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हर वेबसाइट के लिए देना होगा अलग चार्ज? Net Neutrality का बदल सकता है नियम, Jio-Airtel-Vi की हो जाएगी मौज!

भारत सरकार 5G Network Slicing को देखते हुए Net Neutrality नियमों की समीक्षा कर सकती है. जानिए इसका क्या मतलब है, आम यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा और Airtel-Jio की क्या तैयारी है.

हर वेबसाइट के लिए देना होगा अलग चार्ज? Net Neutrality का बदल सकता है नियम, Jio-Airtel-Vi की हो जाएगी मौज!
  • सरकार Net Neutrality नियमों की समीक्षा कर सकती है
  • 5G Network Slicing से बदल सकती हैं इंटरनेट सर्विस
  • TRAI से सरकार ने मांगे नए नियमों पर सुझाव

भारत सरकार जल्द ही Net Neutrality से जुड़े नियमों का रिव्यू कर सकती है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि टेलीकॉम कंपनियों को क्लाउड गेमिंग, हेल्थकेयर, Autonomous Vehicles और स्मार्ट फैक्ट्री जैसी स्पेशल सर्विस के लिए अलग इंटरनेट स्पीड और कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की अनुमति दी जाए. इसके साथ ही कंपनियां ऐसी सर्विस के लिए अलग शुल्क भी ले सकेंगी. माना जा रहा है कि 5G तकनीक और Network Slicing के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए मौजूदा नियमों में बदलाव या स्पष्टीकरण की जरूरत महसूस की जा रही है.

पहले समझें Net Neutrality

Net Neutrality का मतलब है कि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) सभी इंटरनेट ट्रैफिक के साथ समान व्यवहार करें. यानी किसी वेबसाइट, ऐप या ऑनलाइन सर्विस को जानबूझकर तेज, स्लो या प्राथमिकता नहीं दी जा सकती. इसको ऐसे समझें, मान लीजिए आपने XYZ कंपनी का कनेक्शन ले रखा है. आप किसी खास वेबसाइट ABC को एक्सेस करना चाह रहे हैं. लेकिन, XYZ ने उस साइट को स्लो कर रखा है क्योंकि हो सकता है उसने XYZ की खास शर्त को नहीं माना होगा. जबकि एक दूसरी साइट है MNO, वह जल्दी ओपन हो जाती है क्योंकि उसका XYZ के साथ करार है. Net Neutrality इस चीज को रोकता है. Net Neutrality के अनुसार, अगर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर ने यूजर्स से पैसे लिए तो यूजर्स के लिए सभी साइट बराबर होनी चाहिए.

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भारत में Net Neutrality के नियम साल 2018 में लागू किए गए थे. इन नियमों का उद्देश्य सभी यूजर्स के लिए खुला और समान इंटरनेट सुनिश्चित करना था. हालांकि 5G तकनीक आने के बाद नई तरह की सर्विस के कारण इन नियमों को लेकर कुछ सवाल खड़े हुए हैं.

सरकार कर रही है नियमों की समीक्षा

रिपोर्ट के मुताबिक, 5G में मिलने वाली Network Slicing तकनीक ने मौजूदा Net Neutrality नियमों की बाउंड्री सामने ला दी हैं.

सरकार का मानना है कि मौजूदा नियमों में यह स्पष्ट नहीं है कि क्लाउड गेमिंग, Industrial Automation, हेल्थकेयर और Autonomous Vehicles जैसी स्पेशळ सेवाओं के लिए अलग नेटवर्क उपलब्ध कराया जा सकता है या नहीं.

इसी वजह से सरकार ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) से इस मामले में सुझाव मांगे हैं. TRAI से कहा गया है कि वह मौजूदा नियमों की समीक्षा करे और बताए कि इनमें किस तरह के बदलाव या स्पष्टीकरण की जरूरत है.

क्या आम इंटरनेट यूजर्स पर पड़ेगा असर?

रिपोर्ट के अनुसार सरकार का कहना है कि खुले इंटरनेट के मूल सिद्धांत में कोई बदलाव नहीं होगा. यानी किसी खास वेबसाइट, ऐप या ऑनलाइन कंटेंट को पैसे लेकर प्राथमिकता देने की अनुमति नहीं होगी. सरकार ने साफ किया है कि इंटरनेट सभी के लिए पहले की तरह खुला रहेगा और किसी तरह का "Walled Garden" मॉडल लागू नहीं किया जाएगा.

अब समझें 5G Network Slicing

5G Network Slicing एक ऐसी तकनीक है, जिसमें एक ही फिजिकल 5G नेटवर्क को कई Virtual Networks में बांटा जा सकता है.

हर वर्चुअल नेटवर्क को किसी खास जरूरत के हिसाब से तैयार किया जाता है. उदाहरण के तौर पर Healthcare, Robotics, Industrial Automation, Autonomous Vehicles और Cloud Gaming जैसी सर्विस को कम लेटेंसी और अधिक बैंडविथ वाला अलग नेटवर्क मिल सकता है, जबकि सामान्य इंटरनेट ब्राउजिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग दूसरे नेटवर्क स्लाइस पर चलती रहेगी.

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रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल इस तकनीक पर कोई स्पष्ट रोक नहीं है, लेकिन अगर इसका इस्तेमाल किसी खास सेवा को बेहतर इंटरनेट देने के लिए किया जाता है, तो इसे मौजूदा Net Neutrality नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है.

Airtel और Jio पहले से कर रहे हैं तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार Bharti Airtel पहले ही 5G Network Slicing पर आधारित एक सर्विस शुरू कर चुका है, जिसमें कुछ पोस्टपेड ग्राहकों को बेहतर स्पीड और कम Latency दी जा रही है. फिलहाल इस सेवा की समीक्षा डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (DoT) और TRAI कर रहे हैं. वहीं Reliance Jio ने भी घोषणा की है कि वह 5G Network Slicing का इस्तेमाल भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों में नेटवर्क क्षमता और कवरेज बेहतर बनाने के लिए करेगा.

दूसरे देशों में क्या हो रहा है?

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कई देश भी Net Neutrality नियमों की समीक्षा कर रहे हैं. यूरोपीय संघ के कई देशों में इस विषय पर विचार चल रहा है. वहीं अमेरिका में संघीय स्तर पर Net Neutrality नियम हटाए जा चुके हैं, हालांकि कुछ राज्यों में अब भी अपने अलग नियम लागू हैं. इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया और चीन जैसे देशों में 5G Network Slicing का इस्तेमाल अलग-अलग स्पेशल सर्विस के लिए पहले से किया जा रहा है.

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