भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने बुधवार को महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर एशियाई खेलों में पदक के 12 साल के लंबे इंतजार खत्म किया. टोक्यो ओलंपिक की सिल्वर मेडल विजेता मीराबाई ने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम भार के साथ कुल 198 किलोग्राम वजन उठाया. यह भारत का 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के कांस्य पदक जीतने के बाद एशियाई खेलों में भारोत्तोलन में पहला मेडल है.
इस खास मौके पर मीराबाई ने एनडीटीवी से बातचीत के दौरान कहा कि, हमने मेडल के लिए बहुत कोशिश की और यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. मेरे कोच (विजय शर्मा) का जो कॉन्फिडेंस है, यही मेरी सबसे बड़ी ताकत रही. हम मेडल के लिए पहले से ही कॉन्फिडेंस थे. और उम्मीद थी कि एक मेडल तो भारत के लिए जरूर जीतना है.'
मेडल मेरे और मीरा के लिए ऑलंपिक जितना ही जरूरी
इस सवाल के जवाब में कि आपने जो बोला वही हुआ कोच विजय शर्मा ने बताया कि, 'हम अपने कॉम्पिटिटर्स पर नजर रखे हुए थे. हमारा मुख्य फोकस चोट से बचे रहने पर था. इस मेडल के पीछे बहुत सोच-समझकर की गई प्लानिंग थी.' उन्होंने कहा कि अगर हमें सिल्वर के लिए दो यार चार किलो की जरूरत होती तो हम वो भी कर सकते थे. कोच ने कहा कि, ये मेडल मेरे और मीरा के लिए ऑलंपिक जितना ही जरूरी है. और हम दिल से बहुत खुश हैं. उन्होंने कहा कि जापान हमारे लिए लकी है.'
मीराबाई ने बताया लिफ्ट करते समय इतनी कूल कैसे थीं?
जब मीराबाई से एनडीटीवी ने पूछा कि आप लिफ्ट करते समय इतनी कूल कैसे थीं? जबकि बाकी लोग टेंशन में थे, ये कैसे हुआ? उन्होंने बताया कि, इस बार मुझे पूरा कॉन्फिडेंस था. सर (कोच) ने भी रिलैक्स रहने के लिए बोला था. इस बार मैं पहले ज्यादा नॉर्मल थी. और सर की बताई हर बात को फॉलो किया.'
'काफी सालों से सपना था एशियन गेम्स में मेडल लाना'
मीराबाई ने बताया कि, 'काफी सालों से सपना था कि एशियन गेम्स में मेडल लाना है. मुझे पता भी नहीं था कि एशियन गेम्स क्या होता लेकिन धीरे-धीरे समझ आया. और काफी समय से प्रयास कर रहे थे लेकिन कुछ न कुछ छूट रहा था. इस बार हमारे पास मौका भी ज्यादा था. हमारी पूरी कोशिश थी कि एशियन गेम्स में किसी भी तरह से मेडल लाना है. इस खास मौके पर कोच विजय शर्मा ने अपने हाथ से मीराबाई को मेडल पहनाया.
मीराबाई चानू ने कहा, 'कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद से यह पहली बार है जब मैं पिज़्ज़ा खा रही हूं.' मीराबाई के कोच विजय शर्मा ने हंसते हुए कहा कि, 'मैं सिर्फ आज के लिए ही इसकी इजाजत दे रहा हूं. वरना, उन्हें यह खाने की इजाजत नहीं है.' हमें पता था कि अगर हम ऐसा कर पाए, तो हम अच्छा वज़न उठा सकते हैं और यहां मेडल जीत सकते हैं. हमने तैयारी इस तरह की थी कि अगर सिल्वर के लिए 2-5 किग्रा ज़्यादा वज़न उठाना पड़ता, तो हम वह भी कर सकते थे। इसीलिए, स्नैच में हमने सेफ़ खेलना बेहतर समझा.'
ओलंपिक के लिए मीराबाई का लक्ष्य तय
कोच विजय शर्मा ने कहा कि आगे और भी कड़ी मेहनत की ज़रूरत होगी, और अगले बड़े इवेंट के लिए प्लानिंग पहले ही शुरू हो चुकी है.' मीराबाई के कोच ने बताया कि डाइट चार्ट पहले ही तैयार कर लिया गया है. शर्मा ने कहा, 'उनका वज़न घटाकर 48 किलोग्राम तक लाना बहुत मुश्किल था. 49 किलोग्राम पर भी यह मुश्किल था.' लॉस एंजिल्स ओलंपिक में अब बस दो साल ही बचे हैं, और मीराबाई का लक्ष्य तय है.
इसके अलावा मीराबाई ने बाद में कहा, 'एशियाई खेलों में पदक जीतना सपना सच होने जैसा है. मैं पिछले 12 वर्षों से, 2014 के एशियाई खेलों से ही इस पदक के लिए कोशिश कर रही थी. इस पदक के साथ मेरा जीवन पूर्ण हो गया है. अब मैं बहुत हल्का महसूस कर रही हूं. ये मेरे सपनों के एशियाई खेल हैं.'
उत्तर कोरिया की री सोंग गम ने जीता गोल्ड मेडल
उत्तर कोरिया की दो बार की विश्व चैंपियन री सोंग गम ने उम्मीदों पर खरे उतरते हुए कुल 215 किलोग्राम (94 और 121 किलोग्राम) वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता और एशियाई खेलों में खिताबी हैट्रिक पूरी की। उन्होंने कुल वजन में विश्व रिकॉर्ड बनाया. इंडोनेशिया की लुलुक डायना त्रिविजयाना ने 191 किलोग्राम (88 और 103 किलोग्राम) भार के साथ कांस्य पदक हासिल किया.
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