भारत की दिग्गज वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने बुधवार को एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीतकर लंबे समय से चले आ रहे पदक के सूखे को खत्म किया. साल 2014 से एशियाई खेलों में पदक का इंतजार कर रहीं मीराबाई ने महिला 49 किग्रा वर्ग में कुल 198 किग्रा (88 किग्रा स्नैच और 111 किग्रा क्लीन एवं जर्क) वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया. यह सिल्वर एशियाई खेलों में 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के सिल्वर मेडल के बाद भारोत्तोलन में भारत का पहला मेडल भी है.
बत्तीस वर्षीय मीराबाई जब भी प्रतिस्पर्धा करती हैं तो सुर्खियों में रहती हैं. टोक्यो ओलंपिक 2021 की रजत पदक विजेता मीराबाई ने मुस्कान के साथ भारी वजन उठाया और बाद में कहा कि उनका सपना अब पूरा हो गया है. उन्होंने एनडीटीवी से खास बातचीत में कहा कि 'वह इस सिल्वर मेडल को अपने जीवन का सबसे बड़ा मेडल मान रही हैं.' उन्होंने इसे ओलंपिक से भी बड़ा मेडल बताया. उन्होंने कहा, 'मैं आज बहुत ज्यादा खुश हूं. सर (कोच) का भी सपना था कि हम एशियन गेम्स में मेडल जीतें और ये सपना आज पूरा हुआ है. मेरे लिए उससे बड़ी खुशी नहीं हो सकती है.'
'एशियन गेम्स में सबसे स्ट्रॉन्ग कैंडिडेट्स रहते हैं'
मीराबाई ने इस मेडल को सबसे बड़ा इसलिए बताया क्योंकि उनका मानना है कि एशियन गेम्स में सबसे स्ट्रॉन्ग कैंडिडेट्स रहते हैं. उन्होंने कहा कि एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग सबसे मुश्किल होती है.
वजन कंट्रोल करना था सबसे मुश्किल
जब मीराबाई से पूछा गया कि एशियन गेम्स के लिए उन्होंने क्या अलग किया था, तो उन्होंने बताया कि वजन को कंट्रोल करना सबसे मुश्किल काम रहता है. उन्होंने ज्यादा से ज्यादा डाइट का ध्यान रखा और सिंपल खाने पर ही फोकस किया. मीराबाई ने बताया कि उन्होंने 2007 से अपना वजन 48-49 किलोग्राम ही रखा है. उन्होंने कहा कि वजन के लिए खाने पर हमेशा कंट्रोल रखा.'
'अब पिज्जा और बहुत सी चीजें खाऊंगी'
मेडल के बाद सेलिब्रेशन को लेकर मीराबाई ने कहा कि अब वह पिज्जा और बहुत सी चीजें खाएंगी।.उन्होंने बताया कि स्वीट और आइसक्रीम में से भी कुछ खाने वाली हैं.
ट्रक ड्राइवर्स का करियर में बड़ा योगदान
जब मीराबाई से पूछा गया कि टोक्यो से जीतकर आने के बाद उन्होंने ट्रक ड्राइवर्स को अपना खाना खिलाया था, क्योंकि वह उनके ट्रक में जाती थीं, तो अब क्या करने वाली हैं. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि, 'शुरुआत से ही उन्हें ट्रक ड्राइवर्स का बहुत सपोर्ट मिला है.' मीराबाई ने कहा, 'मेरा करियर बनाने में ट्रक ड्राइवर्स का बहुत बड़ा योगदान रहा है. हमारे मणिपुर में कुछ न कुछ होता रहता है, ऐसे समय में मुझे उनका साथ मिला था. जब भी मौका मिलेगा, मैं उनके लिए कुछ न कुछ जरूर करूंगी.' उन्होंने कहा कि जैसे मौका मिलेगा तो सबसे पहले वह ट्रक ड्राइवर्स को फिर से शुक्रिया अदा करेंगी.
मीराबाई ने सुनाया लता मंगेशकर का गाना
मीराबाई ने कहा कि उनकी नजर लॉस एंजेल्स ओलंपिक 2028 के मेडल पर भी है. इसके साथ ही उन्होंने जाते-जाते लता मंगेशकर का गाना 'लग जा गले कि ये हसीं रात हो ना हो...' गाकर सुनाया.
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