भारतीय निशानेबाज कमलजीत और सुरुचि सिंह ने शुक्रवार को एशियाई खेलों की 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता अपने नाम किया है. यह शूटिंग में एशियाड 2026 का भारत का गोल्ड है. यह 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धाओं में भारत का पदक जीतने का आखिरी मौका था और कमलजीत और सुरुचि सिंह ने निराश नहीं किया. हालांकि, जब पिछली बार हांगझोउ में एशियाड का आयोजन हुआ था, तब कमलजीत शूटर बनने का सपना नहीं देखते थे. वह भारतीय सेना में शामिल होना चाहते थे. कमलजीत एक ट्रैक एंड फील्ड एथलीट थे. लेकिन एक दुर्घटना के बाद कहानी पूरी तरह से बदल गई.
आर्मी का सपना छूटा
हरियाणा के रेवाड़ी जिले के सुलखा गांव के रहने वाले कमलजीत शुरुआत में शूटर नहीं थे. वह ट्रैक एंड फील्ड एथलीट थे. उनका मकसद फिजिकल टेस्ट पास करके इंडियन आर्मी में शामिल होना था. लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल दी. ट्रेनिंग के दौरान उन्हें चोट लगी, जिसके बाद उन्हें दौड़ना छोड़ना पड़ा. लेकिन ट्रैक एंड फील्ड का नुकसान शूटिंग के लिए फायदेमंद साबित हुआ. तब महज 15 साल के कमलजीत ने हार नहीं मानी और शूटिंग में करियर आजमाने का विकल्प चुना.
2019 में शूटिंग में हुई दिलचस्पी
कमलजीत की शूटिंग में दिलचस्पी तब शुरू हुई जब उनके चाचा दिनेश सोहलोट उन्हें अपने दोस्त शक्तिपाल की एकेडमी में ले गए. कोच ने सारा खर्च उठाया, जिससे परिवार को बड़ी राहत मिली. उनके चाचा ने भी उनकी शूटिंग के खर्च के लिए लोन लिया था. कमलजीत बताते हैं कि ऐसे कई मौके आए जब घर की आर्थिक तंगी के चलते वह शूटिंग छोड़ना चाहते थे.
कमलजीत के चाचा दिनेश सोहलोट बताते हैं,"हम एक जॉइंट फ़ैमिली में रहते हैं और हमारे पास लगभग दो एकड़ ज़मीन है. दूसरे बच्चों की तरह, कमलजीत का भी सपना था कि वह इंडियन आर्मी में नौकरी करके परिवार की मदद करे. मेरे दोस्त और कोच शक्तिपाल उसकी सहनशक्ति से प्रभावित थे और उन्होंने सुझाव दिया कि उसे शूटिंग में हाथ आज़माना चाहिए. हमारा पहला ख्याल यही था कि हम घर की बुनियादी ज़रूरतें भी मुश्किल से पूरी कर पाते हैं, तो वह इतने महंगे खेल में कैसे शामिल हो सकता है? लेकिन फिर शक्तिपाल और दूसरे दोस्तों और रिश्तेदारों ने हमारी मदद की."
एक्सीडेंट में टूटी जांघ की हड्डी
साल 2023 में, जब कमलजीत ट्रेनिंग के बाद ऑटो-रिक्शा से अपने गांव सुल्खा लौट रहे थे, तो ऑटो का एक्सीडेंट हो गया जिसमें उनके साथ यात्रा कर रहे दो लोगों की मौत हो गई. इस हादसे में कमलजीत की जांघ की हड्डी टूट गई. उन्हें गुड़गांव के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. जांघ की हड्डी (फीमर) के इलाज और हॉस्पिटल का बिल भरने के लिए उनके परिवार ने दोस्तों और रिश्तेदारों से पैसे उधार लिए.
हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी. कमलजीत बहुत अधिक दिनों पर बिस्तर पर नहीं रहे. अस्तपाल से लौटकर जब वह घर आए तो लेटे-लेटे ही शूटिंग का अभ्यास करते. फिट होकर लौटने के बाद जबरदस्त वापसी की. उन्होंने चांगवोन में ISSF वर्ल्ड कप के 50 मीटर पिस्टल इवेंट में टीम गोल्ड जीता. जबकि व्यक्तिगत फ़ाइनल में वे सातवें स्थान पर रहे.
अजरबैजान में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में 50 मीटर पिस्टल इवेंट में 11वां स्थान हासिल किया. अगले साल इस युवा खिलाड़ी ने नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और अलग-अलग कैटेगरी में मेडल जीते. पिछले साल अपनी खुद की पिस्टल मिलने से पहले, यह युवा खिलाड़ी 1.5 लाख रुपये की सेकंड-हैंड पिस्टल का इस्तेमाल करता था. कमलजीत के चाचा दिनेश बताते हैं कि यह युवा खिलाड़ी अपनी ताकत और हाथ की स्थिरता को बेहतर बनाने के लिए अकादमी से लौटने के बाद ईंटों और डंबल्स के साथ ट्रेनिंग करता था.
यह भी पढ़ें: एशियन गेम्स 2026: सेमीफाइनल में क्या होगी गुरिंदरवीर की असल चुनौती? फाइनल में किससे मिलेगी टक्कर?
यह भी पढ़ें: ‘हारी' सुरुचि ने वीडियो कॉल पर गाय को देखकर बढ़ाया हौसला, कृष्ण और गाय की पूजा कर जीता गोल्ड- मां ने बताया
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं