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7 साल अमेरिका में गुजारने के बाद वतन लौटी भारतीय टेकी, कहा-'पॉकेट मनी' जैसी लगती है सैलरी'

सात समंदर पार डॉलर बटोरने के बाद जब अदिति द्विवेदी वतन लौटीं, तो उनकी सैलरी का ग्राफ तो नीचे गिरा पर सुकून का लेवल 'सातवें आसमान' पर पहुंच गया. अमेरिका की चकाचौंध और वीजा के 'हड़कंप' को गुडबाय कहकर भारत आई इस टेकी की कहानी सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही है.

7 साल अमेरिका में गुजारने के बाद वतन लौटी भारतीय टेकी, कहा-'पॉकेट मनी' जैसी लगती है सैलरी'
डॉलर वाली 'मैडम' को भारत में मिल रही 'पॉकेट मनी', अमेरिका की ऐश छोड़ दिल्ली की गलियों में सुकून तलाश रही भारतीय टेकी
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US VS India Job Experience: अमेरिका में 7 साल तक कॉग्निजेंट जैसी दिग्गज कंपनी में मास्टर्स के बाद दिमाग खपाने वाली अदिति द्विवेदी ने जब इंडिया आने का फैसला किया, तो बहुतों के कान खड़े हो गए. ओहायो यूनिवर्सिटी से डिग्री लेकर जब वह दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर उतरीं, तो अहसास हुआ कि यहां की सैलरी और वहां के डॉलर के मुकाबले में जमीन-आसमान का फर्क है. अदिति कहती हैं कि अब जो हाथ में आता है, वह किसी भारी-भरकम पैकेज जैसा नहीं, बल्कि छोटी-मोटी 'पॉकेट मनी' जैसा महसूस होता है, लेकिन इस छोटी रकम में जो बड़ी बात है, वो है...सुकून की नींद.

वीजा का झमेला और परदेस का अकेलापन (The Visa Struggle and Life Abroad)

अदिति ने थ्रेड्स पर अपने दिल का हाल बयां करते हुए लिखा कि, अमेरिका में वह सिर्फ काम नहीं करती थीं, बल्कि वीजा की तलवार के नीचे जिंदगी जीती थीं. हर वक्त यह डर कि कहीं नौकरी गई तो बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ेगा. वहां काम का प्रेशर इतना था कि इंसान खुद को भूल जाए, लेकिन दिल्ली लौटकर अब वह वर्क-लाइफ बैलेंस की 'महारानी' बनना चाहती हैं. भले ही अब वह अपनी हर बड़ी ख्वाहिश सैलरी से पूरी न कर पाएं, पर शाम को सुकून से चाय की चुस्की लेना उन्हें ज्यादा रास आ रहा है.

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इंडिया में नौकरी का जुगाड़ और बदलते मिजाज (Job Hunting in India and Changing Priorities)

भारत आकर अदिति के लिए राह इतनी आसान भी नहीं रही. यहां के कॉरपोरेट कल्चर में 'परफेक्ट मैच' ढूंढना थोड़ा टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. वह कई कंपनियों के चक्कर लगा रही हैं, रिजेक्शन और सिलेक्शन के बीच अपनी जगह तलाश रही हैं. अदिति का मानना है कि यह सब एक तजुर्बा है. अब उनकी प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं. वह ऐसी दौड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं, जहां पैसा तो हो पर खुद के लिए वक्त ही न बचे. सोशल मीडिया पर लोग उनकी इस हिम्मत की दाद दे रहे हैं, तो कुछ इंडिया के वर्क कल्चर को लेकर उन्हें आगाह भी कर रहे हैं.

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अदिति की यह कहानी हर उस शख्स के लिए एक आईना है, जो सिर्फ नंबरों के पीछे भाग रहा है. पैसा जरूरी है, पर क्या वह मानसिक शांति से बड़ा है? अदिति ने तो 'पॉकेट मनी' वाली सैलरी चुनकर यह साबित कर दिया है कि, कभी-कभी पीछे हटना ही असल में जिंदगी में आगे बढ़ना होता है.

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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

लेखक के बारे में
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शालिनी सेंगर
Senior Sub Editor
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