'बिग बॉस 20' के लेटेस्ट एपिसोड में उस वक्त माहौल बेहद भावुक हो गया, जब छह बार की वर्ल्ड चैंपियन बॉक्सर और ओलंपिक मेडलिस्ट मैरी कॉम ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर को याद किया. मैरी ने रोते हुए बताया कि एक समय वह इतनी टूट गई थीं कि अपनी जान देने के बारे में सोचने लगी थीं, लेकिन अपने छोटे बच्चों के लिए उन्होंने खुद को संभाला.
जिदंगी खत्म करने का बना लिया था मन
दरअसल, ईशा रिखी, रीति तिवारी और कनिका मान से बातचीत के दौरान मैरी कॉम ने अपने बचपन और संघर्षों को याद किया. उन्होंने कहा, 'मैं बहुत मजबूत हूं. लेकिन उस साल, मैं थोड़ी कमजोर पड़ गई थी. मैं टूट गई थी. मुझे बहुत कुछ करना था. मैं अपनी जिंदगी खत्म करने का मन बना लिया था. मैं यही सोच रही थी. लेकिन मैं अपने बच्चों के लिए जिंदा हूं. वे छोटे थे.'
बचपन से ही किया संघर्ष
मैरी ने कहा कि उन्होंने बचपन से ही काफी कुछ झेला है और अपने परिवार, राज्य और देश के लिए त्याग किया है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके अंदर आज भी मेडल जीतने की भूख है, लेकिन उम्र की सीमा के कारण अब वह मुकाबलों में हिस्सा नहीं ले सकतीं. मैरी ने कहा, 'मैं और मेडल जीतना चाहती हूं. एक मेडल काफी नहीं है. दो मेडल काफी नहीं हैं. तीन मेडल काफी नहीं हैं. मुझमें अभी भी भूख है, लेकिन ज़्यादा उम्र होने के कारण अब मैं हिस्सा नहीं ले सकती.'
'बिग बॉस 20' में कैप्टेंसी टास्क में बढ़ा तनाव
कैप्टेंसी की दावेदारी वाले टास्क में घरवालों को 'टीम काजी' और 'टीम यंग' में बांटा गया. 'डिस-बेस्ड बैटल' के दौरान कंटेस्टेंट्स ने एक-दूसरे पर तंज कसे और मामला बहस तक पहुंच गया. अमन गांधी पर यंग डीएसए की टिप्पणियों के बाद टकराव हुआ, वहीं काजी तौकीर और रीति के बीच भी तनाव देखने को मिला. 'बिग बॉस 20' रात 9 बजे JioHotstar पर स्ट्रीम होता है और रात 10:30 बजे Colors TV पर प्रसारित होता है.
मैरी कॉम का करियर
भारत की महान मुक्केबाज मैरी कॉम ने अपने शानदार करियर में भारतीय बॉक्सिंग को नई पहचान दिलाई. मणिपुर से आने वाली मैरी कॉम छह बार की विश्व चैंपियन हैं और 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर ओलंपिक मेडल हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं. उन्होंने 2014 एशियाई खेलों और 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भी गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा. दो दशक से अधिक लंबे करियर में मैरी कॉम ने कई बार साबित किया कि सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियां भी उनके हौसले को नहीं रोक सकतीं. इसी वजह से उन्हें "मैग्निफिसेंट मैरी" के नाम से जाना जाता है और वह भारतीय खेल जगत की सबसे प्रेरणादायक खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं.
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