Ravish Kumar Journalism
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बिहार के स्कूली छात्रों ने किया कमाल! निकालते हैं अपना ख़ुद का अख़बार, हर ख़बर लिखते हैं
- Friday December 2, 2022
- Written by: बिक्रम कुमार सिंह
ट्वीट में प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये बच्चे बिहार के बांका जिले के रहने वाले हैं. ये अपना एक अखबरा निकालते हैं. साथ ही साथ रोज छात्र इस अखबार के संपादक भी बनते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ये हैंडरिटेन अखबार हैं. इसमें सभी महत्वपूर्ण खबरें लिखी जाती हैं.
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जज को किसने दी धमकी, क्यों खेल हो गया है जेल...
- Tuesday April 18, 2023
- रवीश कुमार
मोहम्मद ज़ुबैर एक ही तरह के दो मामलों में जेल में हैं, उसी तरह के एक मामले में ज़मानत मिल गई है. क्या यह राहत है? सुप्रीम कोर्ट ने जब सीतापुर केस में ज़ुबैर को ज़मानत दी तब चैनलों पर फ्लैश होने लगा कि मोहम्मद को सीतापुर केस में राहत.क्या इस केस में राहत का इस्तेमाल किया जा सकता है ?
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जेल से जाएगा पत्रकारिता का रास्ता...?
- Tuesday July 5, 2022
- रवीश कुमार
1989 में हिन्दी के महान साहित्यकार निर्मल वर्मा की एक कहानी प्रकाशित हुई. रात का रिपोर्टर. वक्त मिले तो इस कहानी को पढ़िएगा, आपको आज के उन पत्रकारों की मानसिक हालत दिख जाएगी जो गिनती के दस बीस रह गए हैं और पत्रकारिता कर रहे हैं.
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कैसे बनती है ख़बर, जो ख़बर नहीं है
- Thursday May 19, 2022
- रवीश कुमार
कई बार टीवी की रिपोर्टिंग में किसी ग़रीब की कहानी उसके आंसुओं के साथ भावुक बना देती है, लेकिन उसमें ग़रीबी के मूल कारणों का ज़िक्र नहीं होता, जिसकी जवाबदेही होनी चाहिए वह सरकार नहीं होती है, उसकी नीतियां नहीं होती हैं. इस तरह से जहां आपकी नज़र होनी चाहिए, वहां से हटाकर रोते हुए ग़रीब पर टिका दी जाती है ताकि उसकी ग़रीबी नीतियों का नतीजा न लगे, उसकी अपनी नाकामी लगे.
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महंगाई जीने लायक नहीं छोड़ रही, ईमानदार पत्रकारिता मरती जा रही है...
- Friday May 6, 2022
- रवीश कुमार
प्रेस की स्वतंत्रता की रैकिंग भारत की सरकार भले न स्वीकार करे कि विश्व गुरु के यहां प्रेस की स्वतंत्रता दुनिया में 150 वें नंबर पर है, लेकिन एस्टोनिया नाम के देश ने खंडन नहीं किया है, जिसे प्रेस की स्वतंत्रता की रैकिंग में दुनिया में चौथा स्थान प्राप्त है.
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खोजी ही नहीं, पूरी पत्रकारिता ग़ायब है, कैमरे में सरकार है, मगर सवाल गायब हैं
- Friday December 17, 2021
- रवीश कुमार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात साल में एक भी खुली प्रेस कांफ्रेंस नहीं की है. काशी कवरेज के समय दो दिनों तक लगातार टीवी पर रहते हैं, लेकिन उनके एक सवाल जवाब नहीं होता है. मीडिया में रहने के बाद भी मीडिया के सवालों से इतने दूर.
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सूत्रों के अनुसार राजनीतिक पत्रकारिता का अंत हो चुका है
- Tuesday September 21, 2021
- रवीश कुमार
ख़बरों की दुनिया में सूत्रों को लेकर भूचाल आया हुआ है या तो सूत्र बदल गए हैं या फिर पत्रकार पत्रकार नहीं रहे. सवाल है कि ग़लत जानकारी देने वाले पत्रकार ग़लत जानकारी देने वाले सूत्रों के साथ क्या करते हैं. क्या ग़लत जानकारी देने के बाद भी उन सूत्रों के संपर्क में रहते हैं या नए सूत्र बना लेते हैं जो नए सिरे से ग़लत जानकारी दे सके. एक पाठक और दर्शक के लिए सूत्रों के हवाले से आने वाली ख़बरों और पत्रकारिता के संकट को समझना ज़रूरी हो जाता है ताकि पता रहे कि ख़बरों के लिए जिन ज़रूरी तत्वों पर आप भरोसा करते हैं वह भरोसे के लायक है भी या नहीं.
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आर्थिक संकट से घिरे देश में विपक्ष और पत्रकारिता की निगरानी करने की खबर भयानक
- Tuesday July 20, 2021
- रवीश कुमार
पेगसस जासूसी कांड में पत्रकारों के अलावा अब विपक्ष के नेताओं के भी नाम आ गए हैं. दि वायर ने रविवार के बाद आज एक और रिपोर्ट छापी है जिसमें इसकी पुष्टि की गई है कि जासूसी के लिए 300 फोन नंबरों की एक सूची बनाई गई थी जिसमें राहुल गांधी के भी दो नंबर शामिल हैं. इसी सूची में राहुल से जुड़े 9 और नंबर डाले गए थे लेकिन राहुल ने नंबर बदल लिया था. राहुल ने वायर से कहा है कि उनके व्हाट्सऐप पर अतीत में संदिग्ध मैसेज आए हैं. जासूसी के लिए ही ऐसा किया जाता है. राहुल ने वायर से कहा है कि “यदि आपकी जानकारी सही है, तो इस स्तर की निगरानी व्यक्तियों की गोपनीयता पर हमले से आगे की बात है. यह हमारे देश की लोकतांत्रिक नींव पर हमला है. इसकी गहन जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें सजा दी जाए.” राहुल के अलावा उनके सहयोगी अलंकार सवाई, सचिव राव का नाम भी सूची में है. राहुल गांधी के सात गैर राजनीतिक दोस्तों के भी नाम हैं.
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सिर्फ उम्मीद से पत्रकारिता नहीं चलती है
- Sunday June 7, 2020
- रवीश कुमार
पत्रकारिता बिनाका गीतमाला नहीं है. फरमाइश की चिट्ठी लिख दी और गीत बज गया. गीतमाला चलाने के लिए भी पैसे और लोगों की ज़रूरत तो होती होगी. मैं हर दिन ऐसे मैसेज देखता रहता हूं. आपसे उम्मीद है. लेकिन पत्रकारिता का सिस्टम सिर्फ उम्मीद से नहीं चलता. उसका सिस्टम बनता है पैसे से और पत्रकारिता की प्राथमिकता से. कई बार जिन संस्थानों के पास पैसे होते हैं वहां प्राथमिकता नहीं होती, लेकिन जहां प्राथमिकता होती है वहां पैसे नहीं होते. कोरोना के संकट में यह स्थिति और भयावह हो गई है.
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बिना इंटरनेट कश्मीर में पत्रकारिता सूनी और डीयू में कैसे जी रहे हैं शिक्षक
- Wednesday December 4, 2019
- रवीश कुमार
कश्मीर में आम लोगों के लिए 120 दिनों से इंटरनेट बंद है. पांच अगस्त से इंटरनेट बंद है. कश्मीर टाइम्स की अनुराधा भसीन ने दस अगस्त को सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि बगैर इंटरनेट के पत्रकार अपना मूल काम नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें छूट मिलनी चाहिए. इस केस को लेकर पहली सुनवाई 16 अगस्त हुई और नवंबर के महीने तक चली. बहस पूरी हो चुकी है और फैसले का इंतज़ार है. मगर बगैर इंटरनेट के कश्मीर के पत्रकार क्या कर रहे हैं. वे कैसे खबरों की बैकग्राउंड चेकिंग के लिए तथ्यों का पता लगा रहे हैं. दुनिया में यह अदभुत प्रयोग हो रहा है. न्यूयार्कर को इसी पर रिसर्च करना चाहिए कि बगैर इंटरनेट के अखबार छप सकते हैं. कश्मीर के न्यूज़ रूम में इंटरनेट बंद है लेकिन सरकार ने पत्रकारों के लिए एक मीडिया सुविधा केंद्र बनाया है.
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बिहार के स्कूली छात्रों ने किया कमाल! निकालते हैं अपना ख़ुद का अख़बार, हर ख़बर लिखते हैं
- Friday December 2, 2022
- Written by: बिक्रम कुमार सिंह
ट्वीट में प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये बच्चे बिहार के बांका जिले के रहने वाले हैं. ये अपना एक अखबरा निकालते हैं. साथ ही साथ रोज छात्र इस अखबार के संपादक भी बनते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ये हैंडरिटेन अखबार हैं. इसमें सभी महत्वपूर्ण खबरें लिखी जाती हैं.
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जज को किसने दी धमकी, क्यों खेल हो गया है जेल...
- Tuesday April 18, 2023
- रवीश कुमार
मोहम्मद ज़ुबैर एक ही तरह के दो मामलों में जेल में हैं, उसी तरह के एक मामले में ज़मानत मिल गई है. क्या यह राहत है? सुप्रीम कोर्ट ने जब सीतापुर केस में ज़ुबैर को ज़मानत दी तब चैनलों पर फ्लैश होने लगा कि मोहम्मद को सीतापुर केस में राहत.क्या इस केस में राहत का इस्तेमाल किया जा सकता है ?
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जेल से जाएगा पत्रकारिता का रास्ता...?
- Tuesday July 5, 2022
- रवीश कुमार
1989 में हिन्दी के महान साहित्यकार निर्मल वर्मा की एक कहानी प्रकाशित हुई. रात का रिपोर्टर. वक्त मिले तो इस कहानी को पढ़िएगा, आपको आज के उन पत्रकारों की मानसिक हालत दिख जाएगी जो गिनती के दस बीस रह गए हैं और पत्रकारिता कर रहे हैं.
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कैसे बनती है ख़बर, जो ख़बर नहीं है
- Thursday May 19, 2022
- रवीश कुमार
कई बार टीवी की रिपोर्टिंग में किसी ग़रीब की कहानी उसके आंसुओं के साथ भावुक बना देती है, लेकिन उसमें ग़रीबी के मूल कारणों का ज़िक्र नहीं होता, जिसकी जवाबदेही होनी चाहिए वह सरकार नहीं होती है, उसकी नीतियां नहीं होती हैं. इस तरह से जहां आपकी नज़र होनी चाहिए, वहां से हटाकर रोते हुए ग़रीब पर टिका दी जाती है ताकि उसकी ग़रीबी नीतियों का नतीजा न लगे, उसकी अपनी नाकामी लगे.
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महंगाई जीने लायक नहीं छोड़ रही, ईमानदार पत्रकारिता मरती जा रही है...
- Friday May 6, 2022
- रवीश कुमार
प्रेस की स्वतंत्रता की रैकिंग भारत की सरकार भले न स्वीकार करे कि विश्व गुरु के यहां प्रेस की स्वतंत्रता दुनिया में 150 वें नंबर पर है, लेकिन एस्टोनिया नाम के देश ने खंडन नहीं किया है, जिसे प्रेस की स्वतंत्रता की रैकिंग में दुनिया में चौथा स्थान प्राप्त है.
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खोजी ही नहीं, पूरी पत्रकारिता ग़ायब है, कैमरे में सरकार है, मगर सवाल गायब हैं
- Friday December 17, 2021
- रवीश कुमार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात साल में एक भी खुली प्रेस कांफ्रेंस नहीं की है. काशी कवरेज के समय दो दिनों तक लगातार टीवी पर रहते हैं, लेकिन उनके एक सवाल जवाब नहीं होता है. मीडिया में रहने के बाद भी मीडिया के सवालों से इतने दूर.
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सूत्रों के अनुसार राजनीतिक पत्रकारिता का अंत हो चुका है
- Tuesday September 21, 2021
- रवीश कुमार
ख़बरों की दुनिया में सूत्रों को लेकर भूचाल आया हुआ है या तो सूत्र बदल गए हैं या फिर पत्रकार पत्रकार नहीं रहे. सवाल है कि ग़लत जानकारी देने वाले पत्रकार ग़लत जानकारी देने वाले सूत्रों के साथ क्या करते हैं. क्या ग़लत जानकारी देने के बाद भी उन सूत्रों के संपर्क में रहते हैं या नए सूत्र बना लेते हैं जो नए सिरे से ग़लत जानकारी दे सके. एक पाठक और दर्शक के लिए सूत्रों के हवाले से आने वाली ख़बरों और पत्रकारिता के संकट को समझना ज़रूरी हो जाता है ताकि पता रहे कि ख़बरों के लिए जिन ज़रूरी तत्वों पर आप भरोसा करते हैं वह भरोसे के लायक है भी या नहीं.
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आर्थिक संकट से घिरे देश में विपक्ष और पत्रकारिता की निगरानी करने की खबर भयानक
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पेगसस जासूसी कांड में पत्रकारों के अलावा अब विपक्ष के नेताओं के भी नाम आ गए हैं. दि वायर ने रविवार के बाद आज एक और रिपोर्ट छापी है जिसमें इसकी पुष्टि की गई है कि जासूसी के लिए 300 फोन नंबरों की एक सूची बनाई गई थी जिसमें राहुल गांधी के भी दो नंबर शामिल हैं. इसी सूची में राहुल से जुड़े 9 और नंबर डाले गए थे लेकिन राहुल ने नंबर बदल लिया था. राहुल ने वायर से कहा है कि उनके व्हाट्सऐप पर अतीत में संदिग्ध मैसेज आए हैं. जासूसी के लिए ही ऐसा किया जाता है. राहुल ने वायर से कहा है कि “यदि आपकी जानकारी सही है, तो इस स्तर की निगरानी व्यक्तियों की गोपनीयता पर हमले से आगे की बात है. यह हमारे देश की लोकतांत्रिक नींव पर हमला है. इसकी गहन जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें सजा दी जाए.” राहुल के अलावा उनके सहयोगी अलंकार सवाई, सचिव राव का नाम भी सूची में है. राहुल गांधी के सात गैर राजनीतिक दोस्तों के भी नाम हैं.
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सिर्फ उम्मीद से पत्रकारिता नहीं चलती है
- Sunday June 7, 2020
- रवीश कुमार
पत्रकारिता बिनाका गीतमाला नहीं है. फरमाइश की चिट्ठी लिख दी और गीत बज गया. गीतमाला चलाने के लिए भी पैसे और लोगों की ज़रूरत तो होती होगी. मैं हर दिन ऐसे मैसेज देखता रहता हूं. आपसे उम्मीद है. लेकिन पत्रकारिता का सिस्टम सिर्फ उम्मीद से नहीं चलता. उसका सिस्टम बनता है पैसे से और पत्रकारिता की प्राथमिकता से. कई बार जिन संस्थानों के पास पैसे होते हैं वहां प्राथमिकता नहीं होती, लेकिन जहां प्राथमिकता होती है वहां पैसे नहीं होते. कोरोना के संकट में यह स्थिति और भयावह हो गई है.
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बिना इंटरनेट कश्मीर में पत्रकारिता सूनी और डीयू में कैसे जी रहे हैं शिक्षक
- Wednesday December 4, 2019
- रवीश कुमार
कश्मीर में आम लोगों के लिए 120 दिनों से इंटरनेट बंद है. पांच अगस्त से इंटरनेट बंद है. कश्मीर टाइम्स की अनुराधा भसीन ने दस अगस्त को सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि बगैर इंटरनेट के पत्रकार अपना मूल काम नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें छूट मिलनी चाहिए. इस केस को लेकर पहली सुनवाई 16 अगस्त हुई और नवंबर के महीने तक चली. बहस पूरी हो चुकी है और फैसले का इंतज़ार है. मगर बगैर इंटरनेट के कश्मीर के पत्रकार क्या कर रहे हैं. वे कैसे खबरों की बैकग्राउंड चेकिंग के लिए तथ्यों का पता लगा रहे हैं. दुनिया में यह अदभुत प्रयोग हो रहा है. न्यूयार्कर को इसी पर रिसर्च करना चाहिए कि बगैर इंटरनेट के अखबार छप सकते हैं. कश्मीर के न्यूज़ रूम में इंटरनेट बंद है लेकिन सरकार ने पत्रकारों के लिए एक मीडिया सुविधा केंद्र बनाया है.
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