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बच्चों के दिमाग से खिलवाड़ बंद! भारी हंगामे के बाद Google ने स्कूलों में बंद किया AI, जानें कारण

विवादों के बीच Google ने स्कूली बच्चों के लिए अपने AI टूल्स को डिफॉल्ट रूप से बंद करने का बड़ा फैसला लिया है. अब स्कूल एडमिनिस्ट्रेटर ही तय कर पाएंगे कि बच्चों को Gemini और Search जैसी सुविधाओं का एक्सेस देना है या नहीं.

बच्चों के दिमाग से खिलवाड़ बंद! भारी हंगामे के बाद Google ने स्कूलों में बंद किया AI, जानें कारण
Google का बड़ा फैसला
Unsplash

Google ने आलोचनाओं से घिरने के बाद स्कूली बच्चों के लिए अपने AI टूल्स को डिफॉल्ट रूप से स्विच ऑफ करने का फैसला लिया है. दरअसल, कंपनी पर अमेरिकी स्कूलों में AI फीचर्स को जबरन बढ़ावा देने के आरोप लग रहे थे, जबकि स्कूल अभी भी इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्लासरूम में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कैसे किया जाए.
आपको बता दें कि अमेरिकी स्कूलों में एजुकेशनल टेक्नोलॉजी के मामले में Google का एकछत्र राज है. देश भर के क्लासरूम्स में इसके एजुकेशनल ऐप्स जैसे Gmail, Docs और Classroom प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है. इसके साथ ही अमेरिकी स्कूलों द्वारा बच्चों को दिए जाने वाले गैजेट्स में गूगल के सस्ते Chromebook लैपटॉप सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं.

ब्लॉग पोस्ट में की गई घोषणा के मुताबिक, अब नर्सरी से 12वीं क्लास के स्टूडेंट अकाउंट्स के लिए Gemini, Gemini Notebook, Gemini in Classroom और Search तब तक बंद रहेंगे, जब तक कि स्कूल एडमिनिस्ट्रेटर खुद इन्हें ऑन नहीं कर देते हैं. कंपनी ने बताया कि ये नए कंट्रोल्स अमेरिका से शुरू होकर पूरी दुनिया में लागू किए जाएंगे, हालांकि इसके लिए अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है.

बिना AI फीचर्स के नहीं मिलेगा Google Search का एक्सेस

इस नए बदलाव का एक सबसे बड़ा असर ये होगा कि अब स्कूल बिना AI फीचर्स के बच्चों को Google Search का एक्सेस नहीं दे पाएंगे. गूगल के एजुकेशन वाइस प्रेसिडेंट क्रिस फिलिप्स ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि सर्च और AI अब एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़े हुए हैं क्योंकि गूगल के सर्च इंजन में अब AI फीचर्स इन-बिल्ट हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि अगर कोई स्कूल AI को पूरी तरह से बैन करता है, तो वहां के स्टूडेंट्स गूगल सर्च का इस्तेमाल भी नहीं कर पाएंगे. सर्च खोलने पर उन्हें अपने स्कूल की तरफ से एक मैसेज दिखाई देगा कि ये सर्विस उपलब्ध नहीं है.

गूगल के इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है. न्यूयॉर्क के मेयर Zohran Mamdani ने एक्स (X) पर गूगल पर निशाना साधते हुए लिखा कि गूगल अपनी मोनोपॉली (एकछत्र राज) का इस्तेमाल कर हमारे पब्लिक स्कूलों में जबरन AI थोपने की कोशिश कर रहा है. किसी भी कॉर्पोरेशन के पास यह तय करने की ताकत नहीं होनी चाहिए कि हम अपने बच्चों को कैसे पढ़ाएं.

15 करोड़ से ज्यादा स्टूडेंट्स करते हैं Google Classroom का इस्तेमाल

आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में 15 करोड़ से ज्यादा स्टूडेंट्स Google Classroom का इस्तेमाल करते हैं. पिछले महीने ही अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और जोश हॉले ने गूगल को पत्र लिखकर पूछा था कि स्कूल डिवाइसेज पर AI फीचर्स को डिफॉल्ट रूप से ऑन क्यों रखा गया था. इससे पहले अगस्त में गूगल ने हर उम्र के बच्चों के लिए क्लासरूम में अपना Gemini चैटबॉट खोल दिया था, जो स्टूडेंट्स को उनके असाइनमेंट्स के हिसाब से क्विज और फ्लैशकार्ड्स बनाकर मदद करता था.

इस बीच न्यूयॉर्क और लॉस एंजिल्स दोनों ने ही सितंबर में स्कूल डिवाइसेज पर AI टूल्स के इस्तेमाल को लिमिट करने की योजना बनाई थी. न्यूयॉर्क सिटी पब्लिक स्कूल्स (NYCPS) के स्पोकर्सपर्सन ने बताया कि उनके छात्रों के क्रोमबुक्स पर Gemini चैटबॉट और AI मोड पहले से ही डिसेबल हैं और उन्होंने गूगल से सर्च रिजल्ट्स में दिखने वाले AI Overview को भी स्टूडेंट्स के लिए बंद करने का अनुरोध किया है.

इस पूरे विवाद पर सफाई देते हुए गूगल ने एक्स पर लिखा कि इस बदलाव से स्कूलों को AI के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा विकल्प मिलेंगे, न कि कम. हम जानते हैं कि स्टूडेंट्स द्वारा स्कूल के काम में शॉर्टकट अपनाने के लिए AI के इस्तेमाल को लेकर चिंताएं हैं, और स्कूलों ने हमसे इस पर कंट्रोल मांगा था.

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