लानत- मलानत, ऑड-इवेन स्कूलों को बंद करने और हमारे-आपके जैसे पत्रकारों की प्रदूषण पर थोक खबरों के बावजूद प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है. 

  • क्या आज भी मौजूद हैं नमक के दरोगा?

    क्या आज भी मौजूद हैं नमक के दरोगा?

    मित्रों मुंशी प्रेमचंद की कहानी नमक का दरोगा का ये अंश है. इस कहानी को दोबारा सालों बाद इसलिए पढ़ी कि शनिवार को मैं किसी पैरामिलिट्री के अफसर के पास बैठा था उन्होंने मुझे बताया कि ISS यानी इंडियन साल्ट सर्विसेज यानी भारतीय नमक सेवा अब भी देश में मौजूद है. देशभर में करीब दर्जनभर अधिकारी हैं जो नमक की गुणवत्ता और उसकी सप्लाई पर नजर रखते हैं.

  • यूपी में कागज पर गठबंधन और जमीन पर बीजेपी क्यों मजबूत है?

    यूपी में कागज पर गठबंधन और जमीन पर बीजेपी क्यों मजबूत है?

    ये लोकसभा चुनाव खासा असमंजस से भरा है. लोकसभा चुनाव के दौरान मैंने बीजेपी या गठबंधन के कोर वोटरों से बात करने के बजाए नॉन यादव ओबीसी और नॉन जाटव दलितों से ज्यादा बात करने की कोशिश की है. इसमें पाया कि नॉन यादव ओबीसी का बड़ा वर्ग बीजेपी और खासतौर से मोदी से प्रभावित है.