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6 कमरों का लाइसेंस, 25 कमरे बने, तहखाने में होटल; कानून की धज्जियां उड़ाते होटलों पर NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट

दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में बुधवार सुबह आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई. कई और गंभीर रूप से इस आग में झुलस गए.

जिस होटल में आग लगी, उसके आसपास के होटलों में कोई व्यवस्था नहीं है.
नई दिल्ली:

राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर में बने एक होटल में बुधवार सुबह अचानक आग लग गई. इस आग में 21 लोग जिंदा जल गए. दिल्ली पुलिस ने बताया कि आग सुबह 8:48 बजे 'फ्लोरिश स्टे बी एंड बी' में लगी थी. जान गंवाने वालों में ज्यादातर विदेशी नागरिक हैं. जिस होटल में आग लगी थी, जब वहां NDTV की टीम पहुंची तो पता चला कि 6 कमरों का ही लाइसेंस था लेकिन यहां 25 कमरे बनाए गए थे.

दरअसल, दक्षिणी दिल्ली के साकेत इलाके के मैक्स अस्पताल के ठीक सामने हौजरानी गांव में 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स के समय Incredible India B&B / home stay scheme को लॉन्च किया था. इस स्कीम के तहत मकान मालिक एक कमरे से लेकर 5 कमरे केवल 10 बेड के लिए लाइसेंस ले सकता था. इसी लाइसेंस को पहले लिया गया. फिर साल दर साल इसे होटल में बदल दिया गया. 

जैसे जैसे भारत में मेडिकल टूरिज्म बढ़ा, वैसे-वैसे इन होटल्स की किस्मत चमकी और सारे नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए इसे 20-30 कमरों के होटल में बदल दिया गया.

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दो फिट का रास्ता और 30 कमरों का होटल 

कभी 2-3 फीट के संकरे रास्ते में 30 कमरे का होटल चल सकता है? आपका जवाब नहीं ही होगा. लेकिन दिल्ली में हादसे वाले फ्लोरिश होटल के ठीक बगल में 5 मंजिला लेमन ग्रीन होटल बना है. उसका रास्ता महज दो से ढाई फीट का है. यानी एक आदमी बैग लेकर बामुश्किल चल सकता है.

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स्थानीय निवासी फहीम ने बताया कि लवकुश बजाज नाम के शख्स के इस इलाके में तीन होटल हैं और तीनों में नियम कानून की धज्जियां उड़ाई गई है. फ्लोरिश होटल में लोगों की मौत के पीछे एक ही रास्ता आने और जाने का था. इसके चलते ये हादसा काफी बड़ा हो गया.

तहखाने में होटलों के कमरे 

फ्लोरिश होटल में जब आग लगी तो बचाव दल ऊपर की ओर लोगों को बचाने के लिए भागा लेकिन पता चला कि बेसमेंट में भी चार कमरे बने थे, जहां 8 विदेशी नागरिक फंसे थे. 

चश्मदीदों ने बताया कि बेसमेंट में जाने वाली सीढ़ी का रास्ता लॉक था. फिर फायर ब्रिगेड की मदद से इसको तोड़ा गया. फिर वहां से कुछ मृतकों को निकाला गया जो धुएं की वजह से पहले बेहोश हुए और फिर उनकी मौत हो गई. लेकिन बेसमेंट में सिर्फ इसी होटल का कमरा नहीं था.

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NDTV ने जब पड़ताल की तो पाया कि जले होटलों से महज 100 मीटर की दूरी पर ग्रीन रेसिडेंसी है जहां तहखाने में एक-दो नहीं बल्कि 6 कमरे बने हैं. पड़ताल में सामने आया कि इन बेसमेंट में बने कमरों में न तो कोई खिड़की है और न ही बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता. यहां तक कि आग से बचने का भी कोई रास्ता नहीं है. सवाल ये उठता है कि कैसे बिना फायर NOC के कई साल से ऐसे होटल चल रहे हैं?

दिल्ली सरकार ने दिया जांच के आदेश 

दिल्ली सरकार ने ऐसे होटल और नक्शे की जांच के आदेश दिए हैं. मालवीय नगर के विधायक सतीश उपाध्याय ने कहा कि ये दुखद घटना है और वो पूरे मामले की जांच करवाएंगे. इस मामले में जो दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी.

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