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Cognizant का 'कॉस्ट-कटिंग' प्लान: 15,000 कर्मचारियों की विदाई की तैयारी, सबसे ज्यादा असर भारत पर

Cognizant के CEO Ravi Kumar S ने बताया कि कंपनी अब अपने वर्कफोर्स मॉडल में बदलाव कर रही है. अब कंपनी 'डिजिटल लेबर' और 'ह्यूमन लेबर' को मिलाकर काम करेगी.

Cognizant का 'कॉस्ट-कटिंग' प्लान: 15,000 कर्मचारियों की विदाई की तैयारी, सबसे ज्यादा असर भारत पर
Cognizant में कुल 3.5 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें से 2.5 लाख से ज्यादा भारत में हैं.

IT सेक्टर की बड़ी कंपनी Cognizant अपने वर्कफोर्स में बड़ी कटौती कर रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी दुनिया भर में 12,000 से 15,000 कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है, जिसमें सबसे ज्यादा असर भारत में देखने को मिल सकता है. कंपनी ने 'Project Leap' नाम का नया प्लान शुरू किया है, जिसके तहत यह बदलाव किए जा रहे हैं.

क्यों हो रही है छंटनी?

Cognizant ने बताया कि इस नए प्रोजेक्ट के तहत उसे 230 मिलियन डॉलर से 320 मिलियन डॉलर तक का खर्च उठाना पड़ सकता है. इसमें से 200 मिलियन डॉलर से 270 मिलियन डॉलर तक की रकम कर्मचारियों को दिए जाने वाले सेवरेंस (मुआवजा) और अन्य खर्चों पर जाएगी. 

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भारत में क्यों ज्यादा असर?

Cognizant में कुल 3.5 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें से 2.5 लाख से ज्यादा भारत में हैं. यही कारण है कि छंटनी का सबसे ज्यादा असर भारत में पड़ने की संभावना है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनियां अब पुराने 'पिरामिड मॉडल' से हट रही हैं, जिसमें ज्यादा फ्रेशर्स और कम सीनियर कर्मचारी होते थे. अब कंपनियां कम लोगों के साथ ज्यादा काम करना चाहती हैं और ट्रेनिंग पर ज्यादा खर्च नहीं करना चाहतीं.

छंटनी का अनुमान

यह अनुमान कर्मचारियों की सैलरी और सेवरेंस के आधार पर लगाया गया है. भारत में औसतन एक कर्मचारी की सालाना सैलरी करीब 15 लाख रुपये मानी गई है. अगर कंपनी 6 महीने का सेवरेंस देती है, तो एक कर्मचारी पर करीब 7.5 लाख रुपये खर्च होंगे. इस हिसाब से भारत में करीब 12,000 से 13,000 कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है.

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वहीं, अमेरिका जैसे देशों में सैलरी ज्यादा होती है, जहां एक कर्मचारी की औसत सैलरी करीब 1 लाख डॉलर होती है. ऐसे में वहां कम कर्मचारियों की छंटनी होगी, क्योंकि एक कर्मचारी पर ज्यादा खर्च आता है.

कंपनी की रणनीति में बदलाव

Cognizant के CEO Ravi Kumar S ने बताया कि कंपनी अब अपने वर्कफोर्स मॉडल में बदलाव कर रही है. अब कंपनी 'डिजिटल लेबर' और 'ह्यूमन लेबर' को मिलाकर काम करेगी. इसका मतलब है कि AI और ऑटोमेशन का ज्यादा इस्तेमाल होगा, जिससे कम लोगों से ज्यादा काम कराया जा सकेगा.

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आईटी सेक्टर में बढ़ रही छंटनी

यह सिर्फ Cognizant की बात नहीं है, बल्कि पूरे आईटी सेक्टर में ऐसा ट्रेंड देखने को मिल रहा है. कंपनियां खर्च कम करने और मुनाफा बढ़ाने के लिए ऑटोमेशन और AI का सहारा ले रही हैं. पहले भी TCS, Accenture, HCLTech और Oracle जैसी कंपनियां भी छंटनी कर चुकी हैं.

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