- आजमगढ़ में अरविंद ने अपनी पत्नी, बेटे और दो पंडितों की गोली मारकर हत्या की घटना हुई थी.
- चश्मदीद हिमांशु मिश्रा के अनुसार अरविंद ने आधार कार्ड दिखाने को लेकर पंडितों से विवाद किया था.
- अरविंद ने पत्नी को गोली मारी और फिर पंडितों पर गोली चलाकर हत्या की कोशिश की थी.
आजमगढ़ में पत्नी-बेटे और दो पंडितों की गोली मारकर हत्या किए जाने की पूरी कहानी अब चश्मदीद के जरिए सामने आई है. जिस समय अरविंद ने पंडितों से आधार कार्ड मांगा, पत्नी को गोली मारी, फिर पंडितों पर गोली चलाई, उस समय उसके घर में तीन पंडित मौजूद थे. दो की तो उनसे हत्या कर दी. एक हिमांशु मिश्रा नामक पंडित वहां से दीवार फांद कर भाग गए थे. अब हिमांशु ने उस समय के पूरे घटनाक्रम के बारे में मीडिया से बात की है. हिमांशु के पिता अखिलेश मिश्रा की भी इस हत्याकांड में मौत हो चुकी है. हिमांशु आजमगढ़ के छितौना भटौली गांव के रहने वाले हैं. पिता अखिलेश मिश्रा के साथ वो अरविंद के घर अनुष्ठान में शामिल करवा रहे थे.
आजमगढ़ हत्याकांड के चश्मदीद हिमांशु मिश्रा ने क्या कुछ बताया?
हिमांशु मिश्रा ने बताया कि पांच दिन का अनुष्ठान था, मंगलवार को चौथा दिन था. बुधवार को पूर्णाहुति होती. बाधा दूरे हो, सबकी बुद्धि ठीक रहे यहीं अनुष्ठान का उद्देश्य था. सबसे ज्यादा उन्हीं (अरविंद) की बुद्धि खराब थी. हमलोग तीन लोग पूजा-पाठ कराने आए थे. मंगलवार शाम 5 साढ़े 5 बजे घटना हुई. अरविंद घर में रहते थे. दिन भर तो वो ठीक रहे. जब पूजा-पाठ के बाद हमलोग जाने लगे तो उन्होंने पूछा कि क्यों आए हो तुमलोग यहां?
फिर जब हमने कहा कि हम पंडित हैं, तुम्हारे घर वालों ने बुलाया है तब आए हैं. उनकी मां और पत्नी ने हमलोगों को पूजा-पाठ के लिए बुलाया था. फिर वो गंदे भाषा का इस्तेमाल करते हुए आधार कार्ड मांगने लगे.

जब हमने कहा कि आधार कार्ड तो हमलोग लेकर नहीं आए हैं. कल आएंगे तो आधार कार्ड लेते आएंगे दिखा देंगे. तो फिर वो गाली-गलौज करते हुए आधार कार्ड दिखाने पर अड़ गया. धमकी भी दी कि आधार कार्ड दिखाओ नहीं तो मार देंगे. जब परिवार के लोगों ने विरोध जताया तो उनलोगों से भी भिड़ गया. फिर बहस के बीच उसने लाठी हाथ में उठा ली.
हमपर गोली चलाई तो पत्नी बीच में आई, उसे लगी गोली: हिमांशु
हमलोग भी सोचे कि उसे कैसे भी करके रोके. इसके तुरंत बाद उसने पिस्टल निकाल ली. हमलोगों पर गोली चलाने लगा. इस बीच उसकी पत्नी बीच में आ गई. उसे गोली लगी और वो वहीं गिर गई. पत्नी को गोली मारने के बाद वो हम पंडितों पर गोली चलाने लगा. इस बीच उसके पुरोहित महेंद्र पाठक भागने लगे. वो गेट से बाहर निकलते इससे पहले अरविंद ने उन्हें भी गोली मार दी. गेट के पास उन्हें पीठ पर गोली लगी.
'मैं दीवार फांदकर भाग गया, भतीजी ने पुलिस को किया फोन'
इसके बाद मेरे पापा थे, मेरे पापा अरविंद की मां के पीछे थे. जब उसने पहली गोली चलाई तो वो किसी तरह बच गए. लेकिन फिर दूसरी गोली उन्हें लगी. इस बीच मैं दीवार फांद कर भाग गया. मैं भागते हुए अपने भैया के पास पहुंचा. सबको फोन किया. अरविंद की भतीजी ने पुलिस वाले को फोन किया. जिसके बाद पुलिस वहां मौके पर पहुंचा.
अरविंद का कैसा था व्यवहार, क्या वो नशे में था? पंडित ने बताया
व्यवहार कैसा था... इस सवाल पर हिमांशु ने कहा- हम लोग तीन-चार दिन उनके यहां जा रहे थे. उनका व्यवहार सामान्य था. पूजा-पाठ से उनको कोई मतलब नहीं था. न कोई रोक-टोक थी. पता नहीं कल अचानक क्या हुआ? क्या अरविंद नशे में था... इस सवाल पर हिमांशु ने कहा कि नहीं, वो रोज जैसा दिखते थे, वैसे ही थे, उनका व्यवहार रोज जैसा ही था.
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